लोकसभा में कोयला खान संशोधन विधेयक 2015 पारित

Shyam Sunder

Piyush_Goelलोकसभा में कोयला खान संशोधन विधेयक 2015 पास हो गया. सरकार की तरफ से दावा किया गया है कि इस विधेयक के क़ानून बन जाने से कोयला खानों के आंवटन में पारदर्शिता आएगी. सरकार ने कोयला खादानों की नीलामी के लिए अध्यादेश जारी किया था. इस बिल पर बहस के दौरान विपक्ष की तरफ से अध्यादेश का सहारा लेने के लिए सरकार की आलोचना भी हुई.

कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने बहस का जवाब देते हुए कहा कि इस विधेयक के क़ानून बनने के बाद कोयला उत्पादन करने वाले राज्यों को फ़ायदा होगा. इसके अलावा उन्होने दावा किया कि नरेन्द्र मोदी सरकार के आने के बाद इस क्षेत्र में पूरी पारदर्शिता लाने में कामयाबी मिली है. ( 9 दिन के अंदर हमने 19 कोयला खानों की ई नीलामी की है. . . .और आज और नीलामी की शुरूआत होगी)

पीयूष गोयल ने बहस के दौरान उठाई गई विपक्ष की कई शंकाओं का भी जवाब दिया. मसलन उन्होने रिवर्स बिडिंग और एंड यूज़र बदलने के मामले पर सफ़ाई दी. (एक एक खान Technical committee की सलाह पर किया गया है कोई खान स्टील से लेकर पॉवर को नहीं दी गई है)

इस विधेयक पर बहस के दौरान विपक्ष की तरफ से सरकार से कई मुद्दों पर सफ़ाई मांगी गई. तृणमूल कांग्रेस, सीपीएम, बीजेडी की तरफ से राज्यों को मिलने वाली रॉयल्टी की समय सीमा, रिवर्स बिडिंग, एंड यूज़र और लीज़ के समय से जुड़े मसले उठाए.

बीजेडी की तरफ से बाक़यादा एक प्रस्ताव लाया गया. इस प्रस्ताव में बीजेडी की तरफ से कहा गया कि बिजली क्षेत्र पर बेशक ज़्यदा ध्यान दिया जाए. पर साथ ही ये भी ध्यान रखा जाए कि स्टील और सीमेंट उद्योग ज़्यादा रोज़गार पैदा करता है. इसलिए इन क्षेत्रों का भी ध्यान रखा जाए. सरकार ने इस प्रस्ताव पर आश्वासन दिया कि एंड यूजर के मामले में कोई भ्रम नहीं है. इसके बाद बीजेडी ने अपना ये प्रस्ताव वापस ले लिया.

सीपीएम ने भी कई संशोधन पेश किये. पार्टी को आशंका है कि सरकार इस विधेयक के साथ ही कोयला क्षेत्र का निजीकरण कर रही है. हंलाकि कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने इन आशंकाओं को ख़ारिज़ कर दिया. कोयला मंत्री ने कहा कि सरकार का इरादा कोल इंडिया को मजबूत कर कोयला उत्पादन बढ़ाने का है. सरकार की तरफ से दावा किया गया है कि कोयला उत्पादन में कम से कम 7 प्रतिशत की वृध्दि हासिल कर ली गई है.

विधेयक पर कई और संशोधन विपक्ष की तरफ से दिए गये. लेकिन सभी संशोधन बहुमत से नकार दिए गये.  कोयला खान संशोधन विधेयक लोकसभा में आसानी से पास हो गया. लेकिन राज्यसभा में गणित और मूड दोनों ही सरकार के लिए चिंता का सबब है.