जहां यमराज भी आपके साथ सफ़र करते हैं

FILE | Greater Noida: Vehicles lined up after met with an accident at  Yamuna expressway near Jewar interchange in Greater Noida. Photo: PTI

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देश के बेहतरीन और शानदार हाईवे में शुमार यमुना एक्सप्रेस वे इन दिनों किसी भी वाहन चालक को जन्नत की सैर कराने के लिए जानी जा रही है. चौड़ी सड़क, कम ट्रैफिक, अत्याधुनिक सुविधाएं और किनारों पर हरियाली. सफर के दीवानों को भला और क्या चाहिए. यही वजह है कि नोएडा के परी चौक के बाद जैसे ही 165 किलोमीटर लंबा ये हाईवे शुरू होता है, पैर ब्रेक से हटकर एक्सेलेटर पर अपने आप ही चला जाता है. और फिर शुरू होता है ख़तरनाक़ सफ़र.

मौत का यह हाईवे औसतन हर रोज़ पांच लोगों को शिकार बनाता है. पिछले साल 2015 में इस हाईवे पर 1585 लोग मौत का शिकार बन गए. ये आंकड़ा इसलिए भी डराता है क्योंकि साल 2014 में मरने वालों की संख्या में थोड़ा-बहुत नहीं बल्कि पूरे 98 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. जिस समय हाइवे बन रहा था तो विशेषज्ञों ने चेताया था कि तेज़ रफ्तार इस हाइवे के लिए काफी खतरनाक साबित होगी. खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उदघाटन के समय लोगों से अपील की थी कि वे संयम बरतें लेकिन आंकड़ों को देखकर नहीं लगता कि किसी ने ध्यान दिया.

विशेषज्ञों के मुताबिक यमुना एक्सप्रेस वे पर हादसों के दो बड़े कारण हैं. एक है बेकाबू रफ्तार दूसरा सड़क की डिजाइन. सड़क पर गाड़ियों की अधिकतम स्पीड सौ किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित है लेकिन यहाँ गाड़ियों की न्यूनतम रफ़्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे है. सरकार ने कई कदम उठाए, जुर्माना वसूला लेकिन कोई अंतर नहीं आया. हवा से बात करती गाड़ी से ड्राइवर का हल्का सा नियंत्रण हटा नहीं कि सफर हादसे में तब्दील हो जाता है. सर्दियों में तो ये और भी जानलेवा हो जाता है. कोहरे के कारण कुछ दिखाई नहीं देता और दुर्घटना हो जाती है. हमारे यहां मौसम के हिसाब से रफ़्तार सीमा बदलने का कोई दबाव नहीं है. इसके अलावा गर्मियों में ज्यादातर हादसे टायर फटने से होते हैं. यह सड़क सीमेंट कंक्रीट से बनी है. जब गाड़ी रफ्तार भरती है तो पहिए गर्म हो जाते हैं. पहिये में हवा फुल है तो गर्म हवा के चलते अंदर प्रेशर बढ़ता है और टायर फट जाते हैं और नतीजा भयानक सड़क हादसे के शक्ल में सामने आता है.

वैसे यमुना एक्सप्रेस वे ही क्यों बाकी देश की तस्वीर भी इससे अलग नहीं है. 2015 में पूरे देश में एक लाख 46 हजार लोग सड़क हादसों में मारे गए. हर रोज हमारे देश में डेढ़ हजार सड़क दुर्घटनाएं होती हैं यानी हर मिनट में एक. हर रोज 400 लोग सड़क पर हादसों में मारे जाते हैं यानी हर घंटे 17 और हर चार मिनट में एक व्यक्ति अलविदा कह जाता है. पिछले एक साल में उत्तरप्रदेश में 17,666, तमिलनाडु में 15,642, महाराष्ट्र में 13,212, कर्नाटक में 10,856 और राजस्थान में 10,510 लोग सड़क हादसे के चलते मौत के मुंह में समा गए. अगर शहरों की बात करें तो 2015 में दिल्ली में सबसे ज्यादा 1,622 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई. चेन्नई में 886, बेंगलुरू में 713, कानपुर में 665 और मुंबई में 611 लोग ऐसे हादसों में मारे गए. केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय इसे लेकर चिंतित है. सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी रोड सेफ्टी कानून पर महीनों से काम कर रहे हैं लेकिन समस्या जिस हद तक विकराल हो चुकी है, कहना सही होगा कि वक्त अब मेकअप का नहीं बल्कि सर्जरी का है.

Union Minister Nitin Gadkari speaking at RSTV's show 'Spotlight'.  Photo-RSTV

Photo: RSTV

खुद परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 77% हादसे ड्राइवर की गलती से होते हैं. नशे में गाड़ी चलाना, सीटबेल्ट न लगाना, रेड लाइट जंप करना और गाड़ी चलाते समय फोन पर बतियाना या लेन ड्राइविंग की परवाह न करना हमारे यहां वाहन चालकों के लिए आम है. ट्रक, बस या अन्य भारी वाहनों के ड्राइवर अशिक्षित अथवा कम पढ़े-लिखे हैं. ड्राइविंग लाइसेंस आप घर बैठे पैसे देकर हासिल कर सकते हैं.

हाल ही में खबर आई थी कि देश में ज्यादातर कारें सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरतीं. कार की कीमत कम रखने की होड़ में कंपनियां सबसे ज्यादा अनदेखी सुरक्षा की करती हैं. वक्त आ गया है कि इन कंपनियों को भी कसा जाए. एयरबैग, एंट्रीब्रेक सिस्टम यानी एबीएस हर गाड़ी में अनिवार्य हो. अगर ऐसा नहीं हुआ तो हमारी सड़कें इसी तरह लाल होती रहेंगी.