जीएसटी समेत कई अहम बिल पास कराने की कोशिश करेगी सरकार: नायडू

Shyam Sunder
File Photo ( PTI )

File Photo ( PTI )

सरकार जीएसटी यानि वस्तु और सेवाकर से जुड़ा संविधान संशेधन विधेयक संसद के इसी सत्र में पास कराने की कोशिश करेगी. लेकिन जीएसटी क़ानून पास कराने में अभी समय लगेगा. केन्द्र सरकार का कहना है कि इस मसले पर उसे ज़्यादतर राज्यों की सहमति मिल चुकी है. जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक पास होने के बाद एक बार फिर उन राज्यों से बातचीत की जाएगी जिन्हे अभी भी कुछ आशंकाए हैं.

संसदीय कार्य मंत्री वैंकया नायडू के अनुसार ” वित्तिय कामकाज के अलावा कई अहम विधायी काम सरकार इस सत्र में पूरा करना चाहेगी. इसमें जीएसटी, भूमि अधिग्रहण, काला धन और एससी संविधान संशोधन विधेयक शामिल हैं”

संसद के इसी सत्र में काला धन से जुड़े विधेयक को विचार और पारित करने के लिए लाया जा सकता है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बीजेपी संसदीय दल की बैठक में पार्टी के सांसदों को इसके बारे में जानकारी भी दी. उन्होने पार्टी सांसदों को कहा कि बेशक काला धन एक संवेदनशील मुद्दा है. लेकिन पार्टी या सरकार को इस मुद्दे पर घबराने की ज़रुरत नहीं है. उन्होने पार्टी सांसदों को समझाया कि सरकार इस मसले पर गंभीरता से काम कर रही है. जेटली ने दावा किया कि जब काला धन से जुड़ा विधेयक बहस को आयेगा तो कई नक़ाब उतर जाएंगे.

भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक 4 मई के बाद ही पेश होगा. यह विधेयक पहले लोकसभा में पेश होगा. ज़ाहिर है कि सरकार को लोकसभा में पूर्ण बहुमत प्राप्त है और एकबार फिर इस विधेयक को पास कराने में उसे कोई कठनाई नहीं होगी. हां ये ज़रुर है कि विपक्ष को एक और मौक़ा मिलेगा जब वह सरकार को घेरने की कोशिश करेगा. सरकार ने अभी तक स्पष्ट नहीं किया है कि राज्यसभा में उसकी रणनीति क्या होगी. इस बिल को सैलक्ट कमेटी को भेजने की संभावना को सरकार नकार नहीं रही है. लेकिन विपक्ष का कहना है कि इस बिल को स्थाई समिति को भेजा जाए.

भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक पर सरकार के सामने दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का रास्ता भी है. लेकिन ये रास्ता तभी खुलता है अगर ये बिल राज्यसभा में गिर जाए. लेकिन बजट सत्र के पहले हिस्से में विपक्ष ने सरकार को ये बिल राज्यसभा में पेश ही नहीं होने दिया था.

सरकार और विपक्ष का इस मसले पर स्पष्ट मत है. सरकार का कहना है कि उसका कदम विकास और किसान दोनों के लिए है. इस मसले पर सरकार के पीछे हटने का कोई संकेत नहीं है. बीजेपी का मानना है कि भूमि अधिग्रहण संशोधन क़ानून का विधानसभा चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा और अगर असर पड़ता भी है तो पार्टी ये कीमत चुकाने को तैयार है.