राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग विधेयक, 2020 पारित

Sandeep Yash
File photo: Parliament

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मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को लोकसभा ने राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग विधेयक, 2020 (National Commission for Homeopathy Bill, 2020) को पारित कर दिया। इससे पहले राज्य सभा ने इसी बरस मार्च में इसे हरी झंडी दिखाई थी। इस विधेयक को भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1956 (Indian Medical Council Act, 1956) की तर्ज पर बनाया गया है।

देखते हैं इसकी कुछ खासियतें –

– इसका मक़सद Homeopathy Central Council Act, 1973 में संशोधन कर National Commission for Homeopathy की स्थापना करना है।

– होम्योपैथी शिक्षा और प्रैक्टिस को असरदार बना कर राष्ट्रीय स्वास्थ्य लक्ष्यों को बढ़ावा देना है।

– चिकित्सा शिक्षा प्रणाली में सुधार कर देश भर में क्षमतावान होम्योपैथी चिकित्सकों की संख्या को बढ़ाते हुए इसकी सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाना है।
– होम्योपैथी चिकित्सकों को आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान का हिस्सा बनने और मेडिकल रजिस्टर रखरखाव की सुविधा देना है।

– बदलती जरूरतों के मद्देनज़र ये कानून, एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र (grievance redressal mechanism) सुनिश्चित करता है।

– ये विधेयक तयशुदा समय सीमा में चिकित्सा संस्थानों के मूल्यांकन की व्यवस्था करता है।

– इसमें तीन स्वायत बोर्डों का प्रावधान है-

1. होम्योपैथी शिक्षा बोर्ड

2. होम्योपैथी चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड

3. बोर्ड ऑफ एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन

National Commission for Homeopathy (NCH) में
– केंद्र सरकार द्वारा 20 सदस्य नियुक्त होंगे, जिनका कार्यकाल चार बरस तक हो सकता है।

– इन सदस्यों में -(i) चेयरमैन (ii) होम्योपैथी शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष (iii) होम्योपैथी चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड के अध्यक्ष (iv) महानिदेशक, राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान (v) होम्योपैथी, आयुष मंत्रालय के सलाहकार या संयुक्त सचिव (vi) चार सदस्य (अंशकालिक) जिन्हें रजिस्टर्ड होम्योपैथिक चिकित्सक चुनेंगे।

इस विधेयक के तहत तीन बरसों के भीतर राज्य सरकारों को राज्य चिकित्सा परिषदों की स्थापना करनी होगी।

NCH के कार्य
(i) नीतियां बना कर चिकित्सा संस्थानों, होम्योपैथिक डाक्टरों को विनियमित (regulate) करना

(ii) मानव संसाधनों और बुनियादी ढांचे की ज़रूरतों का आकलन करना

(iii) राज्य चिकित्सा परिषदों द्वारा नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना

(iv) स्थापित स्वायत्त बोर्डों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना

इस विधेयक में एक सलाहकार परिषद की भी बात है, जिसका गठन केंद्र सरकार द्वारा किया जायेगा।  इस परिषद के माध्यम से राज्य / केंद्र शासित प्रदेश अपने विचार और चिंताओं को रख सकेंगे। साथ ही ये परिषद, NCH को चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी मानकों को निर्धारित करने और बनाए रखने के उपायों पर भी सलाह देगी।

इस विधेयक में-

1. होम्योपैथिक शिक्षा से जुडी अंडर -ग्रेजुएट और पोस्ट -ग्रेजुएट परीक्षाओं का विनियमन शामिल है।

2. प्रैक्टिस के लिए लाइसेंस के नियमों को गढ़ने की बात है।

3. उन लोगों की पात्रता तय करने के प्रावधान हैं, जो होम्योपैथी शिक्षा को पेशे के रूप में लेना चाहते हैं ।

और आखिर में, शिकायतों को सुनने की व्यवस्था इस विधेयक का एहम हिस्सा है। इसके तहत स्टेट मेडिकल काउंसिल और बोर्ड ऑफ एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन को मेडिकल प्रैक्टिशनर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की शक्ति दी गयी है। इसमें मौद्रिक जुर्माना भी शामिल है।