भूकंप से जूझते नेपाल पर मौसम की मार, राहत कार्य प्रभावित

Vimal Chauhan

earthquake_reliefज़बरदस्त भूकंप के बाद खुद को संभालने की कोशिशों से जूझता नेपाल अब मौसम की मार भी झेल रहा है. बारिश ने राहतकार्यों की कमर तोड़ दी है और ध्वस्त इमारतों में फंसे घायलों और मृत लोगों को निकालना और भी कठिन होता जा रहा है.

इतना ही नहीं, अन्य देशों से आ रही राहत सामग्री और देश में ज़मीन और आसमान के ज़रिए लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने का काम खराब मौसम के चलते बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

सबसे ज़्यादा चिंता उन जगहों को लेकर है जो कि अंदरूनी ग्रामीण इलाकों में हैं क्योंकि टूटे रास्तों और बाधित बचाव कार्यों के चलते इन इलाकों में लोगों की तकलीफ और भी बढ़ने जा रही है.

शनिवार को आए भूकंप में नेपाल में साढ़े तीन हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. अभी कितने ही लोगों को निकालने का काम बाकी है. सबसे बड़ी चुनौती अबतक मलबे में फंसे घायलों को निकालना है और साथ ही मृतकों के शवों को निकालकर उनका अंतिम संस्कार करना है ताकि उनको सड़ने से और महामारी फैलने से रोका जा सके.

शनिवार को भयानक भूकंप के बाद रविवार को आए झटकों ने नेपाल में स्थिति को और भयावह बना दिया था. लोग डर की वजह से सड़कों और तंबुओं में समय बिताने के लिए मज़बूर हैं. नेपाल में अब भी आपात की स्थिति बनी हुई है.

कई देशों ने नेपाल की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है जिसमें भारत सबसे आगे है, लेकिन खराब मौसम और भूकंप के झटकों की वजह से राहत काम में काफी मुश्किलें आ रही हैं. स्थानीय लोगों ने सरकार पर मदद न करने का भी आरोप लगाया है.

भारत ने नेपाल में राहत कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाते हुए एनडीआरएफ, डॉक्टरों की टीम, दवाईयां, खाद और रसद नेपाल भेजी. रविवावार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के दुख को भारत का दुख बताते हुए हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया. सराकर ने सेना की मदद से नेपाल में फंसे 1300 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया है.

नेपाल में राहत कार्यों की जानकारी देते हुए एनडीआरएफ के महानिदेशक ओ पी सिंह ने बताया कि काठमांडू घाटी में हमारी 10 टीमें राहत कार्यों में जुटी हैं और हमने एक टीम भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए काठमांडू हवाई अड्डे पर लगाई है.

खराब मौसम की वजह से राहत कार्यों में दिक्कतों का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि हम काठमांडू के बाहर प्रभावित लोगों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन खराब मौसम की वजह से बचाव कार्यों में दिक्कत पैदा हो रही है.

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अब तक भूंकप के 55 झटके महसूस किये जा चुके हैं. आखिरी बार रविवार रात 9:56 पर झटका महसूस किया गया जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.3 आंकी गई. वैज्ञानिकों ने अभी और झटके आने की आशंका जताई है.

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के प्रमुख रामेश्वर दंगल के अनुसार इस भूकंप से नेपाल के भीतर भारत के पांच नागरिकों की मौत हुई है. इसमें भारतीय दूतावास के अधिकारी की बेटी भी शामिल है.

खराब मोबाइल नेटवर्क और बिजली की कटौती ने लोगों की दिक्कतें और बढ़ा दी हैं. हालांकि लगातार हो रही बारिश के रुकने से कई जगह खाद सामग्री की दुकानें खुली जिससे लोगों को राहत मिली है, लेकिन लोगों के लिए मुसीबतें बनी हुई हैं.

नेपाल सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए स्थानीय नागरिकों ने कहा कि उन्हें सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही है, हम सब अपने आप ही सब चीजों की व्यवस्था कर रहे हैं.

काठमांडू हवाई अड्डे पर भी हफरातफरी का माहौल बना हुआ है. कई फ्लाइटें रद्द होने के चलते यात्री हवाई अड्डे पर फंसे हुए हैं. रविवार दोपहर भूंकप के झटकों की वजह से काठमांडू हवाई अड्डे पर सेवाएं बंद करनी पड़ी थी. केवल एक प्रावइट फ्लाइट देशी और विदेशी पत्रकारों को लेकर 9 घंटों बाद काठमांडू पहुंच पाई थी.