‘बेहतर लोकतंत्र के लिए आलोचना महत्वपूर्ण’

RSTV Bureau

modi_profile16वीं लोकसभा के पहले विशेष सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकतंत्र के लिए आलोचना ज़रूरी है और इससे देश को सकारात्मक दिशा में बढ़ने के लिए प्रेरणा मिलती है.

उन्होंने कहा कि सत्र में सभी दलों की ओर से की गई टिप्पणियां चर्चा को सकारात्मक दिशा में लेकर गईं और जो बातें आलोचना के तौर पर कही गईं, वो दरअसल अपेक्षाओं का प्रकटीकरण थीं इसलिए उनका स्वागत किया जाना चाहिए.

लोकसभा में विशेष सत्र के समापन से पूर्व अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विश्वास दिलाया कि देश के अंतिम व्यक्ति के लिए काम करना राष्ट्रपति के भाषण और उनकी सरकार के अगले पांच साल के कामकाज का मूलमंत्र है.

उन्होंने कहा, “सदन में आने से पहले हम उम्मीदवार थे लेकिन अब सदन में आने के बाद हम जनता के उम्मीदों के दूत हैं, जनता के उम्मीदों के रखवाले हैं.”

सभी दलों के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि वो सभी को साथ लेकर ही देश के लिए काम करने के तरीके में विश्वास करते हैं. प्रधानमंत्री ने कहा, “सदन में हमें पूरी तरह सकारात्मक माहौल नज़र आया. जो मुद्दे लोगों ने उठाए वो वाजिब थे. यह विश्व के सामने सबसे बड़े लोकतांत्रिक राज्य होने और इसकी ताकत को पेश करने का समय है. हमें विश्व को प्रभावित करना है.”

ग़रीबी उन्मूलन पर विशेष तौर पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अमीर को अपने बच्चों को पढ़ाना है तो दुनिया के सभी द्वार उनके लिए खुले हुए हैं लेकिन संकट ग़रीब के सामने है इसलिए सरकार का ये दायित्व है कि वो गरीबों की सुने और गरीबों के लिए काम करे. अगर हम गरीबों को की अपेक्षा को पूरा नहीं करते तो जनता हमें कभी माफ नहीं करेगी.

प्रधानमंत्री ने कहा कि गांव के अंदर उद्योगों का जाल बिछाना है. अगर इस ओर ध्यान दिया गया तो गांव भी बदलेगा और किसान भी बदलेंगे.

हाल ही में सामने आईं बलात्कार की घटनाओं और हिमाचल प्रदेश के हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि बलात्कार की घटनाओं का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने और बेकार की बयानबाज़ी से राजनेताओं को बचना चाहिए.

अपने भाषण में युवा शक्ति के योगदान से अपार संभावनाओं की ओर देखते हुए उन्होंने कहा कि जहाँ चीन अब बूढ़ा हो रहा है, भारत में तरुणाई गूंज रही है. उन्होंने इसका ज़िक्र करते हुए ‘श्रमेव जयते’ का नारा भी दिया.

उन्होंने कहा, “आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी दलित, शोषित, दबे कुचले तबकों के जीवन में अभी भी बदलाव नहीं आया है. मुसलमानों के जीवन में बदलाव नही आया है. इसीलिए हमें फोकस करके इन तबकों पर ध्यान देने की ज़रूरत है. सामाज के सभी अंग स्वस्थ होंगे तभी देश का विकास होगा.”

स्वराज के प्रति आस्था और सम्मान का आहवान करते हुए उन्होंने कहा कि अगर क्रिकेट के एक मैच में करोड़ों लोग खड़े हो सकते हैं तो देश के विकास में क्यो नहीं. साथ ही उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर स्वच्छ भारत का संकल्प लेना चाहिए.