भाषाओँ के सेतु

Sandeep Yash

International Translation Dayआज अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस है। 24 मई 2017 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस तारीख को ये मान्यता दी थी।  लक्ष्य था राष्ट्रों को जोड़ने, शांति, परस्पर समझ और विकास को बढ़ावा देने में भाषा पेशेवरों की भूमिका को इंगित करना।  इस पहल में 1953 में स्थापित इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ ट्रांसलेटर्स (FIT) का बड़ा योगदान रहा। अनुवाद को मान्यता दिलाने के लिए इस संस्था ने 1991 से मुहिम छेड़  रखी थी।

इस बरस की थीम “संकट में दुनिया के लिए शब्द खोजना” कोविड काल को दर्शाती है। महामारी से जूझ रही दुनिया में विभिन्न भाषा समूहों के बीच संवाद और संचार बनाये रखने का एहम काम पेशेवर अनुवादक, दुभाषिये और टर्मिनोजिस्ट कर रहे हैं।

अनुवाद क्यों महत्वपूर्ण है

यूनेस्को के मुताबिक़ सांस्कृतिक विरासत, स्मारकों और संग्रहालयों पर आकर खत्म नहीं हो जाती।  इसमें अमूर्त सांस्कृतिक विरासत जैसे ज्ञान, विश्वास, परम्पराएं  प्रकृति और मानवीय संबंधों की समझ भी शामिल है। अनुवाद हमारी बदलती दुनिया में इन्हें बढ़ने में मदद करता है।

अनुवादक शब्दों के रथ के सारथी हैं जो किसी भी संस्कृति को उजाले में लाते हैं। मसलन, जेम्स प्रिन्सेप जिनका खरोष्ठी और ब्राम्ही लिपि पर काम प्राचीन भारत पर नयी रौशनी डाल गया

भाषा और संस्कृति को अलग नहीं किया जा सकता है। विभिन्न सांस्कृतिक दृष्टिकोणों को समझने के लिए भाषा अनुवाद ज़रूरी है।

यूनेस्को के मुताबिक़ दुनिया भर में बोली जाने वाली 6700 भाषाओं में से लगभग 40% के खत्म होने का खतरा है। अनुवाद इनकी संजीवनी है

व्यापार, युद्ध और जलवायु परिवर्तन जैसे अंतराष्ट्रीय कूटनीतिक मसलों में अनुवादक, भाषा विशेषज्ञ के तौर पर योगदान देते हैं

इस विषय के महत्त्व को देखते हुए दुनिया भर की यूनिवर्सिटियों, शिक्षण संस्थानों और अनुवाद संस्थाओं में सेमिनार, कार्यशालाएं आयोजित होती हैं

अनुवाद की दुनिया से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

अनुवादक हर बरस लगभग 750,000 शब्दों का अनुवाद करते हैं

“अनुवाद” शब्द का मूल स्त्रोत संस्कृत हैं पर translatio शब्द लैटिन भाषा से आया है। इसका मतलब “एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना” है

Google पर सबसे अधिक अनुवादित शब्द “सुंदर” है। फिर सहकर्मी, अच्छा, काम, गुरुवार और मामा जैसे शब्द आते हैं

पंचतंत्र का अनुवाद 15 भारतीय और 40 विदेशी भाषाओं में हुआ है

इतिहास का पहला अनुवाद ”दी एपिक ऑफ़ गिलगमेश” था। अनुवादकों ने क्यूनीफॉर्म लेखन शैली का इस्तेमाल करते हुए सुमेरियन भाषा में लिखा था

FIT के मुताबिक़, अनुवाद आज लगभग 40 अरब डॉलर का उद्योग हैं। इस पेशे से 100 संस्थाओं के माध्यम से 55 देशों में करीब 80 हज़ार पेशेवर अनुवादक जुड़े हैं

International Declaration of Human Rights सबसे अधिक अनुवादित दस्तावेज़ है जो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज़ है।  यह 500 से अधिक भाषाओं में मौजूद है

संयुक्त राष्ट्र बड़ी संख्या में भाषा पेशेवरों को रोज़गार देता है

भारत में
भारतीय भाषाओँ के बीच पसरे डिजिटल डिवाइड को खत्म करने के लिए भारत सरकार ने 1991 में Technology Development for Indian Languages की स्थापना की थी। इसका लक्ष्य स्थानीय भाषाओं में आईटी टूल्स विकसित करना था।

भारतीय भाषाओँ में सामग्री जुटाने के लिए पी वी नरसिम्हा राव सरकार के दौर में एक ”विशेष कोष” बनाया गया था
13 जून, 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री को ज्ञान व्यवस्था संरक्षण पर सलाह देने के लिए राष्ट्रीय ज्ञान आयोग का गठन हुआ

2008 में राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सिफारिश पर भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर के तहत राष्ट्रीय अनुवाद मिशन (National Translation Mission) बना
– इसका मक़सद अनुवाद को एक उद्योग के रूप में स्थापित करना है
-,अनुवाद कर छात्रों एवं शिक्षकों को भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा से जुडी किताबें मुहैया कराना है
– मिशन का दूरदर्शी उद्देश्य भाषिक बाधाओं को पार कर एक ज्ञान आधारित समाज की तरफ बढ़ना है
– भारतीय संविधान की आठवें शेड्यूल से जुडी 22 भाषाओं का अनुवाद के माध्यम से प्रचार- प्रसार करना है

सी-डेक, पुणे के एप्लाइड आर्टिफिशियल इंटैलीजेंस ग्रुप ने मंत्र-राज भाषा अनुवाद सॉफ्टवेयर सिस्टम विकसित किया है।  ये सिस्टम  प्रशासनिक, वित्तीय, कृषि, लघु उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य रक्षा, शिक्षा एवं बैंकिंग क्षेत्रों के दस्तावेजों का अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद करता है

आकड़ों के मुताबिक़, भारत में करीब 19 हज़ार पुस्तक प्रकाशक है जो सालाना लगभग 90 हज़ार पुस्तकें प्रकाशित करते हैं। इनमे से बड़ी संख्या अनुवादित पुस्तकों की होती है

भारत में अनुवाद उद्योग में प्रकाशन, डीटीपी, कंटेंट क्रिएशन, ट्रांसलेशन, आईटी लोकलाइजेशन वगैरह शामिल है

वर्तमान में – असमिया, बांग्ला, गुजराती, हिंदी, कोंकणी, मराठी, मलयालम, नेपाली, पंजाबी, तेलुगू और तमिल भाषाओँ में अधिक अनुवाद हो रहे हैं

2016 में एक संसदीय समिति की अनुशंसाओं बाद सरकार इस वर्ग के विकास पर ख़ास ध्यान दे रही है

चलते चलते
तो कह सकते हैं कि अनुवाद एक अनूठी कला है और अनुवादक एक लेखक जिसकी सेवाओं की महत्ता आज संचार, संवाद के युग में बखूबी समझी जा सकती है