भाजपा स्थापना दिवस: 40 वर्ष

Panchanan Mishra
New Delhi: Prime Minister Narendra Modi speaks as BJP President Amit Shah looks on during a press conference at the party headquarter in New Delhi, Friday, May 17, 2019. (PTI Photo)

New Delhi: File photo of Prime Minister Narendra Modi and Home Minister Amit Shah. (PTI Photo)

भारतीय जनता पार्टी आज 40 वर्षों का शानदार सफर तय कर अपने श्रेष्ठ दौर से गुज़र रही है। हालांकि मौजूदा वक़्त में कोरोना महामारी ने देश के सामने एक अभूतपूर्व संकट पैदा किया है पर पार्टी का शीर्ष नेतृत्त्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तौर पर जब खुद संकट का सबसे आगे बढ़कर नेतृव कर रहा हो तो देश के साथ पार्टी के हौसले भी बुलंद होना स्वाभाविक है। आज ही प्रधानमंत्री मोदी ने पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया। मोदी ने कहा कि हमारी पार्टी का स्थापना दिवस एक ऐसे कालखंड में आया है जब देश ही नहीं, पूरी दुनिया एक मुश्किल वक्त से गुजर रही है। चुनौतियों से भरा ये वातावरण, देश की सेवा के लिए, हमारे संस्कार, हमारे समर्पण, हमारी प्रतिबद्धता को और प्रशस्त करता है। कोरोना का संकट अभी बड़े तौर पर बरकरार है पर बीजेपी की बड़ी कोशिश इससे निपटने में सरकार के साथ पूरी जी जान से अपने काडर को लगाने की है। य पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने इस मौके पर कार्यकर्ताओं को 5 मंत्र या सूत्र अपनाने की बात कही है। इसमें एक ये कि एक वक्त का खाना नहीं खाकर उन वंचितों के प्रति सहानुभूति प्रर्दशित करना है। ये कुछ 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई के वक्त अन्न संकट से जूझ रहे देश के लोगों से प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की अपील जैसा है।

6 अप्रैल 1980 को स्थापित हुई भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा पार्टी के आदर्श और अंत्योदय का मंत्र देने वाले दीन दयाल उपाध्याय का है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में केंद्र में सत्ता में आने के बाद से उसे ही मूलमंत्र माना और सरकार की योजनाओं जैसे आम गरीबों के लिए जनधन खाता, छोटे किसानों के लिए पीएम किसान सम्मान निधि या फिर स्वाथ्य के लिए आयुष्मान भारत और गरीब महिलाओं के लिए उज्जवला योजना पर ध्यान केंद्रित किया। इस बात को देखना दिलचस्प है कि पार्टी की अंत्योदय की विचारधारा पार्टी और बीजेपी के नेतृव वाली सरकार की अग्रणी गति बनी रही और दीन दयाल उपाध्याय अग्रणी राष्ट्रीय प्रतीक बन चुके है।

एक ध्यान देने वाली बात ये भी है कि जनसंघ से लेकर आज की बीजेपी तक जिन वादों को हमेशा पार्टी के मेनिफेस्टो में शामिल किया गया उनके पूरे होने का चक्र भी तेजी से घूम है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान जिस कश्मीर की धारा 370 के लिए हुआ आज वो प्रावधान ध्वस्त हो चुका है। राम मंदिर आंदोलन ने जिस 2 सांसदों वाली पार्टी को सत्ता में काबिज करवाया उस मंदिर की स्थापना का रास्ता अदालत के ज़रिए भी साफ हो गया। ‘पार्टी विथ ए डिफरेंस’ के साथ साथ ‘मोदी है तो मुमकिन है’ पार्टी में
अब नारा बन चुका है। शायद यही वेवजह है कि पार्टी विथ आ डिफेरेंस में जनता का विश्वास 2014 के बाद 2019 में कायम रहा और बीजेपी न सिर्फ केंद्र की सत्ता में दूसरी बार आई बल्कि 18 राज्यो में सरकार भी स्थापित की।

