आईएचसी की 75वीं वर्षगांठ का तीन दिवसीय सत्र शुरु

RSTV Bureau

भारतीय इतिहास कांग्रेस की 75वीं वर्षगांठ का तीन दिवसीय आयोजन जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में रविवार से शुरू हो गया है.

28 से 31 दिसंबर 2014 तक चलने वाली इस इतिहास कांग्रेस का उद्घाटन भारत के उपराष्ट्रपति डॉ हामिद अंसारी ने रविवार सुबह 11.30 बजे किया.

आईएचसी 2014 के आयोजन में 2000 से अधिक घरेलू और विदेशी इतिहासकार और विद्वान प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत, आधुनिक भारत, पुरातत्व, भारत के समकालीन इतिहास के अलावा भारत और अन्य देशों के राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आदि पहलुओं पर अपना-अपना काम पेश कर रहे हैं.

इन पेपर्स को मुख्य रुप से छह वर्गों में बांटा गया है जिसमें प्राचीन, मध्यकालीन, आधुनिक भारत, पुरातत्व और समकालीन भारत के अलावा अन्य देशों के इतिहास शामिल हैं.

इस वर्ष आईएचसी के 75वें अधिवेशन का प्रमुख आकर्षण है नेहरूवादी युग में अर्थव्यवस्था, राजनीति और समाज एवं उनकी समकालीन प्रासंगिकता. यह सत्र जेएनयू के पैनल की ओर से प्रस्तुत किया जा रहा है.

देश के कई भागों जैसे कि असम, कर्नाटक, केरल और उत्तराखण्ड आदि से कई जाने-माने इतिहासकार इस अधिवेशन में भाग लेने के लिए आये हुए हैं. इतिहासकारों के अलावा देश के कई अहम संस्थान जैसे कि भारतीय रिजर्व बैंक, राष्ट्रीय अभिलेखाकार और साहित्य अकादमी आदि भी इस प्रतिष्ठित समारोह का हिस्सा बने हुए हैं.

प्रतिवर्ष दिसम्बर महीने में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम एक व्यापक परिप्रेक्ष्य में राष्ट्र और राष्ट्र निर्माण की अवधारणा को बढ़ावा देने में सफल रहा है.

भारतीय इतिहास कांग्रेस द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम भारतीय इतिहास के विभिन्न पहलुओं से लेकर समकालीन मुद्दों की चुनौतियां, गंभीर विश्लेषण और बहस के लिए समाज, अर्थव्यवस्था, राजनीति, संस्कृति, धर्म, मीडिया और संस्थाओं को एक मंच प्रदान करेगा.

आईएचसी के नवनिर्वाचित अध्यक्ष प्रो. बी.डी. चटोपाध्याय ने अपना अध्यक्षीय भाषण पढ़ा.

1935 में अपनी स्थापना के बाद से, आईएचसी इतिहास से जुड़े अहम मुद्दों पर गंभीर चितंन के लिए एक मंच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है और बदलते समय में इतिहास से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा करता रहा है.