परतों में भारत की सॉफ्ट पावर

Sandeep Yash

 

File Photo Indian Flag

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नमस्कार, लेखों की इस शृंखला को हमने स्वतंत्रता की 74 वीं सालगिरह के साथ पिरोया है। मक़सद रहा कुछ चुनींदा विषयों के चश्मे से देश के विकास को बिलोका जाए। आज बात होगी सॉफ्ट पावर की जिसे दुनिया भारत का प्रबल पक्ष मानती है।  दिसंबर, 2018 में सॉफ्ट पावर पर हुए सम्मलेन में उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा था कि भारत को एक न्यायसंगत विश्व व्यवस्था स्थापित करने के लिए अपनी नैतिक और सांस्कृतिक ताकत का उपयोग करना चाहिए।

इस सिद्धांत का ज़िक्र सबसे पहले 80 के दशक में लिखी किताब  “Bound to Lead: The Changing Nature of American Power. में मिलता है। इसके लेखक थे हारवर्ड के स्कालर जोसेफ नी। इनके मुताबिक़ सॉफ्ट पावर – अपनी संस्कृति और मूल्यों के आधार पर दूसरे देशों को प्रभावित कर, लक्ष्यों को साधने की क्षमता है, कला है।

सॉफ्ट पावर, सहस्त्राब्दियों से भारत की मेधा और बड़प्पन की पहचान रहा है।  चलिए इस कहानी को किस्सों और उदाहरणों के रास्ते आगे बढ़ाते हैं.

–  Indology, भारत की प्राचीन संस्कृति, सभ्यता और इतिहास का वो दर्पण है जिसने विश्व के दार्शनिकों, बुद्धिजीवियों और नागरिकों को आकर्षित किया है।

–  पश्चिम के विद्वान और वैज्ञानिक लम्बे समय से विश्व सभ्यता के विकास में भारत के योगदान को सराहते आ रहे हैं।  इनमें रोमैन रोलैंड, मैक्स म्युलर, अल्बर्ट
आइन्स्टीन और मार्क ट्वेन जैसे नाम शामिल हैं।

– 1893 में विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद द्वारा भारतीय मूल्यों पर आधारित आध्यात्मिक और सांस्कृतिक व्याख्यान अब किवदंती बन चूका है

-सहस्त्राब्दियों से प्रयाग सहित 3 नगरों में होने वाला कुम्भ मेला।  ये दुनिया का सर्वोच्च आध्यात्मिक जमावड़ा है जहां सभी जात, धर्म, नस्ल, लिंग आमंत्रित हैं

– भारत में दुनिया के सभी प्रमुख धर्म है।  चार इसी मिट्टी से – सनातन धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म और चार बाहर से आये – पारसी धर्म, यहूदी धर्म, ईसाई धर्म और इस्लाम। यह बड़ी तादाद में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।

– बौद्ध तीर्थों के चलते बड़ी तादाद में ASEAN देशों से पर्यटक भारत आते हैं। देश को विदेशी मुद्रा मिलती है और इन देशों से सम्बन्ध प्रगाढ़ होते हैं।

– भारत की सॉफ्ट पावर सहज, सरल और सकारात्मक है। कला, संस्कृति, आयुर्वेद, संगीत, दर्शन, खेल और पाक कला इसके मजबूत स्तम्भ है

– स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी की अहिंसात्मक असहयोग (non-violent non-cooperation) की अवधारणा। इसने देश में जाति -धर्म की बंदिशें तोड़ दी थी। पश्चिम के तमाम देशो को भी नयी दिशा, ऊर्जा और सोच दी थी।

– 60 के दशक का हिप्पी आंदोलन जिसके चलते पश्चिमी देश  हमारे योग, ध्यान, शास्त्रीय संगीत और आध्यात्मिकता की ओर आकर्षित हुए थे।

– 1980 के दशक में  थिएटर के जाने माने नाम पीटर ब्रुक द्वारा एक अंतराष्ट्रीय कास्ट के साथ महाभारत का निर्माण किया जाना। इसका प्रभाव शानदार था।
महान भारतीय महाकाव्य रातों रात दुनिया के सुदूर कोनों में लोकप्रिय हो गया।

–  अब योग के समग्र लाभों को दुनिया मान रही है। 21 जून, 2015 से UNGA ने अंतराष्ट्रीय योग दिवस की घोषणा की जो आज हर बरस मनाया जाता है।

– आज ताजमहल भारत का सबसे मशहूर स्मारक है, लेकिन विदेशी पर्यटक देश भर में फैले हजारों दूसरे ऐतिहासिक और पुरातत्व स्थलों में भी जाते हैं।  ये यात्रायें निश्चित रूप से हमारे देश के प्रति उनके दृष्टिकोण पर अच्छा असर डालती हैं।