J P Nadda was elected unopposed as the BJP national president (Twitter image)

J P Nadda was elected unopposed as the BJP national president (Twitter image)

बीजेपी के राज्य सभा सांसद और प्रखर वक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राज्य सभा टीवी से बातचीत में कुछ ऐसी ही बात कही। उन्होंने कहा कि अंत्योदय, राष्ट्रवाद और सुशाशन के बल पर बीजेपी की 4 दशको की विकास यात्रा क्रमिक और नैसर्गिक है। उनका कहना है कि व्यक्ति निर्माण भारतीय जनता पार्टी की पहचान है और भारतीय लोकतंत्र में अटल बिहारी वाजपेयी और नरेन्द्र मोदी ही ऐसे प्रधानंत्री हुए जिन्हें जनता ने उनके चुने जाने से पहले देश के नेतृव के लिए उपयुक्त माना और बाद में चुनकर भी लाई।

प्रधानमंत्री ने कार्यकर्ताओं से आज की बातचीत में ये भी कहा कि ‘जन संघ से लेकर बीजेपी की स्थापना तक, संसद में दो सदस्यों वाली पार्टी से लेकर 300 से ज्यादा सांसदों के लिए मिले आशीर्वाद तक श्रद्धेय डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी, श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी, श्रद्धेय सुंदर सिंह भंडारी जी, आदरणीय कुशाभाऊ ठाकरे जी जैसे मनीषी महापुरुषों ने हमें राष्ट्र प्रथम का आदर्श दिया है। और उस आदर्श को आसमान की ऊँचाई तक ले जाने का समय है।’

बीजेपी भले ही 1980 में बनी लेकिन इससे पहले ही 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर भारतीय जनसंघ बनाया था। अटल बिहारी वाजपेयी साल 1980 में भारतीय जनता पार्टी बनी तो उस वक्त अटल बिहारी वाजपेयी पार्टी के अध्यक्ष बने। 1984 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी पहली बार चुनाव लड़ी। इस चुनाव में बीजेपी के खाते में महज दो सीटें आई, लेकिन इस हार से बीजेपी को रास्ता बदलने पर मजबूर होना पड़ा। 1986 तक बीजेपी के अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी रहे और जिसके बाद पार्टी की कमान कट्टर छवि वाले लालकृष्ण आडवाणी को सौंपी गई। उन्होंने बीजेपी को हिंदुत्व के रास्ते पर ले जाने का फैसला किया। इसके बाद रास्ता खुद ब खुद बनता चला गया। पालमपुर में बीजेपी के राष्ट्रीय अधिवेशन में 1988 में अयोध्या मुद्दे को पार्टी के एजेंडे में शामिल किया गया। 1989 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 2 से बढ़कर 85 सीटों पर पहुंच गई। इस तरह वो देश की दूसरे नंबर की पार्टी बन गई। 1991 का चुनाव बीजेपी ने राम मंदिर के मुद्दे पर लड़ा और उसने 120 सीटें जीत लीं। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी 1998 में 13 महीने की सरकार बनाने में कामयाब रही और अगले चुनाव में अपने संगठन कौशल से तमाम उबड़ खाबड़ रास्तों को पार करते हुए 5 साल सरकार चलाई। लेकिन 2014 ने बीजेपी और नरेंद्र मोदी को पूरे राष्ट्रीय फलक पर स्थापित किया और ये भी देखने को मिला कि पूर्ण बहुमत, मज़बूत पार्टी संगठन के साथ इच्छाशक्ति हो तो बेहद बड़े और फैसलों को लिया जा सकता है। इन कड़े और बड़े फैसलों के लिए जाने का सिलसिला जारी है और पार्टी इस वक़्त अपने मज़बूत नेतृव पर गर्व कर रही है।