केरल में नहीं बिकेगी शराब, सरकारी नीति से सुप्रीम कोर्ट सहमत

RSTV Bureau

supreme_courtकेरल में पांच सितारा होटल को छोड़कर बाकी जगहों पर शराब की बिक्री पर पाबंदी जारी रहेगी. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दस साल के अंदर केरल को शराब मुक्त करने की नीति पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. ओमन चांडी सरकार ने शराब परोसे जाने को लेकर पिछले साल नई नीति बनाई थी. इस नीति का मकसद 2023 तक केरल को शराब मुक्त राज्य बनाना है.

सुप्रीम कोर्ट ने केरल होटल और बार एसोसिएशन को कि‍सी तरह की ढील देने से इनकार कर दिया. जस्टिस विक्रमजीत सेन और जस्टिस शिव कीर्ति सिंह की पीठ ने केरल सरकार की नई आबकारी नीति पर मुहर लगा दी. इसके मुताबिक राज्य में 10 साल के अंदर शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाना है. पीठ ने राज्य सरकार को इस नीति की वजह से नौकरी गंवाने वाले लोगों के पुनर्वास के लिए भी कदम उठाने को कहा है. बार मालिकों की ओर से अदालत में पेश हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि ये नीति भेदभाव करने वाली है और इससे अमीर लोग ही शराब का लुत्फ उठा पाएंगे. राज्य सरकार का तर्क था कि बार मालिकों के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करने का फैसला नीतिगत है. केरल के होटल और बार मालिकों ने नई आबकारी नीति को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी लेकिन वहां याचिका खारिज हो गई थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिसपर कोर्ट ने अगस्त में फैसला सुरक्षित रखा था.

कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. पार्टी प्रवक्ता टॉम वडक्कन ने कहा कि ये हमारे दृष्टिकोण की पुष्टि है. जबकि प्रदेश के बार मालिक इस फैसले से मायूस हैं, उनका कहना है कि इसका पर्यटन पर बुरा असर पड़ेगा. राज्य सरकार ने पिछले साल अगस्त में 700 से ज्यादा शराब घर बंद करने का फैसला किया था. केरल हाई कोर्ट ने 30 अक्टूबर, 2014 को इस फैसले को जायज ठहराया था.

देश में अभी गुजरात, नगालैंड, मणिपुर और लक्षद्वीप में शराब की बिक्री पर पाबंदी है. इसके अलावा बिहार सरकार ने भी एक अप्रैल, 2016 से राज्य में शराब की बिक्री पर पाबंदी का एलान किया है.