पटना में चुनावी चहल पहल, शेष बिहार में सन्नाटा!

Modi-NDA-Bihar-rallyअजब-गजब चुनावी परिदृश्य है, बिहार का. राजधानी पटना में जिधर नजर डालिए, बड़े बड़े होर्डिंगों पर नेताओं की तस्वीरों के साथ उनके दल अथवा गठबंधन के समर्थन में तुकबंदीयुक्त नारे लिखे नजर आते हैं. लेकिन पटना से बाहर निकलने पर लगता ही नहीं कि कुछ ही दिनों के बाद वहां राज्य विधानसभा के अभूतपूर्व कहे जानेवाले चुनाव होने जा रहे हैं.

राजधानी पटना के तकरीबन सभी बड़े चौराहों, व्यस्त सड़कों और स्थानों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीरों के साथ ‘एक बार फिर नीतीश कुमार’ और दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरों के साथ ‘अबकी बार भाजपा सरकार’ जैसे नारे प्रमुखता के साथ नजर आते हैं.

बिहार के सत्ता संघर्ष के लिए दो मुख्य दावेदार गठबंधनों-नीतीश कुमार के जद (यू), लालू प्रसाद के राजद और कांग्रेस के महागठबंधन के चेहरे के बतौर -भावी मुख्यमंत्री- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पेश किया जा रहा है तो उनके मुकाबले भाजपा, रामविलास पासवान की लोजपा, उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के ‘हम’ को जोड़कर बने राजग यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही मुख्य चेहरा हैं. भाजपा के तमाम होर्डिंगों में किसी और नेता का चेहरा नजर नहीं आता. मोदी बिहार में मुख्यमंत्री पद के दावेदार नहीं हैं, हो भी नहीं सकते, लेकिन राजग अपना चुनाव उनके ही नाम पर लड़ रहा है. दिल्ली के चुनावी नतीजों से ‘सबक’ लेकर राजग ने बिहार के मुख्यमंत्री पद के लिए किसी को उम्मीदवार घोषित नहीं किया है. तीसरा मोर्चा ने कटिहार के एनसीपी सांसद तारिक अनवर के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की घोषणा की है. कहीं कहीं उनके भी होर्डिंग नजर आते हैं.

दोनों प्रमुख गठबंधनों के चुनावी होर्डिंगों पर लिखे कुछ प्रमुख नारों को देखें. नीतीश कुमार की तस्वीरों के साथ महागठबंधन का नारा है, ‘‘आगे बढ़ता रहे बिहार, फिर एक बार नीतीश कुमार.’’ जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरों वाले भाजपा के चुनावी होर्डिंगों पर लिखा है, ‘‘अपराध, अहंकार और भ्रष्टाचार, क्या इस गठबंधन से बचेगा बिहार, अबकी बार भाजपा सरकार.’’

भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बिहार के लिए घोषित सवा लाख करोड़ रुपयों के बिहार पैकेज को भुनाने की गरज से उनकी तस्वीर के साथ बड़े बडे़ होर्डिंगों पर ‘बिहार को एक लाख 25 हजार का पैकेज’ शीर्षक से लिखवाया है, ‘‘बिहार के विकास में न होगी कोई बाधा, प्रधानमंत्री मोदी ने दिया वादे से भी ज्यादा.’’ जवाब में नीतीश कुमार के होर्डिंग कहते हैं, ‘‘झांसे में न आएंगे, नीतीश को ही लाएंगे.’’ प्रधानमंत्री मोदी के चुनावी वादों पर कटाक्ष करते हुए उनके कुछ और होर्डिंगों पर लिखा है, ‘‘बहुत हुआ जुमलों का वार, एक बार फिर नीतीश कुमार.’’ पटना रेलवे जंक्शन के बाहर हनुमान मंदिर के पास लोक जनशक्ति पार्टी के युवा सांसद चिराग पासवान की तस्वीर पर फोकस करते हुए लोजपा के होर्डिंग पर लिखा है, ‘‘आओ चलें चिराग के साथ, मिलकर बनाएं नया बिहार.‘‘ इसी होर्डिंग के उपर लिखा है, ‘‘यही चिराग हर घर को रोशन करेगा.’’

