विश्व दूरसंचार दिवस: संवाद को गढ़ते संचार माध्यम

Ritu Kumar
World telecomunication day

World telecomunication day

थोड़ी देर के लिए कल्पना कीजिए कि आप आज से एक शताब्दी पहले की दुनिया में जी रहे हैं और कोविड-19 जैसी महामारी फैली हुई है। साथ ही पूरी दुनिया आज की तहर ही लॉकडाउन में जीने को मजबूर हो, जहां एक देश का दूसरे देश से संपर्क-संबंध हर तरह से कटा हो। खुद एक देश के अंदर राज्य… शहर… गांव… यहां तक कि मुहल्ला भी एक टापू बन गया हो, जहां आना-जाना संभव न हो। किसी से मिलना-मिलाना संभव न हो, जैसा आज हो गया है। तो आप किस अवस्था में होते। दुनिया कैसी होती। क्या किसी से संपर्क हो पाता। क्या घर बैठे ऑफिस का काम हो पाता। क्या अर्थव्यवस्था इसी तरह चल पाती। बैंकिंग सिस्टम का क्या हाल होता जो आज अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है। हमारे अपने कहां और किस हालात में हैं क्या हम ये जान पाते। शायद नहीं….। क्योंकि तब संचार और संपर्क के आज जैसा तेज और मजबूत माध्यम नहीं थे।

अब आप वापस वर्तमान में आ जाइए….। आज पूरी दुनिया घरों में कैद है लेकिन ज्यादातर काम घर बैठे कम्प्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल और संचार के अन्य माध्यमों के जरिए चल रहा है। टेलीविजन पर हम दुनिया भर की खबरे पलक झपकते देख रहें हैं। सड़कों पर लोग नहीं हैं लेकिन काम हो रहा है। तो इसका एकमात्र कारण है दूरसंचार के क्षेत्र में हुई क्रांति। इस दूरसंचार क्रांति ने न केवल दुनिया को वैश्विक गांव में तब्दिल कर दिया है बल्कि यह जता दिया कि किसी भी विपद परिस्थिति में मानवीय गतिविधियों को जारी रखने और उसे अग्रसर बनाने के लिए वह कितना जरूरी और प्रासंगिक है।

अपने विकास के क्रम में रेडियो, टेलीफोन, टेलीविजन, इंटरनेट, मोबाइल और संचार के अन्य माध्यमों ने न केवल दूरियों को कम कर आपसी संपर्कों को बढ़ाया बल्कि आधुनियक युग में लोगों की पहली आवश्यकता बन गये। आज इनके बिना जीवन की कल्पना करना मुश्किल हो गया है। इंसान के व्यक्तिगत जीवन से लेकर व्यावसायिक जीवन में ये पूरी तरह प्रवेश कर चुका है। मीलों की दूरियों को मिनटों और सेकेंडों में पाट दिया है। दुर्गम इलाकों में स्थित छोटे से छोटे गांव जहां आज भी आसानी से पहुंचना मश्किल है। संचार के इन माध्यमों के जरिए मिनटों में अपनी बातों और संदेशों को वहां तक पहुंचाया जा सकता है। इस दूरसंचार क्रांति ने न केवल विकसित देशों को फायदे पहुंचाए बल्कि अनेक विकासशील देशों को भी आधुनिक और नूतन तकनीक से परिचय कराकर विकास के पथ पर आगे बढ़ाया। इसके बदौलत ही दुनिया की अनेक देशों की अर्थव्यवस्था ने तेजी से रफ्तार पकड़ी। उन देशों में भारत भी शामिल है।

एक वक्त यैसा भी था जब सूचना पहुंचाने के लिए इंसानों को एक जगह से दूसरी जगह चलकर जाना होता था और संदेश या सूचना पहुंचाने में महीनों लग जाते थे। फिर माध्यम के तौर पर अखबारों ने जगह ली। आजादी की लड़ाई में अखबार और पत्र-पत्रिकाओं ने अहम भूमिका निभाई। वहीं आज कोई भी सूचना दुनिया के किसी भी कोने में पलक झपकते पहुंच जाती है तो इसका श्रेय सिर्फ और सिर्फ दूरसंचार और उसके माध्यमों को है।

