माहौल बनाये रखिये

Sandeep Yash
Lockdown in India amid Coronavirus Outbreak (File Photo)

Lockdown in India amid Coronavirus Outbreak (File Photo)

अप्रैल14, 2020 को राष्ट्र के नाम दिए गए सम्बोधन में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ़ कहा कि कोरोना महामारी के चलते पैदा हुए हालातों का गरीब भाइयों और बहनों की आजीविका पर असर और मुश्किलें उनके  संज्ञान में है।  और ये कि प्रवासी और दैनिक कमाई पर निर्भर रहने वाले मजदूर उनके बृहद परिवार का हिस्सा हैं। उनकी भावना थी कि लाक्डॉन की मार से गुज़र रहे इस कमज़ोर तबके को तत्काल राशन और धन पहुंचाया जाए – तो सामग्री है और संसाधन भी, पर इन तक ये मुकम्मल तौर पर पहुचायी कैसी जाये, ये सवाल था। क्यूंकि रिपोर्ट्स के मुताबिक़ भारत में प्रवासी मजदूरों की “अनौपचारिक क्षेत्र” में लगभग 80 फ़ीसदी हिस्सेदारी है। देश के आधारभूत ढांचे की बुनाई में इनका अतुल्य योगदान है। ये तबका  सड़क, पुल  बांध, फैक्ट्री के साथ साथ मॉल, मल्टीप्लेक्स, अस्पताल, अपार्टमेंट ब्लॉक, होटल का निर्माण करता है, डिलीवरी बॉय, लोडर, कुक, पेंटर, रिक्शा चालक के रूप में काम करता है। और साथ ही पूरे दिन सड़क के किनारे खड़े होकर फल, सब्जियां, चाय और फूल भी बेचता है। ILO की 2018 रिपोर्ट के मुतबिक प्रवासी श्रमिकों का बड़ा तबका उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिल नाडु, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना से आता है।यानी ये तबका अलग अलग क्षेत्रों में बिखरा है।

तो विशेषज्ञों के मुताबिक़, सरकार के पास इस तबके तक इमदाद पहुंचने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसे ठोस विकल्प हैं। ये योजना 1 जनवरी,2013 में शुरू हुई थी। इसका मक़सद भारत सरकार द्वारा विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजना था।  इस प्लेटफार्म पर आज 55 मंत्रालयों से जुड़ीं 440 योजनाएँ शामिल हैं। NDA 2 के दौरान इस पहल को ज़रूरी धार मिली जैम (JAM) से यानि (जन धन, आधार और मोबाइल्स) से। वित्त मंत्रालय के तहत आती इस त्रिमूर्ति ने DBT को तकनीकी प्लेटफार्म देकर देश में लाभ वितरण प्रणाली में काफी सुधार किया है, वित्तीय समावेशन के विराट लक्ष्य को उर्जित किया है। 2014-15 के आर्थिक सर्वेक्षण ने तो JAM को एक गेम चेंजर घोषित किया जो न सिर्फ भ्रष्ट दलालों को दरकिनार करता है बल्कि बाजार की विकृतियों को कम करता है। जेएएम वित्तीय रिसाव को कम कर सरकार को अधिक राजकोषीय स्थान यानी fiscal space देता है। निष्क्रिय निधि यानी idle funds को ट्रिम करने में सरकार की मदद  करता है। JAM ने अनुमानतः अप्रैल 2016 तक अकेले रसोई गैस पर लगभग 17,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी बचाई गई थी। 2018-19 में, DBT के मार्फ़त सरकारी खजाने को करीब 40,000 करोड़ रुपये तक की बचत हुई। इतना ही नहीं, इस योजना ने ग्रामीण आबादी को बचत की अवधारणा से परिचित कराया जिसके चलते देश में सोने के आयात में कमी आई है।

आपकी जानकारी के लिए

J -वित्त मंत्रालय के मुताबिक़ 1 अप्रैल, 2020 तक प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 38 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं जिनमें 80% चलन में हैं
A -UIDAI के मुताबिक़ दिसंबर, 2019 तक देश में 1. 25 करोड़ नागरिकों को आधार नंबर मिल चुका है जो सम्पूर्ण आबादी का लगभग 90 फ़ीसदी है
M -PMJDY के मुताबिक़ 33 करोड़ से भी ज़्यादा लोगों ने जन-धन योजना के तहत मोबाइल फोन-आधारित खाते खोले हैं

फिलहाल पिछले महीने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लाक्डॉन से होने वाली वित्तीय कठिनाइयों से संघर्षरत गरीबों की मदद के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की। ये मुख्य रूप से प्रवासी मजदूरों और दिहाड़ी मजदूरों पर केंद्रित था। लक्ष्य साफ़ था कि कोई भी भूखा नहीं रहेगा। पैकेज में खाद्य सुरक्षा और प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण लाभ शामिल हैं जो संकट में इन गरीब परिवारों को संजीवनी देते हैं। ये मदद DBT के चैनल से हो रही है

