बजट पर क्या है राजनीतिक दलों की राय

RSTV Bureau

mallikarjun_congressवित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट की भले ही उनकी सरकार और पार्टी की ओर से भूरी-भूरी प्रशंसा की गई हो लेकिन अन्य विपक्षी दलों ने इस बजट को लेकर केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. कई राजनीतिक दलों ने अपनी प्रारंभिक प्रतिक्रियाओं में कहा है कि यह बजट मूलरूप से कॉर्पोरेट जगत को बढ़ावा देने वाला है और इसमें ग़रीब और बहुमत आबादी की अनदेखी की गई है.

यह भी कहा जा रहा है कि बजट में दूरदर्शिता का अभाव है और कई मोर्चों पर यह चुनौतियों से लड़ पाने में अक्षम है. हालांकि भाजपा का कहना है कि ऐसी प्रतिक्रियाएं राजनीति से प्रेरित ज़्यादा हैं और इनके पीछे किसी ठोस तर्क का सर्वथा अभाव है. कुछ राजनीतिक दल बजट के कई बिंदुओं की तारीफ़ भी कर रहे हैं.

बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के नेता और पूर्व रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने बजट को बड़े उद्योगपति और कॉर्पोरेट घराने के लिए फायदेमंद बताया. खड़गे ने कहा कि इस बजट में देश की आम जनता और गरीबों के लिए कुछ नहीं है और कल्याणकारी योजनाओं के लिए बजट में कोई कदम नहीं उठाए गए.

बीजू जनता दल के सांसद जय पांडा ने कहा बजट में बुनियादी सुविधाओं पर ज़ोर दिया गया है जो कि एक अच्छा कदम है. देश के मौजूदा आर्थिक हालातों में ये एक बढ़िया बजट है.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने बजट को शब्दों का गुलदस्ता और घोषणाओं की वर्षा करार दिया है.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सीताराम येचुरी ने बजट को पूंजीपतियों के अनुकूल बताया. येचुरी ने कहा कि बजट में कृषि, सोशल सेक्टर जैसे क्षेत्रों पर सरकारी खर्च को कम किया गया है जिससे रोजगार और लोगों की आमदनी पर बुरा असर पड़ेगा. बजट से न आर्थिक विकास होगा और न ही लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे.

जेडीयू के अध्यक्ष शरद यादव ने इस बजट को पिछली सरकार के बजट की तरह ही बताया. उन्होंने कहा कि जहां हम पहले खड़े थे अब भी वहीं हैं. चुनावों में भाजपा ने जो देश बदलने का वादा किया था वो पूरा नहीं किया है और इस बजट में देश का एक बड़े तबके को नजरअंदाज किया गया.

समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने कहा कि ये पूंजीपतियों का बजट है. देश की गरीब, किसानों और बेरोजगार जनता के लिए बजट में कोई योजना नहीं बनाई गई.

कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने कहा कि ये निराशाजनक बजट है इसमें कोई पुख्ता विचार नहीं है. थरूर ने कहा कि बजट में मंहगाई से निपटने के कोई उपाय नहीं किए गए हैं. उन्होंने कहा कि मुझे डर है कि इस बजट का देश की जनता पर क्या असर पड़ेगा.

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इस बजट से देश की जनता की उम्मीदें टूटी हैं. मंहगाई और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों का बजट में कोई जिक्र नहीं किया गया.