–  भारतीय फिल्म उद्योग और टेलीविज़न हमारी सॉफ्ट पावर का एक और सबल प्रतीक हैं। हर बरस भारत में लगभग 1200 फिल्में बनती हैं। हमारी फिल्में अमेरिका, यू के, कनाडा, अरब देश, मिस्र, पोलैंड, रूस, नाइजीरिया, जर्मनी, पेरू, चीन, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान जैसे देशों में खूब देखी और सराही जाती हैं।  KPMG की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ भारतीय फिल्मो का अंतराष्ट्रीय कलेक्शन बढ़ रहा है।  2012 में ये 760 करोड़ रू था, 2016 में ये 1100 करोड़ रू था , 2019  में ये 1700 करोड़ रू था और 2024 में बढ़ कर 2800 करोड़ होने का अनुमान है। बाहुबली फिल्म की अंतराष्ट्रीय सफलता इसका ताजा प्रमाण है। अभिनेता अमिताभ बच्चन, रजनीकांत और शाहरुख़ खान के मुरीद दुनिया भर में हैं। और आपकी जानकारी के लिए हमारा बालिका वधू टीवी सीरियल अठारह देशों में सोलह भाषाओं में देखा जाता है।

– भारतीय पाक शास्त्र कला पांच हज़ार बरस से भी ज़्यादा पुरानी है। यहाँ हर आँचल की अपनी विशिष्ट पाक परंपरा है जो पकवानो में परिलक्षित होती है।  विशेषज्ञ ऐसे 31 पकवानो को चिन्हित करते हैं जो समुद्र पार ज़ायके का दूसरा नाम बन चुके हैं। इस फेहरिस्त में रोग़न जोश, डोसा, लिट्टी -चोखा, छोला भटूरा, चिकेन मलाई टिक्का रसगुल्ला, बिरयानी और ढोकला वगैरह सबसे ऊपर हैं।  आज दुनिया के लगभग हर बड़े शहर में भारतीय रेस्त्रां मौजूद है। अकेले अमरीका में इनकी संख्या 5000 और इंग्लैंड में 10000 है।  आपकी जानकारी के लिए लंदन में 1810 में पहला Hindoostane Coffee House खुला था।

-भारतीय प्रवासी : इसमें दो वर्ग हैं -PIO और NRI. 2019 में आयी UN की माइग्रेशन रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रवासी भारतीयों की जमात दुनिया में सबसे बड़ी है। इसकी संख्या लगभग 2  करोड़ है और ये सभी महाद्वीपों में फैली है, समृद्ध है। स्थानीय अर्थव्यस्था में इसकी एहम भूमिका है।आपकी जानकारी के लिए,  2005 में Indo-US Nuclear Deal वार्ता में अमरीकी प्रवासी भारतोयों ने एहम भूमिका निभाई थी।  प्रवासी भारतीय, हमारी सॉफ्ट पावर और विदेश नीति के मजबूत स्तम्भ हैं।

– संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन : भारत शुरू से ही संयुक्त राष्ट्र मिशनों में सबसे ज़्यादा सैनिकों को भेजने वाला देश रहा है और दुनिया भर में 49 शांति अभियानों में हिस्सा ले चुका है। इन मिशनों में हमारे 168 शांति सैनिक वीरगति को भी प्राप्त हो चुके हैं।

विदेशी सहायता – एक ज़माने में विदेशी सहायता लेने वाला भारत आज अन्य ज़रूरतमंद देशों की वित्तीय मदद कर रहा है। 2011 के भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन में भारत ने रियायती ऋण के रूप में अफ़्रीकी देशों को 5 अरब डॉलर की सहायता दी।  इसके अलावा 10,000 नई छात्रवृत्ति, आईटीईसी कार्यक्रम के तहत 2,500 प्रशिक्षण स्लॉट और अगले तीन वर्षों में भारत में अध्ययन के लिए 22,000 छात्रवृत्ति का वादा शामिल था। अफ्रीका में कम्युनिस्ट चीन की विराट वित्तीय शक्ति का मुक़ाबला जनतांत्रिक भारत अपनी सॉफ्ट पावर से कर रहा है।

आपकी जानकारी के लिए अकेले 2011 में भारत ने विदेशी सहायता में 1.5 बिलियन डॉलर से अधिक का वितरण किया था।  और 2019 20 में भारत ने इन देशों को वित्तीय मदद दे अपनी मित्रता, नियत और सबलता का ऐलान किया
– भूटान को – 3202 करोड़ रू
– मॉरिशस को – 1100  करोड़ रू
– नेपाल -1050 करोड़ रू
-मालदीव – 575  करोड़ रू
– अफ़्रीकी देशो को -450 करोड़ रू
– म्यांमार को – 400 करोड़ रू
– अफ़ग़ानिस्तान को – 400 करोड़ रू
-_रूस को – 1 अरब डॉलर
– कैरिबियन देशो को – 164 मिलियन डॉलर

