निर्भया केस: याचिका खारिज, रिहाई पर रोक से इंकार

RSTV Bureau

supremecourtसुप्रीम कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप मामले के दोषी नाबालिग की रिहाई के खिलाफ याचिका खारिज कर दी है. दिल्ली महिला आयोग ने शनिवार रात सुप्रीम कोर्ट से उसकी रिहाई पर रोक लगाने की मांग की थी. जस्टिस ए के गोयल और जस्टिस यू यू ललित की पीठ ने आज सुनवाई के दौरान कहा कि “ जो कुछ भी इस मामले में किया जाएगा वो कानून के दायरे में ही किया जाएगा.”

कोर्ट ने कहा है कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में “सिर्फ तीन साल की ही सजा का प्रावधान है लिहाजा नाबालिग गुनहगार की रिहाई पर रोक संभव नहीं है।

निर्भया के माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर दुख जताया है.

निर्भया की मां ने कहा कि “मुझे पता था यही होगा लेकिन मैं कानून में बदलाव के लिए लड़ती रहूंगी।“ फैसले पर निर्भया के पिता ने कहा कि “हमें शुरू से ही पता था कि हमें कुछ नहीं मिलेगा“.

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के मुताबिक “ सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम आपकी चिंता से पूरी तरह वाकिफ हैं, लेकिन हम दोषी के खिलाफ कोई फैसला नहीं सुना सकते“.

केंद्र की ओर से कोर्ट में पेश हुईं अतिरिक्त महाधिवक्ता पिंकी आनंद ने दिल्ली महिला आयोग की दलीलों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि किशोर को सुधार प्रक्रिया जारी रहने तक निगरानी में रखा जा सकता है. पीठ ने कहा कि “कानून बनाए बिना आप उनका समर्थन कर रहे हैं और इस संबंध में कोई विधायी मंजूरी होनी चाहिए।“

16 दिसंबर 2012 के इस निर्भया गैंगरेप मामले में कुल छह लोग दोषी पाए गए थे। इनमें से एक ने तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी, बाकी दोषी जेल में हैं। घटना के वक्त दोषियों में एक नाबालिग था और उसे तीन साल सुधार गृह में रखने के बाद कल रात एक एनजीओ के हवाले कर दिया गया।

दिल्ली महिला आयोग ने शनिवार रात सुप्रीम कोर्ट से उसकी रिहाई पर रोक लगाने की मांग की थी। दिल्ली हाई कोर्ट के खिलाफ दिल्ली महिला आयोग की विशेष अनुमति याचिका को मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट की अवकाश पीठ के पास भेज दिया था। पीठ ने शनिवार देर रात याचिका पर तत्काल सुनवाई करते हुए किशोर की रिहाई पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था और सोमवार को सुनवाई करने की बात कही थी।