ग्लासगो में दिखा पूर्वात्तर राज्यों का दम

Anugrah Mishra
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India’s gold medalist Sanjita Khumukcham during the medal presentation ceremony of 48-kg women’s weightlifting event at the Commonwealth Games in Glasgow

पदकों की दौड़ में भारत की दावेदारी को मज़बूत करने में पूर्वोत्तर राज्यों के खिलाड़ियों की अहम भूमिका रही है. देश के तमाम हिस्सों में भले ही पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों साथ दुर्व्यवहार और भेदभाव की घटनाएं आए दिन सामने आती रहती हों लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेताओं में पूर्वोत्तर राज्यों का दबदबा कायम है.

ग्लासगो में चल रहे 20वें राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की झोली में अब तक कुल 25 पदक आए हैं. भारत 7 स्वर्ण, 11 रजत और 7 कांस्य पदकों को साथ अंक तालिका में कनाडा को पछाड़ते हुए दोबारा चौथे स्थान पर पहुंच गया है.

20वें राष्ट्रमंडल खेलों में देश को पहला स्वर्ण पदक भी मणिपुर की रहने वाली संजीता चानू ने ही दिलाया. 20 वर्षीय संजीता ने भारोत्तोलन के 48 किलोग्राम वर्ग में सोने का तमगा जीता. संजीता ने कुल 173 किलो वज़न उठाया. हालांकि संजीता 2010 के दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने से महज दो किलोग्राम वज़न से चूक गईं. संजीता देश की विख्यात भारोत्तोलक कुंजारानी देवी को अपना आदर्श मानती हैं जो कि मणिपुर से ही आती हैं.

संजीता के साथ वर्ग में मणिपुर की ही मीराबाई चानू ने देश के लिए रजत पदक जीता.19 वर्षीय मीराबाई ने 170 किलोग्राम वज़न उठाया. ग्लासगो राष्ट्रमंडल की पदक तालिका में देश का खाता खोलने का गौरव इन्हीं दोनों खिलाड़ियों के नाम है.

मणिपुर के खिलाड़ियों के वज़नदार आगाज के बाद पहले ही दिन जूडो में देश के लिए रजत पदक आए. एक पदक असम की सुशीला लिक्माबाम के खाते में आया. सुशीला ने महिला वर्ग की 48 किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया. जूडो में ही मणिपुर की कल्पना थोडम ने देश के लिए कांस्य पदक जीता. 24 वर्षीय थोडम ने 52 किलोग्राम वर्ग में पदक पक्का किया.

बार-बार, लगातार

वर्ष 2010 के दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में भी पूर्वोत्तर के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया था. भारोत्तोलन में 58 किलोग्राम वर्ग के मुकाबले में असम की रेनूबाला चानू ने स्वर्ण पदक जीता था. रेनूबाला ने 2006 के राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक हासिल किया था.

इंफाल के रहने वाले मुक्केबाज सुरंजाय सिंह ने भी दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में सोने पर मोहर लगाई थी. लिटिल टायसन कहे जाने वाले सुरंजॉय ग्वांगझाऊ एशियन खेलों में भी कांस्य पदक जीत चुके हैं.

मणिपुर की ही सोनिया चानू ने भारोत्तोलन के 48 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक हासिल किया था.

देश की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत, भारत की स्टार मुक्केबाज एम सी मैरीकाम भी पूर्वोत्तर से आती हैं. जिन्होंने कई बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का झंडा बुलंद किया है. राजीव गांधी खेल रत्न और अर्जुन अवार्ड से सम्मानित मैरीकॉम भले ही इस बार ग्लासगो में भारत का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही हों लेकिन लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली मैरीकॉम देश के सबसे प्रतिष्ठित खिलाड़ियों में शुमार हैं.

देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले खिलाड़ी जब दुनिभा भर के सामने एक मंच पर तिरंगे के तले खेलते हैं तो वह किसी भी राज्य के बजाय सिर्फ अपने देश के लिए खेलते हैं. लेकिन फिर भी जिस तरह का भेदभावपूर्व रवैया और अप्रिय घटनाएं आए दिन पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के साथ होती रहती हैं ऐसे में तमाम आभावों के बावजूद वैश्विक मंच पर उनका शानदार प्रदर्शन देश भर के लिए एक मिशाल है.

देश में जिन राज्यों के बारे में जानकारी न्यूनतम है और जिन राज्यों के लोगों के साथ बाकी राज्यों में भेदभाव के कारण देश का सिर नीचा होता है, वही देश को अंतरराष्ट्रीय फलक पर सिर ऊंचा करके खड़ा होने का मौका दे रहे हैं. इन्हें सलाम.