मंडी में सस्ता हुआ प्याज़, लेकिन आम आदमी के पहुंच से अब भी बाहर

RSTV Bureau

Onion-price-Delhiमहाराष्ट्र के लासलगांव में स्थित एशिया की सबसे बड़ी प्याज़ मंडी में प्याज की कीमतें 50 रुपये प्रति किलो से नीचे हो गई हैं. हालांकि बीते दिनों प्याज़ की बढ़ती कीमतों से परेशान जनता के लिए राहत अभी भी दूर है.  मंडी में प्याज़ के दाम गिरने के बावजूद खुदरा बाज़ार में प्याज़ अभी भी 80 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है.

पिछले कुछ दिनों में प्याज़ के दामों में 40 से 50 फ़ीसद का उछाल आया है. थोक बाज़ार में प्याज़ के दाम गिरने की मुख्य वजह प्याज़ की बढ़ती कीमतों को काबू करने के लिए सरकार का हरकत में आना है. सरकार ने प्याज़ के दामों को कम करने के लिए प्याज़ के निर्यात में कमी और जमाखोरों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के निर्देश दिये हैं.

दिल्ली के आज़ादपुर सब्जी मंडी में भी प्याज़ के दामों में 3 से 5 रूप्ये की गिरावट देखी गई और प्याज़ कि कीमत 53 रुपये किलो तक जा पहुंची, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक से आई नई फ़सल की खेप को प्याज़ के दामों में कमी का कारण माना जा रहा है.

बिना काटे ही रूलाने वाले प्याज़ की बढ़ती कीमतों की थोक बाज़ार में कमी से ये माना जा सकता है कि आने वाले दिनों में शायद प्याज़ की कीमतें खुदरा बाजार में भी कम होंगी जिससे आम जन मानस को राहत मिलेगी.

एनएचआरडीएफ के मुताबिक देश भर में प्याज़ की किमतों को निर्धारित करने वाली महाराष्ट्र की लालसंगाव प्याज़ मंडी में मंगलवार को प्याज़ का भाव 47.5 रुपये किलो रहा जो कि पिछले हफ्ते के 57 रुपये से 9.5 रुपये प्रति किलो कम है.

नासिक के बड़े प्याज़ व्यापारी के मुताबिक किसान अब प्याज़ को बेचने के लिए मंडी तक ला रहे हैं जिसकी मुख्य वजह सरकार द्वारा प्याज़ की मूल्य वृद्धि पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से प्याज का न्यूनतम निर्यात मूल्य 425 डालर से बढ़ाकर 700 डालर प्रति टन करना है. इसके साथ-साथ जमाखोरों के खिलाफ सरकार द्वारा सख्त कार्यवाही भी इसकी एक वजह है.

प्याज़ की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र सरकार को जमाखोरों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने को कहा था.

बीते कई दिनों से प्याज़ की बढ़ती कीमतें जनता की थाली के स्वाद को खराब कर रही हैं जिसका मुख्य कारण प्याज पर मौसम की मार और बिचौलियों की करामात को माना जा रहा है. थोक और खुदरा बाजार में 5 लाख टन प्याज़ की कमी के करण भी प्याज़ की कीमतें बेताहशा बढ़ती रही. कम बारिश के चलते इस बार खरीफ फ़सलों का उत्पादन भी प्रभावित रह सकता है.