दानों में दान…विद्यादान

Sandeep Yash
File photo: education, elementary school, E-learning during lockdown

File photo: education, elementary school, E-learning during lockdown

कोरोना महामारी ने परंपरागत शिक्षा क्षेत्र का भी चक्का जाम कर दिया है। इस लाइलाज वायरस के प्रसार को रोकने के लिए मार्च के दूसरे हफ्ते में देश के सारे स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए। ये कब खुलेंगे किसी को नहीं पता। ऊपर से, करेला और नीम स्थिति ये है कि इसी समय बोर्ड परीक्षाएं, नर्सरी एडमिशंस, तमाम विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षाएं, प्रतियोगी परीक्षाएं भी आयोजित की जाती हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इस अकस्मात् बाधा का असर भारत में 28. 5 करोड़ से ज़्यादा युवा शिक्षार्थियों पर पड़ रहा है। इससे शिक्षण और मूल्यांकन के तरीकों सहित स्कूली शिक्षा की बुनावट भी उधड़ गयी है। एक कड़वी  सच्चाई ये भी रही कि इस दौरान कुछ संसाधन सम्पन्न निजी स्कूल ऑनलाइन शिक्षा की ओर बढ़ गए पर तमाम कम आय वाले स्कूल ई-लर्निंग सिस्टम तक पहुंच न होने से बंद हो गए, बच्चे घर बैठ गए। ये ज़्यादातर छोटे इलाकों में हुआ। इसने सरकार की चिंता बढ़ाई। और अगर तत्काल कोई समाधान न निकाला गया तो  देश के लिए दूरगामी आर्थिक और सामाजिक परिणाम हो सकते हैं।

विशेषज्ञों केअनुसार इस महामारी ने मुद्दतों पुराने चाक-लेक्चर शिक्षण मॉडल को बदल डाला है। तो सरकार के सामने चुनौती एक ऐसी शिक्षा प्रणाली लाने की रही जो वर्तमान के साथ भविष्य में शिक्षा के पहिये कत्तई न रुकने दे। चुनौतियाँ चाहे कितनी ही विकट क्यों न हों। तो ऐसी दीर्घकालीन रणनीति के केंद्रबिंदु क्या हों।

1. सीखने की निरंतरता बनी रहे, इसके लिए ओपन-सोर्स डिजिटल लर्निंग सॉल्यूशंस और लर्निंग मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर को अपनाया जाना चाहिए ताकि शिक्षक निर्बाध रूप से ऑनलाइन क्लासेज ले सके।

2. मोबाइल इंटरनेट तकनीक 2024 तक देश के 85 % घरों तक पहुंच जाएगी।  इस प्लेटफार्म के ज़रिये समावेशी शिक्षण समाधान (inclusive learning solutions) कमजोर, हाशिए पर पड़े तबके तक पहुंचाया जाए।

3. देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र को वैश्विक मांग-आपूर्ति के आधार पर बुना जाए जिससे नौकरी, इंटर्नशिप कार्यक्रम और अनुसंधान परियोजनाएं महामारी की चपेट से दूर रहें।

4. एकीकृत शिक्षा प्रणाली (Integrated education system) के निर्माण के लिए कक्षा शिक्षण और ई-लर्निंग मोड को एक साथ लाना होगा।  जान लीजिये कि शिक्षा क्षेत्र सुधारों में एक बड़ी चुनौती वर्तमान शिक्षा प्रणाली को तकनीक के साथ सुगमता से जोड़ना है।  जानकारी के लिए भारत में 15 लाख से अधिक स्कूल और 50,000 से ज़्यादा उच्च शिक्षा संस्थान हैं।

इन तात्कालिक ज़रूरतों और निकट भविष्य पर नज़र रखते हुए भारत सरकार ने 22 अप्रैल, 2020 को एक राष्ट्रीय कार्यक्रम विद्यादान 2.0 इ -लॉन्च किया। इसका मक़सद कॉमन नेशनल प्रोग्राम के तहत पूरे देश में स्कूल और उच्च शिक्षा, दोनों के लिए ई-लर्निंग कंटेंट को आमंत्रित करना और बढ़ावा देना है। चलिए इसे मोटे तौर पर देखते हैं।

तो विद्यादान 2. 0 वो कार्यक्रम है जो शिक्षण और सीखने के पारंपरिक तरीकों को ऑनलाइन प्रणाली के साथ संवर्धित या augment करता है। इसे DIKSHA के एप्प आधारित प्लेटफार्म पर लांच किया गया है।  DIKSHA यानी Digital Infrastructure for Knowledge Sharing, जानकार कहते हैं कि 2017 में भारत सरकार द्वारा लांच हुए इस प्लेटफार्म की क्षमता का इस्तेमाल करने का ये सही समय और अवसर, दोनों है। क्यूंकि इस पर CBSE, NCERT सहित और 30 राज्यों / केंद्र शासित प्रदेश पहले से मौजूद हैं। और वैसे भी DIKSHA एप्प के विशाल फलक और विस्तार की क्षमता को समझते हुए तमाम संस्थान और संगठन बीते कई वर्षों से इसमें रुचि दिखाते रहे हैं।

