कंगारुओं के घर में सेंध लगाने को तैयार कीवी

Vidhanshu Kumar

Newzelandक्रिकेट विश्व के फाइनल में तासमान सागर को छूने वाले दो देश आमने सामने होंगे. न्यूज़ीलैंड ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर पहली बार फाइनल में प्रवेश किया है जबकि ऑस्ट्रेलिया ने 2011 की चैंपियन भारतीय टीम को सेमीफाइनल में धूल चटाई है.

क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की प्रतिद्वंद्ता वैसी ही है जैसे भारत और पाकिस्तान की. न्यूज़ीलैंड प्रंशसक नहीं चाहते उनकी टीम ऑस्ट्रेलिया से कभी हारे और ऑस्ट्रेलिाई खेल प्रेमियों को भी कीवी टीम से हारना बहुत बुरा लगता है. हालांकि ऐसा इस विश्व कप में एक बार हो चुका है जब लीग मैच में न्यूज़ीलैंड ने ऑस्ट्रेलिया को एक विकेट से हराया था.

लेकिन क्या ब्रैंडन मैक्कलम की टीम इस शिखर को दुबारा छू पाएगी? न्यूज़ीलैंड पहली बार फाइनल में खेल रही है जबकि ऑस्ट्रेलिया चार बार की चैंपियन है. इस विश्व कप में न्यूज़ीलैंड की टीम ने सभी मैच अपनी धरती पर खेले हैं लेकिन फाइनल मैच उन्हें ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में खेलना होगा. यानी न सिर्फ़ कंगारूओं के घरेलू परिस्थितियां  होगीं बल्कि न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ों और गेंदबाज़ों को भी एक अलग पिच और एक बड़े मैदान पर खेलना होगा.

एक नज़र डालते हैं उन खिलाड़ियों पर जो फाइनल में अबम भूमिका निभा सकते हैं.

मैक्कलम या मैक्सवेल?

न्यूज़ीलैंड कप्तान मैक्कलम और ऑस्ट्रेलिया के ग्लेन मैक्सवेल ने इस विश्व कप सबसे ज्यादा गेंदबाज़ों को परेशान किया है. मैक्कलम ने 8 पारियों में 41 की औसत से 328 रन बनाए हैं. लेकिन ध्यान देने वाला आंकड़ा उनका स्ट्राइक रेट है जो लगभग 200 के करीब है. चाहे छोटे स्कोर का पीछा करना हो या फिर बड़ा स्कोर बनाना हो, मैक्कलम सिर्फ एक ही अंदाज़ जानते हैं, गेंद देखिए और लंबा हिट लगाइए.

वहीं मैक्सवेल ने 7 पारियों में 64 के औसत से 324 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट भी 182 का है. मैक्सवेल विकेट के चारों ओर स्ट्रोक लगाते हैं और हर बार लगता है कि वो इतना रिस्क ले रहे हैं कि कभी भी आउट हो सकते हैं, लेकिन मैक्सवेल के पिच पर रहते रन रोकना बेहद मुश्किल है.

वैसे धुआंधार पारियां खेलने में जहां मैक्कलम और मैक्सवेल की कोई सानी नही है उसी तरह न्यूज़ीलैंड, मार्टिन गप्टिल को और ऑस्ट्रेलिया स्मिथ को पारी को संभालने का जिम्मा देती है. गप्टिल ने 76 की औसत से 532 रन बनाए हैं और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले कुमार संगाकार से महज़ नौ रन पीछे हैं. क्वार्टर फाइनल में तो गप्टिल ने 237 रनों की बेजोड़ पारी खेली थी.

वहीं ऑस्ट्रेलिया के लिए स्टीवन स्मिथ ने 57 की औसत से 357 रन बनाए हैं जिसमें सेमीफाइनल में भारत के खिलाफ शतक शामिल है.

बोल्ट बनाम स्टार्क

इसमें कोई आश्चर्य नहीं की इस विश्व कप के दो सबसे सफल गेंदबाज़ फाइनल में खेलेंगे.

