इब्नबतूता के देश में साठ घंटे

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चित्र: राज्य सभा टीवी

मोरक्को की राजधानी रबात का समुद्री तट पर्यटकों से हमेशा गुलज़र रहता है. इनमें यूरोपीय के साथ अरब और अफ्रीका के लोग भी होते हैं. इस तरह मोरक्को यूरोप, अरब और अफ्रीकी संस्कृति का मिलन स्थल भी है. वैसे मोरक्को से भारत की दूरी आठ हजार किलोमीटर से अधिक है. लेकिन दोनों देशों के संबंध 14वीं शताब्दी से चले आ रहे हैं. तब मोरक्को के शहर टैंगियर से मशहूर यात्री इब्न बतूता भारत आया था. आधुनिक समय में भी दोनों देशों के संबंध हमेशा आत्मीय रहे. जब संयुक्तराष्ट्र में मोरक्को की आजादी का प्रस्ताव आया तो भारत समर्थन करने वाले देशों में शुमार था. भारत ने 20 जून, 1956 को मोरक्को को मान्यता प्रदान की. 1957 में राजनयिक मिशनों ने काम शुरू कर दिया . तब से दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद जारी है. उपराष्ट्रपति डॉ ज़ाकिर हुसैन ने 1967 में मोरक्को की यात्रा की थी. इसके करीब 50 साल बाद उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने 30 मई से एक जून तक मोरक्को की यात्रा की. पिछले साल भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन में पिछले साल मोरक्को के प्रधानमंत्री भी भारत आए थे.

उपराष्ट्रपति की मुलाकात मोरक्को के प्रधानमंत्री अब्देलिलाह बेनकीराने से हुई. दोनों नेताओं के बीच वार्ता के बाद दो सहमति पत्रों पर दस्तख्त हुए. ये सहमति पत्र संस्कृति और विदेश सेवा के अधिकारियों के प्रशिक्षण के क्षेत्र में हुए हैं. दोनों देशों ने जल संसाधन, टेलीविजन प्रसारण और शिक्षा के क्षेत्र में तीन सहमति पत्रों को आखिरी रूप भी दिया.

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उपराष्ट्रपति ने कहा कि अफ्रीका में आर्थिक गतिविधियों के लिए भारत, मोरक्को को हब बनाना चाहता है. उपराष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों के हर पहलू की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए मोरक्को अहम है क्योंकि यहां से मिलने वाला फॉस्फेट खेती में काम आता है. इसके लिए दोनों देशों ने साझा उद्यम स्थापित किया है. यहां चार लाख तीस हजार मीट्रिक टन फॉस्फोरिक एसिड का उत्पादन होता है और पुरे भारत को निर्यात होता है. दोनों देशों के बीच फिलहाल 350 मिलियन डॉलर का व्यापार होता है. दोनों देशों ने सूचना प्रौद्योगिकी समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है. आतंकवाद के खिलाफ भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है. उपराष्ट्रपति ने मोरक्को के प्रधानमंत्री को भारत आने का न्योता भी दिया. उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है.

इस दौरे में मोरक्को की प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष राचिड तल्बी अलामी ने उपराष्ट्रपति से मुलाकात की. मोरक्को के पार्षदों की सभा के अध्यक्ष श्री अब्देलाकिम बेंचीमस भी उपराष्ट्रपति से मिले. दोनों बैठकों में दोनों देशों की संसदों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई. उपराष्ट्रपति की मौजूदगी में भारत-मोरक्को चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की स्थापना भी हुई. इस मौके पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि इससे दोनों देशों के कारोबारियों को लाभ होगा.

मोरक्को अफ्रीका का अहम देश है. उसका 55 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता है. इस लिहाज से देखें तो मोरक्को भारत के अनुभव और तकनीक का लाभ उठा सकता है वहीं भारत मोरक्को के जरिए इन बाजारों तक पहुंच सकता है. मोरक्को ने भी इसके लिए मदद का भरोसा दिलाया है. इन देशों में मोरक्को का बैंकिंग और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल बहुत अच्छा है.