नेपाल: मृतकों की संख्या 2200 के पार, फिर महसूस किए गए झटके

Vimal Chauhan

earthquake_houseनेपाल में शनिवार को आए भूकंप से मरने वालों की संख्या 2200 के पार हो चुकी है. अकेले नेपाल की राजधानी काठमांडू में ही 1000 से अधिक लोगों की इस भूंकप में मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, हालांकि मृतकों की संख्या बढ़ने की आंशका है.

इस बीच रविवार दोपहर नेपाल समेत उत्तर भारत में फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए. इनकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.7 मापी गई.

सघन आबादी वाली काठमांडो घाटी सहित नेपाल के अन्य हिस्सों में इस भूकंप के कारण भीषण तबाही हुई है.

भारत, अमरीका, चीन, पाकिस्तान और यूरोपीय संघ इस आपदा के वक़्त नेपाल की मदद कर रहे हैं.

भारतीय सेना ने नेपाल में बचाव कार्य तेज कर दिये हैं, हालांकि खराब मौसम के चलते राहत कार्यों में दिक्कतें आ रही हैं. एनडीआरएफ की टीमें राहत-बचाव कार्य में लगी हुई हैं. आपात चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिए भारत से 50 चिकित्सक नेपाल पहुंच गए हैं.एनडीआरएफ के डायरेक्टर जनरल ओपी सिंह रविवार को हालात का जायजा लेने नेपाल जाएंगे.

नेपाल में आए इस भूकंप को 80 साल में सर्वाधिक भीषण भूकंप बताया जा रहा है. वर्ष 1934 में नेपाल-बिहार सीमा पर 8.4 तीव्रता का भूकंप आया था.

विनाशकारी भूकंप के कारण नेपाल के अलावा भारत के भी कई हिस्सों में भी 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई है और 237 लोग घायल हुए हैं.

रिक्टर पैमाने पर 7.9 की तीव्रता वाले भूकंप से भारत के सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं जिनकी सीमाएं नेपाल से लगी हुई हैं.

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने बताया कि भारत में सबसे ज्यादा लोग बिहार में मारे गये हैं जिनकी संख्या 38 है. इस राज्य में 133 लोग घायल हो गये हैं.

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में 11 लोगों की मौत हो गयी तथा 69 घायल हो गये, वहीं पश्चिम बंगाल में दो लोगों की मृत्यु हो गयी तथा 35 घायल हो गये.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और दिशानिर्देश जारी कर रहे हैं. प्रभावित क्षेत्रों में बचाव एवं राहत अभियान युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है.

इस बीच कैबिनेट सचिव अजीत सेठ के नेतृत्व में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र रविवार दोपहर को बैठक करेगा जिसमें बचाव एवं राहत अभियानों की समीक्षा की जाएगी. प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय, गृह, रक्षा, विदेश एवं अन्य मंत्रालयों के शीर्ष अधिकारी इस बैठक में भाग लेंगे.