धराशायी हुए कई दिग्गज

RSTV Bureau

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सोलहवीं लोक सभा चुनावों के अप्रत्याशित नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपने दम पर बहुमत हासिल कर लिया. भाजपा को 282 सीटें मिली, जबकि एनडीए गठबंधन ने 336 सीटों पर जीत दर्ज की. दस साल से सत्ता पर काबिज कांग्रेस के लिए ये चुनाव किसी सदमे से कम नहीं रहा, कांग्रेस पार्टी कुल लोक सभा सीटों की दस फीसदी सीटें भी जीतने में नाकाम रही. कांग्रेस को 44 सीटें मिली जबकि यूपीए गठबंधन 59 सीटों पर ही सिमट गया.

चुनाव मतगणना में कुछ चौंकाने वाले नतीजे सामने आए. सासाराम से सासंद और लोक सभा स्पीकर मीरा कुमार को चुनावों में शिकस्त झेलनी पड़ी. राजद सुप्रीमो लालू यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री रावड़ी देवी सारण से चुनाव हार गईं जबकि उनकी बेटी मीसा भारती को पाटलिपुत्र से राजद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए रामकृपाल यादव ने करीब 40 हजार वोटों से हराया.

बिहार की मधेपुरा लोक सभा सीट से जदयू अध्यक्ष और सात बार लोक सभा सांसद रहे शरद यादव चुनाव हार गए. शरद यादव को राष्ट्रीय जनता दल के बाहुबली नेता राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने करीब 56 हजार वोटों से हराया. इसके अलावा देश भर में भाजपा के लिए अनुकूल माहौल भी पार्टी का मुस्लिम चेहरा माने जाने वाले शाहनवाज हुसैन को जीत नहीं दिला सका. भागलपुर से सांसद और पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहनवाज हुसैन को राजद के शैलेष कुमार से शिकस्त झेलनी पड़ी.

बिहार में भाजपा को 40 में से 22 सीटें जबकि एनडीए के सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी छह सीटें मिली. राज्य में सत्ताधारी जदयू को सिर्फ दो सीट मिलीं जबकि राजद के खाते में 6 सीटें आईं. बिहार में कांग्रेस पार्टी को महज दो सीटों से संतोष करना पड़ा.

बिहार ही नहीं उत्तर प्रदेश में भाजपा ने विपक्षी दलों के खेमे में मजबूती से सेंध लगाई. पार्टी को प्रदेश की 80 लोक सभा सीटों में से रिकॉर्ड 71 सीटें मिली. कांग्रेस को राज्य में सिर्फ अमेटी और रायबरेली से ही जीत मिल सकी. समाजवादी पार्टी यूपी में सिर्फ पांच सीट जीत सकी जबकि सत्ता पर काबिज रह चुकी बहुजन समाज पार्टी इस बार प्रदेश में अपना खाता खोलने में भी नाकाम रही. दिग्गजों की बात करें तो यूपी के फर्रुखाबाद से विदेश मंत्री सलमाल खुर्शीद की जमानत तक जब्त हो गई है.

खुर्शीद के आलावा कांग्रेस के जिन दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा उनमें कानपुर से सांसद और कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल, कुशीनगर से सासंद और गृह राज्य मंत्री आर पी एन सिंह, धौराहा से सांसद और राज्य मंत्री जतिन प्रसाद शामिल हैं. इनके अलावा कैबिनेट मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा, आरएलडी के अध्यक्ष और नागरिक उड्यन मंत्री अजित सिंह, अभिनेता से नेता बने राज बब्बर को भी हार का सामना करना पड़ा.

महाराष्ट्र के सोलापुर से सांसद और यूपीए सरकार में गृहमंत्री रहे सुशील कुमार शिंदे को हार का सामना करना पड़ा. इसके आलावा भाजपा को राज्य की 48 में से 23 सीटों पर जीत हासिल हुई. एनडीए के साथी शिवसेना ने राज्य की 18 सीटों पर जीत का परचम लहराया. कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेताओं में दक्षिणी मुंबई से मिलिंद देवड़ा, मुंबई नार्थ-वेस्ट से गुरदास कामत, रामटेक से मुकुल वासनिक, उत्तरी-मध्य मुबंई से सांसद प्रिया दत्त और बांद्रा-गोंडिया से एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल को हार का सामना करना पड़ा.

पिछले लोक सभा चुनाव में दिल्ली की सातों सीटों पर जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस पार्टी इस बार यहां अपना खाता तक नहीं खोल सकी. चांदनी चौक से कैबिनेट मंत्री कबिल सिब्बल, नई दिल्ली लोक सभा सीट से अजय माकन और कैबिनेट मंत्री रहीं कृष्णा तीरथ को भी हार का सामना करना पड़ा. दिल्ली की सातों लोक सभा सीट भाजपा के खाते में आईं हैं.

पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन को 13 में से छह सीटों पर जीत मिली जबकि अमृतसर से भाजपा उम्मीदवार और राज्य सभा में नेता विपक्ष रहे अरुण जेटली को हार का सामना करना पड़ा. जेटली के अलावा यूपीए सरकार में मंत्री रहीं अंबिका सोनी को आनंदपुर साहिब और पवन कुमार बंसल को चंडीगढ़ से हार मिली. लोक सभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने अपना खाता खोलते हुए पंजाब की चार लोक सभा सीटों पर जीत हासिल की.

हरियाणा के कुरुक्षेत्र से कांग्रेस के सांसद नवीन जिंदल चुनाव हार गए. राजस्थान की अजमेर लोक सभा सीट से कैबिनेट मंत्री सचिन पायलट को करीब पौने दो लाख वोटों से शिकस्त मिली.सोलहवीं लोक सभा चुनावों के इन चौंकाने वाले नतीजों के बाद इस बार लोक सभा में कई नए चेहरे शिरकत करेंगे. वहीं दूसरी ओर लोक सभा में इस बार कई दिग्गज नेताओं की कमी खलेगी.