दरअसल दूरसंचार के माध्यमों जैसे रेडियो से लेकर टेलीविजन, मोबाइल, इंटरनेट, सैटेलेटाइ और सोशल मीडिया के विकास की कहानी भी काफी दिलचस्प रही है। हर दौर में नई जिज्ञासाओं और पहले से नूतन आविष्कार की चाह ने संभावनाओं और सफलताओं के द्वार खोले। दूरसंचार माध्यमों की शुरुआत तो टेलीग्राफ के आविष्कार के साथ ही हो गई थी जो समय के साथ अत्याधुनिक होती गई। 1844 में सैमुअल मॉर्स ने टेलीग्राफ यानि तार के जरिए वाशिंगटन और बाल्टिमोर के बीच खबरें भेजने का सार्वजनिक प्रदर्शन किया।  इसके बाद संदेशों और सूचनाओं को विद्युत चुम्बकीय तरंगों के जरिए भेजने का प्रयास शुरू हुआ और 1864 में स्कॉटिश भौतिक विज्ञानी जेम्स क्लर्क मैक्सवेल ने अपने समीकरणों के इस्तेमाल से पहली बार माइक्रोवेव प्रतिलेख की खोज की। लेकिन इस क्षेत्र में सबसे क्रांतिकारी आविष्कार जर्मन भौतिकशास्त्री हेनरिक हर्ट्ज ने 1888 में किया। जब उन्होंने विद्युत चुम्बकीय तरंगो यानि इलेक्ट्रॉनिक्स वेव को उत्पन्न किया और उसे स्थांतरित करने में सफलता प्राप्त की। बाद में इसी इलेक्ट्रॉनिक्स वेव्स पर रेडियो, टीवी और मोबाइल का आविष्कार हुआ और देखते-देखते संचार के इन माध्यमों ने पूरी दुनिया को बदल डाला। मैक्सवेल के सिद्धांत पर ही 1893 में गुग्लियो मार्कोनी ने पहली बार विद्युत चुम्बकीय तरंगों को तीन किलोमीटर भेजकर दूरसंचार के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत की। यह एक ऐसा प्रयोग था जिसने साबित कर दिया कि दुनिया में कहीं भी लंबी दूरी तक बिना तार के संदश भेजे जा सकते हैं और इसके बाद की कहानी तो सबके सामने है।

दूरसंचार क्रांति विकासशील देशों में हुई एक ऐसी क्रांति है जिसने न केवल देश की छवि बदली बल्कि देश की विकसित होती अर्थव्यवस्था की गवाह भी बनी। दूरसंचार क्रांति के बदौलत ही भारत की गिनती आज विश्व के ऐसे देशों में होती है जहां आर्थिक समृद्धि में इस क्रांति का बड़ा योगदान रहा है। आज भारत दूरसंचार के मामले में काफी आगे निकल चुका है। 4जी और 5जी टेक्नोलॉजी पर सवार भारत काफी तेज गति से आगे बढ़ता जा रहा है। इसने केवल शहरी क्षेत्र को हीं प्रभावित नहीं किया बल्कि ग्रमाणी भारत भी टेक्नोलॉजी से लबरेज होता जा रहा है। भारत के गांव और किसान दूरसंचार के नए-नए माध्यमों के जरिए हाईटेक हो रहे हैं। फसलों के बारे में तमाम जानकारी से लेकर मौसम की जानकारी के साथ ही शासन की नीति से लेकर नवीनतम सूचनाओं तक को किसान इसी दूरसंचार तकनीक और इंटरनेट के जरिए प्राप्त कर रहे हैं। वहीं बच्चों के स्कूल-कॉलेज में एडमिशन फॉर्म से लेकर ऑफिस में कामकाज के तरीकों में आज काफी बदलाव आ गया है। दूरसंचार माध्यमों के बदौलत ही भारत में ई-गवर्नेंस से लेकर डिजिटल इंडिया कार्यक्रम सफल हो पा रहा है। जिसका मकसद भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में परिणत करना है।

