भूमि अधिग्रहणः सदन में भारी पड़ रहा है अल्पमत विपक्ष

Shyam Sunder

modi_narendra2केंद्र सरकार ने विपक्ष के भारी विरोध की बीच मंगलवार को भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया.

सरकार के इस कदम के विरोध में कांग्रेस सहित सभी विपक्षी पार्टियों ने वॉकआउट किया. इन पार्टियों ने सरकार पर किसान और ग़रीब विरोधी होने का आरोप लगाया.

हांलाकि सरकार की तरफ से कहा गया कि वो इस मसले पर विस्तार से चर्चा को तैयार है. राज्यसभा टीवी से ख़ास बातचीत में ग्रामीण विकासमंत्री बिरेंदर सिंह ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि विपक्ष और किसान संगठनों के सुझाव बिल में शामिल कर लिए जाएं.

16वीं लोकसभा में शायद ये पहला मौक़ा था जब पूरा विपक्ष सरकार का विरोध कर रहा था लेकिन इस विरोध और शोरशराबे के बीचे ग्रामीण विकास मंत्री बिरेंद्र सिंह ने भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक सदन में पेश कर दिया.

इसके विरोध में कांग्रेस, वामदलों, समाजवादी पार्टी, टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस, बीजू जनतादल, तृणमूल कांग्रेस और सरकार की सहयोगी पार्टी स्वाभिमानी शेतकारी संगठन ने सदन से वॉकआउट किया.

विपक्ष का कहना था कि ये विधेयक किसान और ग़रीब विरोधी है. वॉकआउट करने से पहले मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “सरकार ने इस बिल को स्थाई समिति को भेजने से मना कर दिया और इस बिल को थोपने की कोशिश की जा रही है. ये किसान विरोधी बिल है, किसान इसका विरोध कर रहे हैं हर जगह विरोध हो रहा है हम विरोध में वॉकआउट करते हैं.”

तृणमूल कांग्रेस की तरफ से सौगत रॉय ने अपना एतराज़ दर्ज करते हुए कहा कि यह बिल पूरी तरह से किसानों और ग़रीबों के विरोध में है और उनकी पार्टी पूरी ताक़त से इस बिल का विरोध करते हैं.

बीजेपी की सहयोगी पार्टी शेतकारी संगठन के नेता राजू शेट्टी ने इस बिल का ज़ोरदार विरोध किया. उन्होंने कहा, “अगर ये बिल पास होता है तो देश का किसान सरकार को कभी माफ़ नहीं करेगा.”

सरकार ने भूमि अधिनियम में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए अध्यादेश जारी किया था जिसमें पांच क्षेत्रों के लिए भूमि अधिग्रहण करते समय किसानों की रजामंदी के प्रावधान हटा दिए गए थे. ये पांच क्षेत्र- औद्योगिक कोरिडोर, पीपीपी परियोजानाएं, ग्रामीण ढांचा, सस्ता आवास और रक्षा क्षेत्र हैं. विपक्ष का कहना है कि अगर ये संशोधन मंजूर हो जाते हैं तो भूमि अधिग्रहण क़ानून का उद्देश्य ही ख़त्म हो जाएगा.

बीजू जनतादल नेता भृतहरि महताब ने भी अपनी पार्टी की तरफ से इस बिल का विरोध किया.

सरकार की तरफ से कहा गया कि वो इस बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष के संशोधन और सुझावों पर विचार के लिए तैयार है. संसदीय कार्यमंत्री वैंकया नायडू ने विपक्ष पर बहुमत का अपमान करने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, “इस बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष अपने संशोधन और सुझाव दे सकता है, हम उसका स्वागत करेंगे. लेकिन अल्पमत की पार्टी बहुमत पर अपनी इच्छा थोप नहीं सकती.”

बीजेपी की मुश्किल ये है कि ना सिर्फ़ इस बिल को पास कराने में उसे संसद में कठनाई है बल्कि उसकी असली चिंता ये है कि कहीं उसकी छवि किसान विरोधी न बन जाए. वैसे भी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद काफी नर्वस नज़र आ रही है.