– जनतांत्रिक मूल्यों का प्रतिनिधि –  सन 2000 से, सबसे बड़े लोकतंत्र भारत ने वैश्विक स्तर पर जनतांत्रिक मूल्यों को प्रोत्साहित करने का बीड़ा उठाया है।  वो 2005 में संयुक्त राष्ट्र के लोकतंत्र कोष में शामिल हुआ और इसमें 25 मिलियन डॉलर का योगदान दिया। अमेरिका के बाद ये दूसरा सबसे बड़ा योगदान था। यहाँ भारत की भूमिका चुनावी सहायता और भ्रष्टाचार निरोधक कार्यक्रम से जुडी है। क्षेत्रीय स्तर पर भारत ने अफगानिस्तान में लोकतंत्र की बहाली और विकास सहायता को एक सूत्र में पिरो रखा है। आज भारत का बेदाग लोकतांत्रिक रिकॉर्ड उन देशों के लिए एक मजबूत सॉफ्ट पॉवर सम्बल हैं जो अतीत में किसी देश की कॉलोनी रहे हैं।

संस्कृति – आज देसी ‘संस्कृति” भारत की विदेश नीति का अभिन्न अंग बन चुकी है। इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस (ICCR) ने 19 देशों में 22 सांस्कृतिक केंद्र बनाये है।  ये केंद्र फिल्म फेस्टिवल्स, पुस्तक मेलों और कला प्रदर्शनियों को आयोजित करते हैं।  इनका उद्देश्य भारत की छवि को एक बहुसांस्कृतिक समाज के रूप में प्रस्तुत करना है।  साथ ही भारत सरकार विदेशों में वार्षिक विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित कर हिंदी के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है।  ये आयोजन हर बरस दुनिया के अलहदा शहर में किया जाता है।

एक नज़र
–  Lowy Institute Power Index के मुताबिक़ इस क्षेत्र में भारत की असीम क्षमता का दोहन अभी बाकी है
– विशेषज्ञों के मुताबिक़ सॉफ्ट पावर को ठोस, व्यवस्थित रणनीति की शक्ल देने के लिए भारत को इसे अपनी मजबूत सैन्य और आर्थिक ताक़त से जोड़ना होगा
– इस लक्ष्य को साधने के लिए 2006 में विदेश मंत्रालय ने Public Diplomacy Division बनायीं है
– राजनीतिक मूल्य, संस्कृति और विदेश नीति भारत की सॉफ्ट पावर के तीन आयाम हैं
– भारत द्वारा हाल ही में प्रक्षेपित सार्क सेटेलाइट भी भारत की सॉफ्ट पॉवर कूटनीति का हिस्सा है
– 2017 में PSLV-C37 (एक रॉकेट में 104 उपग्रह) का प्रक्षेपण जिसकी दुनिया भर में सराहना की है
– दुनिया की सबसे जानी मानी कंपनियों के सीईओ भारतीय मूल के हैं
– आज भारत में सॉफ्ट पावर को दो भागों में बांटा जा सकता है
* गैर सरकारी : योग, प्रवासी भारतीय, शिक्षा, भारतीय फिल्म उद्योग एवं TV और वैद्यक-शास्र
* सरकार द्वारा संचालित – अंतरिक्ष कूटनीति, पर्यटन, कूटनीतिक पहल, जनतंत्र, पंचशील और गुटनिरपेक्षता, सफल उपग्रह प्रक्षेपण, आपदा प्रबंधन प्रणाली

विशेषज्ञ ये भी मान रहे हैं कि भारत की सॉफ्ट पावर अब सरकार की नीतियों से स्वतंत्र होकर उभर रही है। और अगला दौर, सॉफ्ट पावर से स्मार्ट पावर की तरफ बढ़ने का है

चलते चलते – मार्क ट्वेन भारत की सॉफ्ट पावर का कुछ इस गुणगान करते है ” “India is the cradle of the human race, the birthplace of human speech, the mother of history, the grandmother of legend, and the great-grandmother of tradition. Our most valuable and most instructive materials in the history of man are treasured up in India only,” .

तो भारत की सॉफ्ट पावर उस बढ़ती लकीर की तरह है जिसका आगाज़ दिखता है, पर अंजाम दूर दूर तक नहीं ….

आज बस इतना ही।