अतिथि देवो भव

Sandeep Yash

Tourismआज विश्व पर्यटन दिवस है। 1980 से 27 सितंबर को ये दिवस दुनिया भर में लगातार मनाया जाता है। 1970 में इसी दिन UNWTO के क़ानून अमल में आये थे जिन्हें वैश्विक पर्यटन में मील का पत्थर माना जाता है। वर्ल्ड ट्रेवल एण्ड टूरिज्म कांउसिल (WTTC) 2018 की रिपोर्ट में भारत को पर्यटन के मामले में विश्व में तीसरा स्थान मिला है। इस रिपोर्ट में 185 देशों के पिछले सात वर्षों (2011-2017) के प्रदर्शन पर फोकस किया गया था। तो इस बरस की थीम ‘पर्यटन और ग्रामीण विकास है। हमारी राष्ट्रीय पर्यटन नीति -2002 ग्रामीण क्षेत्रों में इसके विकास की विशाल सम्भावना देखती है जिसका दोहन होना बाकी है।  तो क्या पर्यटन सेक्टर, भारत के ग्रामीण आँचल की दशा और दिशा बदल सकता है। देखते हैं तस्वीर क्या कहती है।

भारत सरकार के मुताबिक़ कोई भी ऐसा पर्यटन, जो ग्रामीण जीवन, कला, संस्कृति और ग्रामीण स्थलों की धरोहर को दर्शाता हो, जिससे स्थानीय समुदाय को आर्थिक और सामाजिक लाभ पहुँचता हो, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच संवाद से अनुभव को समृद्ध बनाता हो, तो उसे ‘ग्रामीण पर्यटन’ कहा जा सकता है। ग्रामीण पर्यटन में कृषि पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन, प्रकृति पर्यटन, साहसिक पर्यटन और पर्यावरण पर्यटन शामिल हैं।

पर्यटन के माध्यम से ग्रामीण विकास, भारतीय सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में आता है। आकड़ों के मुताबिक़ इस बरस अप्रैल तक भारत में 640,867 गाँव थे और सरकार का ज़ोर ऐसे स्थलों के विकास पर है जो कला, संस्कृति, हथकरघा, धरोहर और शिल्प की दृष्टि से उन्नत हों, प्राकृतिक सौन्दर्य और सांस्कृतिक वैभव के मामलों में समृद्ध हों। फिलहाल पर्यटन मंत्रालय ने देश भर में ऐसे लगभग 153 ग्रामीण स्थानों की पहचान की है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के तहत भी 36 ग्रामीण स्थलों को चुना गया है। कोविद काल में जब शहरी आबादी  घरों से इतर सुरक्षा और सुकून ढूंढ रही हो तो ये सबसे अच्छा विकल्प है।

ग्रामीण पर्यटन के फायदे
ग्रामीण पर्यटन इस क्षेत्र के सामाजिक -आर्थिक विकास की कुंजी है
इससे खोई हुई विरासत, लोक कलाओं, हस्तशिल्पों और संस्कृति को पुनर्जीवित करने में मदद मिलती है
रोजगार सृजन में मदद मिलती है। महिलाओं और युवाओं और खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास कृषि भूमि नहीं है
स्थानीय समुदाय के सदस्य नए कौशल विकसित करते हैं
सांस्कृतिक आदान प्रदान को बढ़ावा मिलता है
ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने से स्थानीय समुदाय का शहरों की तरफ होता पलायन रुकता है
स्थानीय जीवनशैली में गुणात्मक परिवर्तन होता ह्यै, सड़क, बिजली, अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं का निर्माण होता है
पर्यटन उद्योग व्यापार के नए अवसर पैदा करता है, उद्यमशीलता बढ़ती है
आय के स्रोत बढ़ने से सतत आजीविका को बल मिलता है
पर्यटन से होते लाभ बने रहें इसलिए स्थानीय समुदाय, पर्यावरण हितैषी प्रथाओं को अपनाता है

