लहलहाती शौर्य की फसलें यहां भरपूर हैं, कुछ तो इस मिट्टी में खासियत जरूर है।

Panchanan Mishra
Jammu: CRPF personnel stand guard on Jammu-Srinagar national highway on the eve of  73rd Independence Day celebrations, in Jammu,  Wednesday, Aug 14, 2019. (PTI photo)

Jammu: CRPF personnel stand guard on Jammu-Srinagar national highway on the eve of 73rd Independence Day celebrations, in Jammu, Wednesday, Aug 14, 2019. (PTI photo)

वीरता की ये पंक्तियां देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ यानी केंद्रीय अर्धसैनिक बल ने राष्ट्र के शौर्य दिवस के मौके पर समर्पित की है। आपको समय के पीछे उस गौरवशाली दिन 9 अप्रैल 1965 में लेकर चलते है और जगह है पाकिस्तान सीमा पर गुजरात के कच्छ का रण यानी नमक का रेगिस्तान।

वर्ष 1965 में कच्‍छ के रण में सरहद पर पाकिस्तान के आक्रामक मनसूबों को देखते हुए, 2 बटालियन केरिपुबल की चार कंपनियों को, अन्य बातों के साथ-साथ, सीमा चौकी स्थापित करने के लिए आदेश दिया गया। 8 और 9 अप्रैल की मध्य-रात्रि के अंधेरे में पाकिस्तान की 51वीं इन्फेंटरी ब्रिगेड के 3500 जवानों, जिनमें 18 पंजाब बटालियन, 8 फ्रंटियर राइफल्स और 6 बलूच बटालियन के थे, ने गुपचुप तरीके से भारतीय सीमा की पोस्टों पर ऑपरेशन ‘’डिजर्ट हॉक’’ के तहत आक्रमण कर दिया। ऑपरेशन ‘’डिजर्ट हॉक’’ को नियोजित करने वाले पाकिस्तान ने इसे तैयार करने में किसी कमी की गुंजाइश नहीं छोड़ी थी, लेकिन वे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की उस छोटी टुकड़ी की सुक्षमता और दृढ़ता का आंकलन करने में असफल रहे। शांति वार्ता के प्रस्ताव से बहकाने की पाकिस्तानी रणनीति के बावजूद सरदार पोस्ट की चौकसी कर रहे सीआरपीएफ जवान मुस्तैद थे।

9 अप्रैल, 1965 की सुबह 3 बजे पाकिस्तान की 51 ब्रिगेड ने अपने 3500 सैनिकों के साथ रण ऑफ़ कच्छ की ‘टाक’ और ‘सरदार पोस्ट’ पर हमला किया. उस दिनों इस सीमा पर सीआरपीएफ और गुजरात राज्य पुलिस फ़ोर्स तैनात रहती थी। पाकिस्तान सीमा से लगे गुजरात के कच्छ क्षेत्र में सरदार एवं टॉक पोस्टों पर सीआरपीएफ की द्वितीय वाहिनी के दो कम्पनियां तैनात थी। 9 अप्रैल 1965 को सुबह 3.30 बजे पाकिस्तान की एक पूरी इन्फेन्ट्री ब्रिगेड ने सरदार व टॉक चौकियों पर हमला कर दिया था।
12 घंटे तक यह भीषण समर चलता रहा और CRPF के जवानों ने विशाल ब्रिगेड की का डट कर मुकाबला कर उसे भारत की सीमा से वापस खदेड़ दिया। इस युद्ध में सीआरपीएफ के जवानों ने पाकिस्तानी सेना के 34 जवानों को मार गिराया व 4 को जिंदा गिरफ्तार किया। इस युद्ध में सीआरपीएफ के 6 जवानों ने निडरता से लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दी और इतिहास में अमर हुए।
यह दुनिया के इतिहास में हुए अनेक युद्धों में से एकमात्र ऐसा युद्ध था जिसमें पुलिसबल की एक छोटी सी टुकड़ी ने दुश्मन की विशाल ब्रिगेड को घुटने टेक वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। सीआरपीएफ के जवानों द्वारा दिखाई गई इस बहादुरी को हमेशा याद करने के लिए 9 अप्रैल का दिन शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीआरपीएफ की शूरवीरता को नमन किया है।

