बिहार में चक्रवाती तूफान से 32 की मौत, 80 घायल

Vimal Chauhan
File Photo ( PTI )

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बिहार के उत्तर पूर्व इलाके में मंगलवार रात आए चक्रवाती तूफान ने भारी तबाही मचाई है. अब तक की प्राप्त खबरों के मुताबिक इस तूफान में 32 लोगों की मौत हो गई है और 80 से अधिक लोग घायल हुए हैं. इस तूफान में सबसे ज्यादा मधेपुरा और पूर्णिया जिले प्रभावित हुए हैं.

सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए मुआवजा दिए जाने की घोषणा की गई है. साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तूफान से प्रभावित इलाकों का हवाई दौरा करेंगे.

तूफान पर विधानसभा में दिए एक बयान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि शुरूआती आकलन के मुताबिक उत्तर और पूर्वोत्तर बिहार के कई जिलों में तूफान से फसलों और मानव जिंदगी को भारी नुकसान पहुंचा है. इन जिलों में पूर्णिया, दरभंगा, किशनगंज, कटिहार, मधुबनी, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, अररिया और भागलपुर है.

कुमार ने कहा कि वह नुकसान का जायजा लेने के लिए बुधवार दोपहर हवाई सर्वेक्षण पर निकलेंगे और इसके बाद पूर्णिया में प्रभावित क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक करेंगे.

बाद में विधानसभा के बाहर संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा कि तूफान के बारे में पहले से कोई चेतावनी नहीं मिली थी.

प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को सर्वेक्षण के बाद सिफारिश भेजने का निर्देश दिया गया है.

बिहार आपदा प्रबंधन विभाग के मुख्य सचिव व्यासजी ने आपदा की जानकारी देते हुए बताया कि पूर्णिया जिले में सर्वाधिक 25 लोगों की मौत होने की खबर है. मधेपुरा में तूफान से छह व्यक्तियों की जान गई जबकि एक व्यक्ति की मौत मधुबनी में हुई.

व्यासजी ने आपदा के प्रभाव को बताते हुए कहा कि जिलों में इस आपदा से सड़क परिवहन भी प्रभावित हुआ क्योंकि तूफान की वजह से कई पेड़ भी उखड़ कर सड़कों पर गिर गए.

बिहार के पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा, मधुबनी, समस्तीपुर और दरभंगा में आए भीषण तूफान की वजह से हजारों पेड़ उखड़ गए, बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं, हजारों मकान और झोपड़े नष्ट हो गए तथा मक्का, गेहूं और दालों की खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा.

नुकसान के आकलन के बारे में बताते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि प्रभावित जिलों में प्रशासन स्थिति का जायजा ले रहा है और नुकसान का आकलन कर रहा है.

तबाही का मंजर यह है कि शहर में जगह-जगह जाम लगे हैं, आस-पास के गांव से शहर को जोड़ने वाली तमाम सड़कों पर पेड़ और खंभे गिरे पड़े हैं. बिजली व्यवस्था पूरी तरह से ठप है.

बिहार का कोशी जिला पहले भी कई बार प्राकृतिक आपदाओं का शिकार रहा है और बीते कुछ सालों में बाढ़ की वजह से वहां जान व माल का भारी नुकसान हुआ था.