दूरसंचार के साधनों ने मनोरंजन, समाचार, शिक्षा के विकेंद्रीकरण से लेकर लोगों के जीवनशैली बदलने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज हर हाथ में दिखने वाला मोबाइल कभी दूर की कौड़ी लगता था। आज दुनियाभर में करीब 4 अरब 80 करोड़ लोग मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं जिनमें स्मार्टफोन यूज करनेवालों की संख्या करीब 3 अरब 50 करोड़ है, जो दुनिया की आधी आबादी के बराबर है। कभी भारत में मोबाइल फोन रखने वाले लोग बड़े रसूख और रूतबे वाले माने जाते थे। आज आलम ये है कि भारत में 115 करोड़ से ज्यादा लोग मोबाइल इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें 64 करोड़ 45 लाख शहरी उपभोक्ता हैं जबकि 51 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण उपभोक्ता हैं। देश में दूरसंचार घनत्व कुल जनसंख्या का करीब 88 फीसदी है। शहरी क्षेत्रों में यह घनत्व 144 फीसदी तो ग्रामीण क्षेत्रों में 58 फीसदी के करीब है। मोबाइल ने जहां शहर और गांवों के बीच कनेक्टिविटी को बढ़ाई है वहीं लोगों में आत्मविश्वास भी पैदा किया है। सूचनाओं को उनके हाथ में पहुंचा दिया है।

टेलीविजन दूरसंचार के सबसे सशक्त माध्यमों में से एक है जो अपनी जीवतंता और बिना देरी किए खबरों को पहुंचाने के लिए जाना जाता है। यूं तो वैश्विक स्तर पर टेलीविजन का आविष्कार 1925 में स्कॉटलैंड के जॉन लेगी बेयर्ड ने किया था। लेकिन पहले वर्किंग टेलीविजन का निर्माण 1927 में फिलो फान्सवर्थ ने किया। बेयर्ड ने ही रंगीन टेलीविजन का आविष्कार 1928 में किया जिसका पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग 1940 में हुआ और 60 के दशक से आम जनता ने इसे अपनाना शुरू कर दिया। आज दुनिया भर में करीब एक अरब 67 करोड़ घरों में टेलीविजन सेट है। साल 2018 के दौरान दुनिया भर में 214 मिलियन से ज्यादा टीवी सेटों की बिक्री हुई। भारत की बात करें तो प्रायोगिक तौर पर टेलीविजन का प्रसारण पहली बार 15 सितंबर 1959 को दिल्ली से शुरू हुआ और 1975 तक केवल सात शहरों में ही टेलीविजन सेवा शुरू हो पाई थी। इसके बाद भारत में रंगीन टीवी और राष्ट्रीय प्रसारण 1982 में शुरू हुए। आज भारत में करीब 200 मिलियन टेलीविजन सेट हैं जो देश के सौ करोड़ से ज्यादा लोगों को सूचना पहुंचा रहे हैं और उनका मनोरंजन कर रहे हैं। टेलीविजन लोगों के मनोरंजन के साथ-साथ समाचार और सूचनाओं की जानकारी देने वाला बेहद सशक्त माध्यम है जिसपर लोग भरोसा करते हैं।

