ये भी लिखा जायेगा -पार्ट 2

Sandeep Yash
File photo: Healtworkers urging people to stay at home to fight against Corona

File photo: Healtworkers urging people to stay at home to fight against Corona

कोरोना वायरस का इलाज ढूढ़ने में तमाम प्रवासी भारतीय संगठन सक्रिय हैं। चलिए आज जानते हैं AAPI के बारे में।  AAPI यानी अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडियन ओरिजिन। इसकी स्थापना 1982 में अमरीका में हुई। आज ये संस्था एक लाख से ज़्यादा डॉक्टर्स का प्रतिनिधित्व करती है। AAPI के अध्यक्ष डॉ सुरेश रेड्डी के मुताबिक़ अमेरिका में हर 7 वां डॉक्टर एक भारतीय है जो एक सैनिक की तरह कोरोना वायरस के खिलाफ फ्रंटलाइन पर डटा हुआ  हैं। भारतीय मूल के डॉक्टर्स निजी पहल पर इस देश में उभरे हॉटस्पॉट्स और पिछड़े ग्रामीण इलाकों में बड़ी तादाद में सेवाएं दे रहे है

आज के दौर में डॉक्टरों की सुरक्षा सर्वोपरि है। AAPI ने इस सच्चाई को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा उपकरणों की खरीद के लिए $ 100,000 या करीब 76 लाख रुपये जुटाए हैं। इतना ही नहीं, ये संस्था वेबिनार और हॉटलाइन के ज़रिये प्रवासी समुदाय और भारत से आने वाले उन छात्रों और अभिभावकों की मदद कर रही है जिनके पास स्वास्थ्य बीमा नहीं है और जिनको दवाओं के लिए पर्चे नहीं मिल सकते।

पर जंग तो फिर जंग है, उसकी कीमत भी चुकानी पड़ती है। ऐसे दर्जनों भारतीय-अमेरिकी चिकित्सक हैं जो काम के दौरान संक्रमित हो गए। कुछ की मृत्यु हो गई है। कुछ आईसीयू में हैं और कुछ घर पर quarantined हैं। तो ऐसी जानलेवा चुनौतियों के सामने ये वर्ग व्यक्तिगत जोखिम उठा कर काम कर रहा हैं। ये  इसकी करुणा, प्रतिबद्धता और कर्तव्य की भावना को इंगित करते है। याद हमें डा माधवी अया, डा रजत गुप्ता, डा प्रिया खन्ना और इनके पिता डा सत्यदेव खन्ना जैसे यायावरों को भी रखना है जिन्होंने इस कठिन दौर में फ़र्ज़ को जीवन से ऊपर माना और मानवता के लिए अपने प्राणो की बलि दी। आपकी जानकारी के लिए अमरीका में सबसे ज़्यादा संक्रमण के मामले न्यू यॉर्क और न्यू जर्सी जैसे इलाकों में हुए हैं।

आज अमेरिकी सरकार समेत सारे नागरिक भारतीय मूल के चिकित्सकों की मेधा और समर्पण की प्रशंसा कर रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए ये तबका अमेरिकी चिकित्सक वर्ग का कुल 10 % है पर इस देश के 30 % मरीज़ों की देखभाल करता है। फिलहाल AAPI के अध्यक्ष डा रेड्डी के मुताबिक़ इस आपदा ने अमरीका को आत्मनिर्भर बनने का कडा सबक दिया है। सनद रहे कि इस विपदा के चलते उसे PPE,मास्क और वेंटिलेटर्स के लिए चीन की तरफ दौड़ लगानी पड़ी थी और इसमें काफी वक़्त और ज़िंदगियाँ जाया हुई। ये रिपोर्ट लिखते वक़्त यहाँ 76 हज़ार से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं। और ये वाकया अन्य देशों के लिए गंभीर चेतावनी सरीखा है।