मावलोंग, कच्छ, पीपली, पंजाब के गांव, होडका, इकोस्फीयर स्पीति, लाचुंग और लाचेन, पुत्तुर, बिश्नोई समुदाय के गांव , श्याम  गांव, मुंसियारी, किला रायपुर, माजुली, कराईकुडी, चित्रकोट, तीरथमलाई, बल्लभपुर डंगा, कुम्बलंगी द्वीप कुछ ऐसे नाम है जो पर्यटकों के बीच आज काफी मशहूर हैं चले है ।  राज्य स्तर पर कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के ग्रामीण पर्यटन मॉडल अच्छा उदाहरण माने जा रहे हैं।

केंद्र सरकार की पहलें
– 2002 -03 ग्रामीण पर्यटन योजना शुरू की गयी।  इस योजना किए तहत 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 186 परियोजनाओं को मजूरी दी गयी।  इनमें
56 परियोजना पूर्वोत्तर क्षेत्र में है

–  वर्ष 2017-18 के आम बजट में 5 विशेष पर्यटन अंचलों की घोषणा की गई, जहाँ राज्यों की भागीदारी के साथ विशेष प्रयोजन उद्यम किये जा रहे है

– ग्रामीण पर्यटन को आकर्षक बनाने के लिये पर्यटन मंत्रालय फार्म पर्यटन और ‘होम स्टे’ को भी प्रोत्साहित कर रहा है।

– Incredible India 2.0 के तहत पर्यटन मंत्रालय ने चार ग्रामीण पर्यटन स्थलों के विकास की योजना को मंज़ूरी दी

– कुछ चुनी हुई देसी थीम के इर्द गिर्द स्वदेश दर्शन नामक एक नई योजना बनी गयी है

– पर्यटकों की मदद के लिए ‘अतुल्य भारत हेल्पलाइन’ स्थापित की गई है।

– “अतुल्य भारत” के उप-ब्रांड के तौर पर Explore Rural India को बढ़ाया जा रहा है

– सरकार ने हार्डवेयर (पर्यटन क्षेत्र का बुनियादी ढांचा) और सॉफ्टवेयर (स्थानीय समुदायों के क्षमता निर्माण) की नीति अपनायी है

– Rural Tourism Infrastructure Development Corporation की स्थापना की गयी है

आपकी जानकारी के लिए, यूरोप में ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड, दक्षिण टायरोल, बवेरियन अल्पाइन क्षेत्र और ब्लैक फॉरेस्ट जैसे क्षेत्रों में ग्रामीण पर्यटन, आमदनी का बड़ा जरिया है।  भारत की लगभग 70% आबादी (Census 2011) ग्रामीण इलाकों में रहती है। तो ये क्षेत्र संभावनाओं से भरा है।  पर विशेषज्ञों के मुताबिक़ इस मुहीम की कामयाबी के लिए सारे हितधारक, जैसे सरकार, स्थानीय पंचायत, स्थानीय समुदाय, टूर ऑपरेटर, ट्रेवल एंजेसियां और पर्यटकों का परस्पर सहयोग ज़रूरी है। ख़ास तौर पर किसी भी ग्रामीण पर्यटन परियोजना की सफलता में स्थानीय समुदाय की भूमिका सबसे एहम है। साथ ही,आज  के दौर में तकनीक की भूमिका भी काफी एहम मानी जा रही है।

महात्मा गाँधी कहते थे कि “हम एक ग्रामीण सभ्यता के उत्तराधिकारी हैं। हमारे देश की विशालता, जनसंख्या का विस्तार, देश की जलवायु, ये सब मेरे विचार में  इसे एक ग्रामीण सभ्यता बनाते हैं।” ग्रामीण भारत के पास लोगों को देने के लिये बहुत कुछ है। आखिरकार, पर्यटन क्षेत्र – रोजगार और वैश्विक संबंधों की आधारशिला है। आज भले ही कोविद काल की चुनौतियाँ सामने हों, चाल भले ही सुस्त हों पर आने वाला कल उमीदों से भरा है।