ऑस्ट्रेलिया के मिचेल स्टार्क ने इस विश्व कप में अब तक 8 मैचों में 10.20 की औसत से 20 विकेट लिए हैं. ये औसत हैरान कर देने वाला है. विश्व कप से पहले जब ऑस्ट्रेलियाई टीम की गेंदबाज़ी की कमान की बात होती थी तो जिस बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ का नाम ज़बान पर आता था वो थे तूफ़ानी गेंदबाज़ मिचेल जॉनसन. लेकिन विश्व कप के दौरान स्टार्क ने दिखा दिया कि ये जिम्मेदारी अब उनके नाम होगी. स्टार्क कहीं न कहीं पाकिस्तान के महान गेंदबाज़ वसीम अकरम की याद दिलाते हैं. उनकी खासियत है कि वो एक ही एक्शन से गेंद करते हुए, गेंद को एक ही जगह डाल कर विकेट के दोनों तरफ़ स्विंग करा सकते हैं.

हालांकि उनकी स्टॉक डिलिवरी बाएं हाथ के गेंदबाज़ के लिए बाहर जाती हुई है, लेकिन पिच पर पड़ कर सीधी रहती हुई गेंद से भी उन्होंने विश्व कप में कई बल्लेबाज़ों को बोल्ड आउट किया है. किवी टीम भी स्टार्क की चुनौती को बखूबी समझती है क्योंकि लीग मैच में छोटे स्कोर का पीछा करते हुए जिस तरह स्टार्क ने किवी टीम के छक्के छुड़ाए थे वो लंबे समय तक याद रखा जाएगा.

लेकिन जहां ऑस्ट्रेलिया के पास स्टार्क है तो न्यूज़ीलैंड के पास ट्रेंट बोल्ट जैसा ज़बरदस्त गेंदबाज़ है, जिसने इस विश्व कप में अब तक सबसे ज्यादा 21 विकेट लिए हैं और प्रति विकेट उन्होंने 15.76 रन खर्च किए हैं. बोल्ट भी दोनों तरफ स्विंग करा सकते हैं और खतरनाक यॉर्कर भी फेंकते हैं.

बराबरी का मुकाबला

कागज़ पर दोनों ही टीमें बराबरी की नज़र आती हैं. किवी टीम सिर्फ़ मैक्कलम पर रन बनाने के लिए निर्भर नहीं रहती. टूर्नामेंट में टॉप ऑर्डर के सभी बल्लेबाज़ों ने बड़ा स्कोर खड़ा किया है, चाहे वो गप्टिल हों, विलियम्सन हों या फिर निचले क्रम में इलियट. हां रॉस टेलर ने अभी उस तरह की बल्लेबाज़ी नहीं दिखाई है जिसके लिए वो जाने जाते हैं.

वहीं ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए भी मैक्सवेल के अलावा वॉर्नर, स्मिथ, वॉटसन और फिंच ने अच्छी पारियां खेलीं हैं. इस मज़बूत बल्लेबाज़ी की कमज़ोर कड़ी कप्तान माइकल क्लार्क ही दिखते हैं जिन्होंने अब तक की छह पारियों में कोई भी ऐसी इनिंग नहीं खेली है जो विरोधी टीम को परेशान कर सके.

गेंदबाजी में भी बोल्ट को जहां टिम साउथी और विटोरी का साथ मिला है, स्टार्क को दूसरे छोर से हेजलवुड और कमिंस ने अच्छा सपोर्ट दिया है. ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाज़ी में उनके चौथे और पांचवे गेंदबाज़ महंगे साबित हो सकते हैं. फॉकनर, मैक्सवेल और वॉटसन के ओवर मैच पर बड़ा असर डाल सकते हैं.

दोनों ही टीमों ने सेमीफाइनल में बेहद तनाव भरा मुकाबला खेला. जहां न्यूज़ीलैंड ने कड़े मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका को मात दी वहीं ऑस्ट्रेलिया ने उसके मुकाबले ज्यादा बड़ी जीत दर्ज की और भारत को 95 रनों से हराया. लेकिन भारत के खिलाफ मैच बेहद थका देने वाला होता है और माइकल क्लार्क की टीम के पास रिकवरी के लिए फाइनल से पहले सिर्फ दो दिन का वक्त है. ये भी फाइनल मुकाबले के नतीजे पर असर डालने की क्षमता रखता है.

लेकिन फाइनल में जहां दोनों ही टीम मौजूदा फॉर्म में बराबरी की नज़र आती है, विश्व कप का फाइनल खिलाड़ियों के दिलो-दिमाग में खेला जाएगा. मुश्किल घड़ी में जो टीम अपने धड़कनों पर काबू रख पाएगी उसी की झोली में आईसीसी विश्व कप की ट्रॉफी आएगी.