अंतरिक्ष में भारत

Sandeep Yash
Sriharikota: Indian Space Research Organisation (ISRO)’s PSLV-C45 carrying EMISAT and 28 other satellites lifts off from the Satish Dhawan Space Center in Sriharikota, Monday, April 1, 2019. (PTI Photo/ISRO)

Sriharikota: Indian Space Research Organisation (ISRO)’s PSLV-C45 carrying EMISAT and 28 other satellites lifts off from the Satish Dhawan Space Center in Sriharikota, Monday, April 1, 2019. (PTI Photo/ISRO)

नमस्कार आज बात भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की हो रही है। स्वतंत्र भारत में इसका श्रेय डॉ विक्रम साराभाई को जाता है। 1962 में इन्होने Indian National Committee for Space Research (INCOSPAR) की नीव रखी थी। इस दौर में ‘अंतरिक्ष’ इंसान के लिए अगली बड़ी चुनौती बन कर उभरा था। 1964 में टोक्यो ओलिंपिक खेलो के लाइव प्रसारण में अमेरिकी सॅटॅलाइट ‘Syncom-3’ ने एहम भूमिका निभाई थी। इसके साक्षी रहे डॉ साराभाई ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी  की क्षमता को पहचान लिया था और आगे बढे थे। तो चलिए भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़े मील के पत्थर देखते हैं

आपकी जानकारी के लिए भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के 3 मूल उद्देश्य रहे हैं –
1. Satellites for communication and Remote sensing
2 .Space transportation system
3 .Application programmes

– तो 1965 में थुम्बा, केरल में Space Science and Technology Centre की स्थापना की गयी।

– 1967 में, अहमदाबाद में पहला Experimental Satellite Communication Earth Station (ESCES) बना।  ये स्टेशन भारतीय, अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए प्रशिक्षण केंद्र भी था।

– एक सॅटॅलाइट सिस्टम की देश के विकास में क्या भूमिका हो सकती है इसे साबित करने के लिए 26  जनवरी, 1967 को ‘कृषि दर्शन’ कार्यक्रम शुरू किया गया। इस 20 मिनट के कार्यक्रम का पहला प्रसारण दिल्ली के आस पास के 80 गांव में हुआ था। लक्ष्य था स्कूली बच्चों और किसानो तक पहुंचना। इसे अच्छी प्रतिक्रिया मिली।

– 15 अगस्त, 1969 को INCOSPAR का नाम बदलकर ISRO कर दिया गया।

–  1971: आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में Satish Dhawan Space Centre बनाया गया।

–  1975 -76  में Satellite Instructional Television Experiment (SITE) नाम का प्रयोग हुआ जिसे तब दुनिया का सबसे बड़ा सामाजिक प्रयोग माना गया था। इस दौरान बने विकास कार्यक्रम – छह राज्यों के 2400 गाँवों तक पहुंचे थे जिनसे लगभग 2 लाख लोग लाभान्वित हुए थे। SITE में American Technology Satellite (ATS-6) का प्रयोग हुआ था।

– 19 अप्रैल, 1975: इसरो ने भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट बनाया, जिसे सोवियत संघ से लॉन्च किया गया।

– 1977 -79 के बीच Satellite Telecommunication Experiments Project (STEP) शुरू हुआ। जहाँ SITE टेलीविजन पर केंद्रित था वहीँ STEP का मक़सद घरेलू संचार के लिए उपग्रह प्रणाली बनाना और प्रस्तावित INSAT सीरीज के लिए ज़मीन तैयार करना था। इस प्रयोग में Franco-German Symphonie satellite का इस्तेमाल हुआ था।

– जुलाई 18, 1980 : रोहिणी पहला उपग्रह था जिसे भारतीय निर्मित प्रक्षेपण यान SLV-3 द्वारा ऑर्बिट में स्थापित किया गया

तो 80 के दशक में तमाम महत्वपूर्ण प्रयोग हुए, PSLV और GSLV. जैसे लांच प्लेटफॉर्म्स तैयार हुए जो भविष्य में भारत को आला मुकाम दिलाने वाले थे।

–  1981: Geostationary communication satellite APPLE और भास्कर -2 को सोवियत यूनियन से लॉन्च किया गया

–    1982: अमेरिकी रॉकेट द्वारा इनसेट -1 ए संचार उपग्रह का प्रक्षेपण किया गया

–  1984:  पहले भारतीय कॉस्मोनॉट राकेश शर्मा ने एक रूसी रॉकेट सोयुज टी -11 में उड़ान भरी। वो आठ दिन तक रूसी अंतरिक्ष स्टेशन साल्युत -7 में रहे।