आगे बढ़ते हैं, विद्यादान 2. 0 जैसे open source learning प्लेटफार्म का लक्ष्य देश भर के उन लाखों बच्चों तक पहुंचना है जिनकी पढ़ाई कवीड 19 जैसी महामारी के चलते संकट में आ गयी। तो अब निर्विरोध शिक्षा के लिए कक्षा 1 से 12 तक के बच्चे अब कभी भी, कहीं भी सीखने के लिए विद्यादान का सहारा ले सकते हैं।

बच्चों का मन लगे और वो चाव से पढ़ें इसलिए ई-लर्निंग पाठ्यक्रम को रोचक और आकर्षक बनाना भी इस कार्यक्रम का लक्ष्य है। इसी मक़सद से शिक्षाविदों और संगठनों को एक साथ लाया गया है। तो योगदानकर्ता एक तयशुदा फॉर्मेट में ऐसे कंटेंट बना सकते हैं

1 .Explanatory videos
2. Animations
3. Teaching videos”
4. Lesson plans
5. Assessments
6. Question banks .

तो शिक्षा के ऑनलाइन प्रसार में शिक्षाविद, विषय विशेषज्ञ, स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, संस्थानों, सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों और व्यक्ति विशेष अपना योगदान दे सकते है। अपने हुनर से इसे चमका सकते हैं। योगदानकर्ताओं द्वारा सौंपे गए कंटेंट को सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ मंडल तय मानकों की कसौटी पर जांचेगा, परखेगा और पास करेगा. ताकि कंटेंट की गुणवत्ता बनी रहे। चुने गए कंटेंट के योगदानकर्ताओं को मानव संसाधन विकास मंत्रालय सम्मानित भी करेगा।

आपकी जानकारी के लिए इस एप्प आधारित प्लेटफार्म पर प्रत्येक राज्य / केंद्र शासित प्रदेश भी क्षेत्रीय भाषाओँ में अपने कार्यक्रम शुरू कर सकते हैं। और इस पर मौजूद कंटेंट का उपयोग सरकारी विभाग, तमाम शिक्षा बोर्ड, सरकारी और निजी स्कूल और शिक्षा में लगे सभी संस्थान और संगठन कर सकेंगे।

तो राष्ट्र निर्माण में लगे इस बेहद एहम प्रकल्प से आप कैसे जुड़ सकते हैं

1. योगदान की दिशा में पहला कदम केंद्र, राज्य या केंद्र शासित प्रदेशों की परियोजना की जरूरतों को देखना है
2. योगदानकर्ता खुद को उन परियोजनाओं के लिए नामांकित कर सकते हैं जिनके लिए उनके पास प्रासंगिक सामग्री है
3. संगठनों या व्यक्तियों को ज़रूरी विवरण के साथ अपनी ई-सामग्री का एक नमूना देना होगा और खुद को नामांकित करना होगा
4. फिर एक बार नामांकन होने के बाद योगदान शुरू किया जा सकता है।

विस्तृत जानकारी के लिए आप https://vdn.diksha.gov.in/ पर जा सकते हैं।

तो अगर आप लेखक हैं , पत्रकार हैं, इतिहासकार हैं, लेखन के काम से जुड़े हुए हैं तो ये अच्छा मौका है देश के भविष्य के लिए कुछ ठोस करने का. ये भी ज़रूरी नहीं की आप तकनीक के बड़े जानकार हों तभी कुछ कर पाएंगे. इस प्लेटफार्म को इतना सरल रखा गया है कि ये सही मंशा के आड़े नहीं आएगा।  बस आपके पास विचार होने चाहिए और उन्हें आकार देने के लिए ऐसे शब्द, कथ्य शिल्प और शैली होनी चाहिए कि बच्चे उसमें रूचि लें।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े गुनीजन इस वक़्त कॉर्पोरेट यानी निजी क्षेत्र की तरफ भी आस से देख रहे हैं – हमारे देश में हुनर की कमी नहीं है , बस उसे थोड़ी मदद की दरकार है। अगर निजी क्षेत्र के CSR फंड्स का एक तय हिस्सा इस विद्या महाकुम्भ के प्रसार में आने लगे तो बात बड़ी दूर तक जा सकती है। खास तौर पर जब बात इस महामारी के बाद आने वाले भविष्य की हो।  तो जनाब तस्वीर और खाका दोनों तैयार है पर ये मुकम्मल तभी होगी जब हम और कलम, पेंट ब्रश और रंग उठाएंगे।  फिलहाल, जाते जाते हमने एक स्कूल के बच्चे से पूछा कि क्या आपने विद्यादान के बारे सुना है तो वो मुस्कुरा के बोला ” जंगल, जंगल बात चली है, पता चला है, चड्ढी (DIKSHA) पहन के फूल (VidyaDaan) खिला है, फूल खिला है ”  इस बच्चे की उम्मीद मत तोड़िएगा।