पर्यटकों की घटती संख्या बड़ी चुनौती

kashmir_tourismइन दिनों पर्यटन उद्योग केंद्र सरकार की प्राथमिकता सूची में है. पर्यटकों की बारीक़ सुविधाओं पर दिया जा रहा है, लेकिन अपेक्षित नतीज़े अभी भी चुनौती बने हुए हैं. देश में यह तीसरा सबसे बड़ा सेवा उद्योग है और भारतीय अर्थव्यवस्था में पर्यटन उद्योग की हिस्सेदारी छह फीसद से अधिक है. देश के सकल रोजगार में इस क्षेत्र का हिस्सा लगभग नौ फीसद है. जाहिर है कि अर्थव्यवस्था में पर्यटन उद्योग ने विशिष्ट और लाभकारी मुकाम बना लिया है. उल्लेखनीय यह भी है कि पर्यटन से होने वाले लाभ का एक बड़ा हिस्सा विदेशी पर्यटकों से प्राप्त होता है. दर्शनीय पर्यटन स्थलों के कारण भारत की तरफ विदेशी सैलानियो का खासा रुझान रहता है.

भारत में प्रतिवर्ष लगभग पचास लाख विदेशी पर्यटक आते हैं, जिनसे पर्यटन उद्योग को करीब ग्यारह अरब डॉलर की कमाई होती है. ऐसे में अगर विदेशी पर्यटकों की आमद में कमी होने लगे तो यह निश्चित ही चिंता का विषय है. पांच वर्षों के आंकड़े इस चिंता का आकार बढ़ाते हैं. सन 2011 में विदेशी पर्यटकों में नौ फीसद बढ़ोतरी हुई थी, जो 2012 में छह और 2013 में तीन फीसद पर पहुंच गई. हालांकि 2014 में कुछ बढ़ोतरी हुई, लेकिन वर्ष 2015 में संख्या में गिरावट आई . इस साल जनवरी से जून तक के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी पर्यटकों की आवक में सात फीसद बढोतरी देखी गई.

आंकड़ों से इतर विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने वाले राज्यों में उनकी आमद में कमी हुई है. हिमाचल के शिमला-मनाली से लेकर आगरा के ताजमहल और ऐतिहासिक किलों और हवेलियों के प्रदेश राजस्थान के सभी पर्यटन स्थलो पर इस वर्ष अब तक विदेशी पर्यटकों की आमद घटी है .अगर इसी तरह से भारत के प्रति विदेशी पर्यटकों का मोहभंग होता रहा, तो आने वाले समय में भारतीय पर्यटन उद्योग के लिए बड़ा संकट खड़ा कर सकता है. पर्यटन मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति ने इस स्थिति के लिए विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा और कुशल श्रम शक्ति का अभाव तथा आधारभूत ढांचे की कमी को जिम्मेदार माना है. समिति ने रिपोर्ट में विदेशी पर्यटकों में लगातार गिरावट पर चिंता जताते हुए सरकार से शीघ्र प्रभावी कदम उठाने को कहा है.

Tourismविदेशी पर्यटकों की इस उदासीनता की बड़ी वजह उनके साथ होने वाले अपराध हैं. नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकडों के मुताबिक वर्ष 2015 में विदेशी महिला पर्यटकों के साथ हुए अपराधों के कुल 384 मामले दर्ज किए गए. इनमें सबसे ज्यादा 135 मामले राजधानी दिल्ली में दर्ज हुए. उसके बाद गोवा में 66 और उत्तर प्रदेश में 64 मामले दर्ज हुए.बीते वर्षों में विभिन्न शहरों में सर्वेक्षण में लगभग सत्तर फीसद ट्रैवल ऑपरेटरों का कहना था कि हर विदेशी पर्यटक की भारत आने की पहली शर्त पुख्ता सुरक्षा की होती है और मौजूदा हालात इसकी इजाज़त नहीं देते. इसी साल अप्रैल में राजस्थान के अजमेर में एक स्पेनिश जोड़े पर कुछ बदमाशों ने हमला कर उसे घायल कर दिया और महिला के साथ बलात्कार की कोशिश की. एक अन्य वारदात में माता-पिता के साथ देहरादून घूमने आई बारह साल की इजरायली लड़की के साथ एक फोटोग्राफर ने बदसलूकी की कोशिश की. पिछले साल जून में दिल्ली के द्वारका में तीस वर्षीय विदेशी महिला से सामूहिक दुष्कर्म और लूटपाट की हुई. वर्ष 2014 में दिल्ली में इक्यावन वर्षीय विदेशी महिला के साथ लूटपाट और दुष्कर्म हुआ था. इसके अलावा, 2013 में मध्यप्रदेश के दतिया में विदेशी महिला के साथ सामूहिक बलात्कार की वारदात ने देश को शर्मसार किया था.

लब्बो लुआब यह कि तीन-चार साल में विदेशी सैलानियों के मन में भारत भ्रमण लेकर असुरक्षा का भाव घर करता जा रहा है, जिस वजह से वे भारत की ओर से लगातार मुंह फ़ेरते जा रहे हैं.भारत के अधिकतर पर्यटन स्थलों जैसे दिल्ली, मुंबई, आगरा, वाराणसी, हरिद्वार, अजमेर, जोधपुर, सांची आदि में आपराधिक घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है. राजधानी दिल्ली के हाल सबसे गंभीर हैं . विदेशी पर्यटकों के मन मे भारत को लेकर बढ़ रहे असुरक्षा भाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अब भारत आते ही अपनी सुरक्षा के लिए मिर्च पाउडर रखने से लेकर बॉडीगार्ड रखने तक खुद ही तमाम तरह के इंतजाम करने लगे हैं. यह स्थिति हमारी पुलिस व्यवस्था पर कठोर टिप्पणी तो है ही,पर्यटन उद्योग के लिए भी बेहद नुकसानदेह है और दुनिया में भारत की छवि खराब करने वाली भी है. पर्यटन मंत्रालय को इस पर गंभीर होना ही होगा.