तो इस तरह DBT -किसानों, मनरेगा श्रमिकों, गरीब विधवाओं, पेंशनरों और दिव्यांगों, जन धन योजना खातों, उज्ज्वला योजना के तहत बीपीएल परिवारों, स्व-सहायता महिला समूहों, ईपीआरओ संगठित श्रमिकों, निर्माण श्रमिकों और जिला खनिज श्रमिकों को सुरक्षा कवर देने में बेहद एहम भूमिका निभा रहा है।

प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो के मुताबिक़ सरकार ने संकट के इस दौर में अब तक डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से

-32,000 से अधिक गरीब लोगों को प्रधान मंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत  29,352 करोड़ रुपयों की वित्तीय सहायता दी है
-5.29 करोड़ लाभार्थियों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मुफ्त राशन वितरित किया गया
-97.8 लाख लाभार्थियों को मुफ्त उज्ज्वला सिलेंडर दिए गए
-2.1 लाख सदस्यों को ईपीएफओ खाते से ऑनलाइन निकासी का लाभ दिया गया
-PM-KISAN की पहली किस्त के 14,946 करोड़ रुपये, 7.47 करोड़ किसानों के खातों में ट्रांसफर किये गए
-19. 86 करोड़ महिला जन धन खाता धारकों को 9930 करोड़ रु वितरित किये गए
-लगभग 2.82 करोड़ वृद्धों, विधवाओं और विकलांग व्यक्तियों को 1400 करोड़ रु वितरित किये गए
-2.17 करोड़ भवन निर्माण श्रमिकों को 3071 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गयी

ऐसे प्रयास फलीभूत हों, वित्तीय सहायता सही समूह को सही वक़्त पर पहुंचे, इसकी निगरानी के लिए सरकार ने श्रम मंत्रालय के तहत 20 कण्ट्रोल रूम्स /कॉल सेंटर्स भी बनाये हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक़ इन समूहों के अलावा करदाताओं का तबका भी सरकार से मदद की आस लगाए था। माहौल की संजीदगी को समझते हुए सरकार ने 23 मार्च को राहत की घोषणा की जिसके तहत

– व्यापारिक संस्थाओं और व्यक्तिगत करदाताओं को तत्काल राहत देते हुए 5 लाख रुपये तक के सभी लंबित आयकर रिफंड जारी करने का निर्णय लिया गया। जिसका लाभ लगभग 14 लाख करदाताओं को हुआ।
– इसके साथ ही सभी लंबित जीएसटी और कस्टम रिफंड जारी करने का भी निर्णय लिया गया। इस कदम से एमएसएमई सहित लगभग 1 लाख व्यापारिक संस्थाओं को मदद मिली। रिफंड की धनराशि लगभग 18,000 करोड़ रु रही
– वित्तीय वर्ष 18-19 से 30 जून 2020 तक के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की 31 मार्च की समय सीमा बढ़ा कर 30 जून की गयी। भुगतान में देरी के लिए ब्याज दर 12% से घटाकर 9% कर दी गई ।
– PAN-Aadhaar लिंकिंग और ‘विवाद से विश्वास’ योजना की समय सीमा भी 30 जून तक बढ़ाई गयी।
– आयकर अधिनियम, धन कर अधिनियम, बेनामी लेनदेन अधिनियम, काला धन अधिनियम के तहत सभी अनुपालन 30 जून, 2020 तक बढ़ा दिए गए।
– करदाताओं द्वारा सभी अनुपालन 30 जून, 2020 तक बढ़ा दिए गए हैं।

कहावत है कि तैयारियों का इम्तेहान तो संकट की घडी में होता है। आज DBT, PMJDY और JAM जैसी योजनाएं इस कठिन इम्तेहान में खरी उतर रही हैं और सरकार के वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को ठोस तरीके से आगे बढा रही हैं। जानकार कहते हैं कि ये संकट में संतुलन की घडी है। सरकार के सामने फिलहाल तमाम विकट चुनौतियाँ हैं – एक तरफ महामारी को ख़त्म करना है, नागरिकों की जाने बचानी है तो दूसरी ओर पसरती अर्थव्यवस्था को ऑक्सीजन  भी देना है। ये ऐसे निर्णय लेने की भी घडी है जो कुनैन जैसे कसैले भी हो सकते हैं पर अंततः देश और समाज के लिए संजीवनी साबित होंगे। तो देश के पास संयम है और सरकार के पास संसाधन -ये दौर भी देखते देखते गुज़र ही जायेगा,  रह जायेंगे तो संकल्प, हिम्मत और जुझारूपन के किस्से।  जैसा कि शायर तारिक़ बदायुनी कहते हैं ‘ इक न इक शमा अँधेरे में जलाए रखिए , सुबह होने को है माहौल बनाए रखिए’.