किशोर न्याय विधेयक राज्य सभा से भी पारित

RSTV Bureau

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) विधेयक, 2015 आज राज्य सभा में चर्चा के बाद पारित हो गया. किशोर न्याय अधिनियम में संशोधन के बाद जघन्य अपराध के मामलों में अब 16 से 18 साल के किशोरों के खिलाफ वयस्क की तरह मुकदमा चलाया जा सकेगा. ये विधेयक लोक सभा से सात मई 2015 को पारित हो चुका है.

महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी की ओर से राज्य सभा में किशोर न्याय विधेयक रखा गया था. मेनका गांधी ने गंभीर अपराधों में शामिल कुछ नाबालिगों का भी जिक्र किया और इस बिल को पारित करने की अपील की।

राज्य सभा में किशोर न्याय विधेयक पर लंबी चर्चा हुई। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि “ये बहुत ही महत्वपूर्ण बिल है। निर्भया केस दिल को दहलाने वाला, खौफनाक था।“ उन्होंने इस विधेयक को लेकर कुछ सुझाव भी दिए।

टीएमसी सांसद देरेक ओब्राईन ने कहा कि अनिश्चितकाल के लिए इंतजार नहीं कर सकते और मैं विधेयक का समर्थन करता हूं। अनु आगा ने कहा कि “हमें अपने जुवेनाइल होम्स के सुधार की बात करनी चाहिए और उम्र को कम करना एक कदम पीछे जाना है”

शिवसेना के सांसद संजय राउत ने “अमेरिका, इंग्लैंड, चीन के कानूनों का हवाला देते हुए कहा कि हत्या और बलात्कार के मामलों में 16 साल के अपराधियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है.

चर्चा के दौरान सांसदों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर सवाल भी उठाए जिसका जवाब नेता सदन अरुण जेटली ने दिया.

महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने विधेयक पर चर्चा का जवाब दिया। उन्होंने सांसदों की शंकाओं को दूर करते हुए देश में बढ़ते किशोर अपराध पर चिंता जताई। मेनका गांधी ने कहा कि इस पर मजबूत कानून वक्त की जरूरत है और ये बोर्ड तय करेगा कि अपराध के समय किशोर की मानसिकता बालपन की थी या व्यस्क की.

किशोर न्याय विधेयक पर कई और सांसदों ने भी अपने विचार पेश किए। विधेयक में हल्के, गंभीर और जघन्य अपराधों को स्पष्ट रूप से अलग-अलग किया गया है और हर श्रेणी में अंतर जानने की प्रक्रिया का भी ब्योरा है। सदन में विधेयक पर चर्चा के समय निर्भया के माता-पिता भी दर्शक दीर्घा में मौजूद थे। उन्होंने विधेयक पारित होने के बाद संतुष्टि जताई है.