अमेरिका की तरह, ब्रिटेन में भी भारतीय मूल के डॉक्टरों की एक बड़ी संख्या है।  इनकी संस्था का नाम BAPIO है यानी British Association of Physicians of Indian Origin (BAPIO) पिछले कुछ दशकों में तमाम भारतीय डॉक्टर और नर्स यूके चले गए। ये तबका दूरदराज के उन क्षेत्रों में सेवा करने गया जहां ब्रिटिश डॉक्टर जाने से मना करते थे। आज भारतीय मूल की दूसरी और तीसरी पीढ़ी के डॉक्टरों ने इमरजेंसी चिकित्सा और पल्मोनरी रोगों जैसे जटिल क्षेत्रों में महारथ हासिल की है और कोविद 19 के खिलाफ छिड़ी जंग में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। इस जंग में इनका साथ कंधे से कन्धा मिला कर दे रही हैं भारतीय मूल की नर्सें – ये नर्सें जीवन रक्षण, मरीज़ों की देखभाल, उनके परिवारों से संपर्क और उनसे जुड़े आइसोलेशन तथा सोशल डिस्टन्सिंग के प्रोटोकॉल पर मजबूती से काम कर रही है।

इतना ही नहीं, आपदा के बढ़ते प्रकोप के चलते ब्रिटैन में डॉक्टर्स की कमी भी हो चली है। नतीजतन, भारतीय मूल के रिटायर्ड हो चुके कई डॉक्टर्स फिर से स्थानीय नेशनल हेल्थ सर्विस से जुड़ कर अपनी सेवाएं भी दे रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए BAPIO ने इसी अप्रैल में एक ज़रूरी सर्वे किया था। इस सर्वे का मक़सद कोविद 19 का स्वास्थ्य क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना था। सामने आये नतीजों के मुताबिक़ अश्वेत, एशियाई और अल्पसंख्यक वर्गों को इस संक्रमण से सबसे ज़्यादा खतरा है। इसी सर्वे के आधार पर ब्रिटिश सरकार ने वर्गीय असमानता में कोविद 19 की भूमिका की समीक्षा शुरू की है। और साथ ही अस्पताल और कर्मचारियों का सामने पसरी सुरक्षा उपकरणों की कमी को दूर करने का संकल्प लिया है। आपकी जानकारी के लिए आज ब्रिटेन में BAPIO के सदस्यों की संख्या चालीस हज़ार से ज़्यादा है।

फिलहाल इस विषय पर ताज़ा खबर ये है कि दुनिया भर में फैले भारतीय मूल के 14 लाख डॉक्टर्स ने कोविद 19 के खिलाफ लामबंद होने का फैसला किया है।

इसके लिए बने प्लेटफार्म को Global Association of Physicians of Indian Origin (GAPIO).का नाम दिया गया है। इसी अप्रैल में गठित इस संगठन  के सदस्य हैं – American Association of Physicians of Indian Origin (AAPI), British Association of Physicians of Indian Origin (BAPIO), Canada India Network Society (CINS) और Canadian Association of Physicians of Indian Heritage (CAPIH).

इसका लक्ष्य कोविद 19 की
1 . रोकथाम और प्रबंधन रणनीति के लिए “क्रॉस सिस्टम लर्निंग” को विकसित करना
2 . टीकाकरण, नए diagnostic परीक्षण, वेंटिलेशन से जुडी नीति बनाना, जल्द चेतावनी तंत्र विक्सित करना, एंटीवायरल थेरेपी, प्लाज्मा थेरेपी को धार देना शामिल हैं

इस मिशन के प्रणेता और GAPIO के संस्थापक अध्यक्ष डा प्रताप रेड्डी कहते हैं कि मानवता इस वक़्त ऐसे तीसरे विश्व युद्ध सरीखे हालातों का सामना कर रही है जिन्होंने महज़ 100 दिन में 200 से ज़्यादा देशों को अपनी गिरफ्त में ले लिया। इतने विराट स्तर पर आयी चुनौती को सिर्फ एकता और सहयोग से परास्त किया जा सकता है, इसका ऐलान भी ये मिशन अप्रैल 11, 2020 को शाम 7 बजे हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कर चूका है। और सारी दुनिया एक बार फिर इस माहमारी का हल भारतीयों की मेधा में ढूंढ रही है जो उसे ज़रूर मिलेगा।

पार्ट 1