9 अप्रैल की वो लड़ाई दो कारणों से बड़ी महत्वपूर्ण मानी जाती है। पहला तो सीआरपीएफ और गुजरात की एसआरपी (स्टेट रिज़र्व पुलिस) की एक छोटी सी टुकड़ी द्वारा दिखाई बहादुरी, और दूसरा कि इसी लड़ाई के बाद सीमा सुरक्षा बल की स्थापना के बारे में सोचा गया। 1965 तक पाकिस्तान से सटी सरहद गुजरात स्टेट आर्म्ड पुलिस बटालियन के जिम्मे थी। उस दिन सरदार पोस्ट, छार बेट और बेरिया बेट पर हुए इस वाकये ने किसी सैनिक हमले की स्थिति में आर्म्ड पुलिस की कमियां ज़ाहिर कर दीं।तब भारत सरकार ने एक ऐसे सुरक्षा बल की जरुरत महसूस की जो केंद्र के नियंत्रण में रहे और जिसके पास पाकिस्तान से सटी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर तैनाती के लिए खास ट्रेनिंग और हथियार हों। इस तरह 1 दिसंबर 1965 में ‘सीमा सुरक्षा बल’ यानी बीएसएफ की स्थापना हुई, अब इस बेहद मुश्किल सीमा पर BSF तैनात रहती है और देश की हिफाज़त करती है।

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का गठन 27 जुलाई 1939 को किया गया था, यह 28 दिसंबर 1949 को के. रि. पु. बल के कानून के लागू होने पर केन्‍द्रीय रिजर्व पुलिस बल बन गया। के. रि. पु. बल कई सालों से कठिन लड़ाईयों को लड़ती हुई आ रही है और कई बार, इसने भारतीय सेना के साथ मिलकर युद्ध भी लड़े हैं। गुजरात के सरदार पोस्ट की शूरवीरता के पहले भी सीआरपीएफ यानी के. रि. पु. बल के 10 बहादुर जवानो ने 1959 में चीन के साथ हुई मुठभेड़ में शहादत पायी थी। इसे हॉट स्प्रिंग की घटना के नाम से जाना जाता है। 21 अक्‍टूबर को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग में गश्‍त के दौरान, चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा में घुसपैठ कर ली थी। यह 21 अक्‍तूबर, 1959 का दिन था, जब सिपाहियों के छोटे किन्तु समर्पित समूह पर ‘’हॉट स्प्रिंग’’ नामक स्‍थान पर चीनी सैन्य टुकडि़यों द्वारा स्‍वचालित हथियारों से भीषण फायरिंग की गई। उनमें से हर एक ने वीरतापूर्वक केवल इस जज्‍बे के साथ मोर्चा संभाला कि वे अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए आक्रांता को खदेड़ देंगे। उस क्षण उन्‍हें अन्य किसी चीज से मोह नहीं रह गया था। केरिपुबल की उस टुकड़ी ने एक बड़ी संख्या में बेहतर हथियारों से लैस प्रशिक्षित सेना से लोहा लेने में अद्वितीय साहस का परिचय दिया। 10 जवानों ने अपने जान से प्रिय उद्देश्‍य अर्थात देश के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया।इस घटना ने हॉट स्प्रिंग को केरिपुबल के लिए एक पवित्र स्थान बना दिया। इस दिन को देश के समस्त पुलिस बलों द्वारा शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।

सीआरपीएफ देश के दुर्गम नक्सली इलाकों में तैनाती ऐसे लेकर दंगो, कर्फ्यू जैसी स्थितियों में भरोसेमंद और योग्य फ़ोर्स के तौर पर तैनात रहती है। देश के इन वीरों को सलाम। जयहिंद।