दूरसंचार क्रांति को सफल बनाने में इंटरनेट का बहुत बड़ा योगदान है। इसमें कोई शक नहीं है कि जिन लोगों की पहुंच इंटरनेट तक है उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इंटरनेट ने सिर्फ लोगों के जीवन को ही सरल नहीं बनाया है बल्कि दुनिया भर की असंख्य सूचनाओं तक उनकी पहुंच को संभव किया है। इंटरनेट सिर्फ सूचनाओं के लिहाज से ही नहीं बल्कि सोशल नेटवर्किंग से लेकर स्टॉक एक्सचेंज, बैंकिंग, ई-शॉपिंग आदि कई चीजों के लिए अहम बन चुका है। ई-मेल, चैटिंग, वीडियो और वॉयस चैटिंग आदि से हजारों किलोमीटर की दूरियां सिमट कर अब चंद सेकेंड के फासले में बदल गई हैं। आज दुनिया के कुल आबादी का करीब 59 फीसदी यानि 4 अरब 57 करोड़ से ज्यादा लोग इंटरनेट का उपयोग करते हैं। वहीं भारत में 57 करोड़ 74 लाख से ज्यादा लोग इंटरनेट का उपयोग करते हैं। 2020 के अंत तक यह आंकड़ा बढ़कर 63 करोड़ 40 लाख के करीब पहुंच जाने की उम्मीद है। ग्रामीण भारत में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या करीब 26 करोड़ 40 लाख है। साल 2019 के दौरान देश में इंटरनेट के इस्तेमाल करने वालों की संख्या में 24 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई। ग्रामीण इलाकों में यह वृद्धी 45 प्रतिशत दर्ज की गई।

हालांकि दूरसंचार के इन माध्यमों ने जहां जीवन को सरल सुगम बनाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है वहीं इनके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। खासकर इंटरनेट के सामने तो सबसे बड़ी चुनौती अपनी विश्वसनीयता को बनाए रखना है। कई बार गलत और भ्रामक खबरें समाज में तनाव पैदा करती हैं। इंटरनेट पर मौजूद पोर्नोग्राफी बच्चों और युवाओं को बरगलाने में उत्प्रेरक का काम करता हैं। अश्लीलता परोसने वाली वेबसाइटें समाज में व्यभिचार और दुराचार को बढ़ावा देती हैं, जिससे युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। इन गलत खबरों और अश्लील वीडियो का असर भी अक्सर देखने को मिलता है। इसके साथ ही साइबर क्राइम भी एक बड़ी चुनौती है जिसकी आड़ में कुछ लोग अपने स्वार्थ सिद्धी के लिए अफवाह फैलाकर साइबर युद्ध जैसे हालात पैदा करने की कोशिश में लगे रहते हैं। इंटरनेट की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए इस तरह की गतिविधियों पर लगाम लगाने की सख्त जरूरत है। साथ ही सोशल मीडिया जैसे वाट्सअप, फेसबुक, ट्वीटर, इंस्टाग्राम आदि पर भी खबरों की विश्वसनीयता और सार्थकता को जाचंने परखने की जरूरत है। हालांकि तमाम नकारात्मक तथ्यों के बावजूद दूरसंचार के माध्यम भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देशों के विकास और समृद्धि में सहायक साबित हो रहे हैं। दिन प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इन माध्यमों से जुड़ रहे हैं और इनका लाभ उठा रहे हैं।

हर साल 17 मई को मनाया जाने वाला विश्व दूरसंचार दिवस का उद्देश्य दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को सूचना और संचार प्रौद्योगिकी सुलभ कराने के साथ ही इसके प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना है। इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि टेलीफोन, रेडिया, टीवी, मोबाइल, इंटरनेट के इस्तेमाल ने आधुनिकीकरण के साथ-साथ लोगों को करीब लाने का काम किया है। किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए यह महत्वपूर्ण है कि दुनिया भर में विकसित हो रही नई तकनीक और प्रौद्योगिकी की जानकारियां उन्हें मिलती रहे। इस दिशा में दूरसंचार माध्यमों ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आज अगर हम इस मुश्किल घड़ी में अपने कामों को घर से अंजाम दे पा रहे हैं… वर्क फ्रॉम होम कर पा रहें है…. एक दूसरे से जुड़ पा रहे हैं… एक दूसरे की खैर-खबर ले पा रहें है…. सूचनाओं का आदान-प्रदान बिना किसी रुकावट के कर कर पा रहें हैं… दुनिया के किसी भी कोने में होने वाली घटनाओं को तुरंत जान पा रहे हैं…. बच्चे अगर घर बैठे पढ़ाई कर पा रहे हैं तो इन सबकी वजह सिर्फ और सिर्फ दूरसंचार के माध्यम हैं। अगर यह क्रांति नहीं हुई होती तो हम आज भी डार्क ऐज में जी रहे होते।