Lalu-Nitish-Congressपूरी राजधानी चुनावी चहल पहल से सराबोर है, होटल और रेस्रां में विभिन्न दलों के नेताओं-कार्यकर्ताओं की चहल पहल दिखती है. खासतौर से बीरचंद पटेल मार्ग पर स्थित सभी प्रमुख दलों जैसे भाजपा, जद-यू- और राजद, लोजपा आदि के मुख्यालयों पर टिकटार्थियों और टिकट से वंचित नेताओं के समर्थकों का जमावड़ा अब छंटने लगा है. सभी बड़े दलों के प्रमुख नेता चुनावी टिकटों की जोड़ तोड़ के साथ ही अपनी पार्टी के टिकट से वंचित और बगावत पर आमादा विधायकों-पूर्व विधायकों को अपने सिपहसालारों के जरिए मनाने पटाने में लगे हैं. टिकट से वंचित इक्का दुक्का नेताओं के समर्थक अब भी अपने दल के मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. बीरचंद पटेल रोड पर चुनावी प्रचार सामग्री की कई दुकानें भी चल पड़ी हैं.

लेकिन राजधानी पटना से बाहर निकलते ही चुनावी चहल पहल गायब नजर आती है. पटना से जहानाबाद और मकदूमपुर होते हुए गया और बोध गया के रास्ते में सड़कों पर एक भी होर्डिंग, पोस्टर, बैनर नजर नहीं आता. झंडे, पताके भी नहीं दिखते. रास्ते से गुजरते समय लगता ही नहीं कि इन इलाकों में विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के चुनाव क्षेत्र मकदूमपुर में तो पहले ही चरण में 12 अक्टूबर को मतदान होना है. नामांकन की अवधि भी वहां बुधवार, 23 सितंबर को ही समाप्त हो चुकी है. मांझी ने दो दिन पहले ही नामांकन पत्र दाखिल किया है. लेकिन कहीं कोई चुनावी चहल पहल नहीं. लोगों से मिलने पर जरूर लगता है कि यहां पूर्व मुख्यमंत्री चुनाव लड़ रहे हैं, और जीत भी सकते हैं.

बोध गया से लगे मगध विश्वविद्यालय की चार दीवारी पर जरूर नीतीश कुमार के समर्थन में वही नारे लिखे गए हैं जो पटना में उनकी होर्डिंगों पर नजर आते हैं लेकिन उनके विरोधियों या कहें विघ्न संतोषियों ने उन नारों में लिखे ‘नीतीश कुमार’ की जगह कालिख पोत दी है.

राजधानी पटना के मुकाबले बिहार के अन्य इलाकों में चुनावी सरगर्मी नहीं होने का कारण एक तो अभी नामांकन प्रक्रिया पूरी नहीं होने को बताया जा रहा है क्योंकि उम्मीदवारी घोषित हो जाने के बाद ही उनकी तस्वीरों के साथ उनके गठबंधन के नेताओं की तस्वीरों वाले होर्डिंग और बैनर पोस्टर बनवाए और लगाए जा सकते हैं. दूसरे, यह भी कहा जा रहा है कि चुनाव आयोग की आचार संहिता यानी ‘शेषन इफेक्ट’ के चलते भी पार्टियां और उम्मीदवार होर्डिंग, पोस्टर भी नहीं लगा रहे क्योंकि इन पर खर्च उम्मीदवार के चुनावी खर्च में जुड़ जाने का खतरा है. हालांकि जहानाबाद में पत्रकार राजकुमार का मानना है कि नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और नेताओं के चुनाव अभियान के जोर पकड़ने के साथ ही शेष बिहार में भी चुनावी सरगर्मी बढ़ने लगेगी.