पाक में नेहरु की किताब एक ट्राफी जैसी हैः ज़मान खान

Vimal Chauhan

pakistan_historianभारतीय इतिहास कांग्रेस के तीसरे और अंतिम दिन देश व विदेश से आये कई इतिहासकारों और शिक्षाविदों ने प्राचीन भारत से लेकर आधुनिक भारत पर तक अपने विचार रखे.

पाकिस्तान से आये मशहूर इतिहासकार और पत्रकार ज़मान खान ने ‘कैसी आधी रात के पाकिस्तानी बच्चे नेहरू और उसके भारत को देखते हैं’ विषय पर अपने विचार रखे.

नेहरु को पूरे विश्व का नेता बताते हुए ज़मान खान कहते हैं, ” नेहरू सिर्फ भारत में ही नहीं प्रसिध्द है अपितु पूरे विश्व में उनका एक विशिष्ट स्थान है”.

पाकिस्तान में नेहरु की प्रसिध्दि पर बात करते हुए खान साहब बताते हैं कि पाकिस्तान में नेहरु पर किताबें इतनी आसानी से तो नहीं मिलती लेकिन नेहरु की प्रसध्दि के चलते उनकी किताबों का मिलना एक इनामों में मिली एक ट्राफी के समान है”.

नेहरू को दूरदर्शी व्यक्ति बताते हुए ज़मान साहब कहते हैं कि जब पूरी दुनिया दो भांगों में बंटी हुई थी और नेहरु को अमेरिका और सोवियत संघ में से एक को चुनना था तब नेहरु ने भविष्य को समझते हुए गुटनिरपेक्षता के रास्ते को चुना.

वर्तमान भारत के निर्माण में नेहरू की भूमिका पर बात करते हुए ज़मान खान बताते हैं कि आज के भारत के निर्माण में नेहरु की भूमिका अभिन्न है औऱ नेहरु ने बटवारे के समय की जटिल समस्यों को बड़े ही अच्छे ढंग से संभाला था.

नेहरु के व्यक्तित्व के बारे में बताते हुए जमान साहब एक किस्सा सुनाते हैं और कहते हैं कि बंटवारे के बाद नेहरु जब पाकिस्तान गए तब वहां पर पाकिस्तान की सरकार ने प्रधानमंत्री नेहरु से उनकी इच्छा जाननी चाही तब नेहरु ने बंटवारे से पूर्व उनका पीछा करने वाले जासूस के साथ कॉफी पीने की इच्छा जताई जिसे वहां कि सरकार ने पूरा किया.,ऐसा सरल व्यक्तिव था नेहरु का.

भारत और पाकिस्तान के कड़वे संबधों पर चिंता जताते हुए जमान खान कहते है कि दोनों देशों के बीच कड़वे संबधों के बाबवजूद वहां की आवाम नेहरु को बेहद पसंद करती है और इज्जत करती है.

इस वर्ष आईएचसी के 75वें अधिवेशन का प्रमुख आकर्षण है नेहरूवादी युग में अर्थव्यवस्था, राजनीति और समाज एवं उनकी समकालीन प्रासंगिकता. इसी कड़ी में आज विदेश से आये विद्वानों ने उनके देश में नेहरु की स्वीकार्यता पर बात की.