90 के दशक में हमारे PSLV राकेट सफलता का पर्याय बन गए । ISRO के इन सपूतों ने भारत को विदेशी उपग्रहों को लॉन्च करने और विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले देशों की कतार में ला खड़ा किया था।  इसी दशक में अंतरिक्ष कार्यक्रम के बुनियादी ढांचे को दो व्यापक वर्गों के तहत विकसित किया गया था।
पहला – संचार, प्रसारण और मौसम विज्ञान के लिए (Indian National Satellite system (INSAT) पर आधारित था
दूसरा – Indian Remote Sensing Satellite (IRS) पर आधारित था

May 20, 1992 – ISRO ने Augmented Satellite Launch Vehicle (ASLV) और Insat – 2A लांच किये

इसी चरण में Polar Satellite Launch Vehicle (PSLV) और Geo-synchronous Satellite Launch Vehicle (GSLV) जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियां देश ने हासिल की थीं।

सन 2000 के बाद भारी रॉकेट और सुदूर ग्रहों तक जाने का दौर शुरू होता है

– 2001: Geosynchronous Satellite Launch Vehicle (GSLV) भारत की GSAT-1 satellite को और PSLV – बेल्जियम तथा जर्मनी की सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में पहुँचाती हैं।

– 2005: श्रीहरिकोटा में दूसरा लॉन्च पैड कमीशन होता है

–  2008: PSLV द्वारा भारत का पहला चंद्र मिशन चंद्रयान -1 लांच होता है। सरकार द्वारा चंद्रयान -2 मिशन को मंजूरी मिलती है।.एक ही PSLV द्वारा 10 उपग्रहों का प्रक्षेपण होता है – 2 भारतीय और 8 विदेशी (अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, स्वीडन और बुल्गारिया)

– 2009: PSLV द्वारा Anna University की सॅटॅलाइट Anusat लांच किया जाता है। ये एक भारतीय विश्वविद्यालय का पहला उपग्रह था।

– Sep 09, 2012 : ISRO का 100 वां अंतरिक्ष मिशन था।

– 5 नवंबर, 2013 : भारत 5 नवंबर 2013 को Mars Orbiter Mission लॉन्च करता है जो 24 सितंबर, 2014 को मंगल की कक्षा में प्रवेश करता है। और भारत अपने पहले प्रयास में ही मंगल ग्रह पहुंचने वाला पहला देश बनता है। इस उपलब्धि के साथ इसरो, मंगल की कक्षा में पहुंचने वाली – दुनिया में चौथी और एशिया की पहली अंतरिक्ष एजेंसी बन जाती है।

–  फरवरी 15, 2017 : ISRO ने अकेले एक रॉकेट (PSLV-C37) से 104 उपग्रह लांच का विश्व रिकॉर्ड बनाया। इनमें सिर्फ 3 देसी उपग्रह थे।

– 14 नवंबर, 2018 : ISRO अपना सबसे भारी उपग्रह GSAT-29 श्रीहरिकोटा से लांच करती है।  इसका वज़न 3,423 किलोग्राम था।

– Jul 22, 2019 :  GSLV-Mk III प्रक्षेपण के साथ भारत ने दूसरा चंद्र मिशन ‘चंद्रयान -2′ लॉन्च किया।

तो चलते चलते

– विशेषज्ञों के मुताबिक़ 2017, ISRO के इतिहास का स्वर्णिम वर्ष था।
– ISRO के मुताबिक़ भविष्य की अंतरिक्ष परियोजनाओं में निजी क्षेत्र का 70% हिस्सा होगा
–  व्यावसायिक गतिविधियों के लिए ISRO ने Antrix Corporation Limited नाम की कंपनी शुरू की है
– प्राइवेट सेक्टर द्वारा निर्मित पहले PSLV का प्रक्षेपण 2021 में होने की योजना है
– दिसंबर, 2019 तक भारत 319 विदेशी सॅटॅलाइट लांच कर चुका है। इनसे 1 अरब डॉलर से ज़्यादा विदेशी मुद्रा अर्जित हुई है।
– 1975 -2019 के बीच भारत ने 118 देसी सॅटॅलाइट लांच किये हैं।
– भारत की 62 % सॅटॅलाइट का उपयोग संचार के लिए किया जाता है।
– भारत के उपग्रहों को लॉन्च करने की सफलता दर लगभग 90% है
– ISRO द्वारा लांच की गयी सैटेलाइट्स में -Remote Sensing Satellites, Navigation Satellites, Spy Satellites, और Military Satellites शामिल हैं।  .

ISRO (भविष्य के मिशन)
– 2021 में गगन यान
– 2023  में मिशन वीनस
– 2023 में मून मिशन (भारत और जापान का संयुक्त उपक्रम)
– 2024 में मंगलयान -2
– 2025 में Astrosat-2
– 2025  में भारत का अपना स्पेस स्टेशन

तो आज इस विषय पर इतना ही।