प्रिंट मीडिया के सामने डिजिटल युग की चुनौतियां; 59वीं सालाना रिपोर्ट पेश

RSTV Bureau
NEW DELHI: NEWSPAPERS IN INDIA. GRAPHICS (PTI)

NEW DELHI: NEWSPAPERS IN INDIA. GRAPHICS (PTI)

प्रिंट मीडिया पर 59वीं सालाना रिपोर्ट ‘प्रेस इन इंडिया 2014-15’ मंगलवार को जारी की गई। सूचना और प्रसारण मंत्री अरुण जेटली ने इसे जारी करते हुए कहा कि “डिजिटल और सूचना युग की चुनौतियों को प्रिंट मीडिया स्वीकार करे। इंटरनेट की क्रांति और तकनीक ने पूरी दुनिया के प्रिंट मीडिया के सामने अपनी मौजूदगी बनाए रखने और विकास के लिए बड़ी चुनौती पेश की है। बहरहाल भारत एक अपवाद है जहां प्रिंट मीडिया विकास कर रहा है और उसकी मांग लगातार बढ़ रही है। क्षेत्रीय समाचारपत्रों का आधार भी बढ़ रहा है”।

सूचना और प्रसारण मंत्री ने कहा कि प्रिंट मीडिया सूचना के प्रवाह पर आधारित होता है जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा किया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की वजह से समाचार और राय के बीच की विभाजक रेखा कमजोर हुई है। उनकी राय में “इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में होने वाली चर्चा और बहस शोर-शराबे से भरी होती है जबकि प्रिंट मीडिया वस्तुनिष्ठता और समाचार की प्रकृति बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। ये समझना भी महत्वपूर्ण है कि विभिन्न विचार इसलिए उभरते हैं क्योंकि मीडिया का दायरा बहुत बड़ा हो गया है जहां विभिन्न पहलू सामने आते हैं।“ सूचना और प्रसारण मंत्री ने कहा कि मैगजीन पत्रकारिता को अपने आप को पुनर्भाषित करना होगा क्योंकि पाठकों के सामने डिजिटल और सोशल मीडिया का विकल्प बढ़ता जा रहा है।

भारत के समाचारपत्रों के पंजीयक ने सालाना रिपोर्ट ‘प्रेस इन इंडिया 2014-15’ तैयार की है। ये रिपोर्ट पंजीकृत प्रकाशनों की ओर से जारी सालाना उल्लेखों और विश्लेषणों के आधार पर तैयार की गई है। ये वार्षिक उल्लेख हर पंजीकृत प्रकाशन को देना होता है।

रिपोर्ट के मुताबिक प्रिंट मीडिया ने पिछले साल की तुलना में 5.80 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की है। साल 2014-15 के दौरान कुल 5 हजार 817 नए प्रकाशन शुरू हुए जबकि 34 प्रकाशन बंद हुए। 31 मार्च, 2015 तक कुल 1 लाख 5 हजार 443 पंजीकृत प्रकाशनों में से हिंदी में सबसे अधिक समाचारपत्र और पत्रिकाएं हैं। हिंदी में कुल 42 हजार 493 प्रकाशन हैं जबकि अंग्रेजी में 13 हजार 661 पंजीकृत प्रकाशन हैं। सर्कुलेशन के आधार पर भी हिंदी प्रकाशन सबसे आगे रहा और उसने रोजाना 25 करोड़ 77 लाख 61 हजार 985 प्रतियां छापीं। दूसरे नंबर पर अंग्रेजी में 6 करोड़ 26 लाख 62 हजार 670 प्रतियां और तीसरे नंबर उर्दू में 4 करोड़ 12 लाख 73 हजार 949 प्रतियां छापी गईं।