संकल्प से सिद्धि

Sandeep Yash
Pandit Deendayal Upadhyaya

Pandit Deendayal Upadhyaya

आज एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता, प्रखर राष्ट्रवादी, महान विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की 104 वीं जयंती है। इनके दोनों दर्शन हमारी ऋषि परंपरा से जुड़ते हैं जिनके केंद्र में व्यक्ति या सत्ता नहीं है। इन्होने सनातन शब्द को धर्म के तौर पर नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति के रूप में परिभाषित किया था। देखते हैं कि ये दोनों धाराएं आज प्रासंगिक क्यों हैं।

अंत्योदय
इसी जनवरी, काशी में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी कहा कि दीनदयाल उपाध्याय जी ने हमें अंत्योदय का मार्ग दिखाया था। 21वीं सदी का भारत इसी विचार से प्रेरित हो उनके लिए काम कर रहा है जो विकास के आखिरी पायदान पर है।

दीनदयाल उपाध्याय जी के मुताबिक़
–  जब तक व्यक्ति की भूख नहीं मिटाई जाती और उसे वस्त्र, आवास, स्वास्थ्य व शिक्षा की सुविधाएं नहीं मिलती हैं, तब तक वह न तो अपने प्रति, न जिंदगी के प्रति अपने उत्तरदायित्व पूरे कर पायेगा और न ही परिवार, समाज व राष्ट्र के प्रति। ये सुविधाएं मुहैय्या कराना राज्य का पहला कर्तव्य है।

– आर्थिक योजनाओं और विकास का पैमाना वो लोग है जो पीछे छूट गए, न कि वो जिन्हे लाभ मिला है

– पूँजीवादी और कम्युनिस्ट विचारधारा, मानव और उसकी आकांक्षाओं को आंकने में असफल रही हैं। हम न तो पूँजीवाद चाहते हैं और न ही समाजवाद। हम
मानव की प्रगति और खुशी का लक्ष्य रखते हैं।

– राज्य को सभी नागरिकों का न्यूनतम जीवन स्तर सुनिश्चित करना चाहिए और राष्ट्र की रक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए।

– अंत्योदय का लक्ष्य देश को गरीबी से मुक्त कराना है।  ये “एकात्म मानववाद” के मूल दर्शन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है।

आज ‘अंत्योदय’ केंद्र और राज्यों सरकारों का मार्गदर्शक सिद्धांत बन चुका है । सरकार ने इनके विचारो के सम्मान में दीनदयाल अंत्योदय योजना, दीनदयाल ग्रामीण कौशल्य योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण’ तथा प्रधानमंत्री आवास योजना – शहर, स्वच्छ भारत अभियान, महिलाओं की प्रदूषणमुक्त रसोई के लिए ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’, प्रधानमंत्री जन औषधि योजना, दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना, अटल पेंशन योजना, अटल इन्नोवेशन लैब, जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और स्टार्ट अप इंडिया लांच की है।

ध्येय साफ़ है – लक्ष्य अंत्योदय, प्राण अंत्योदय, पथ अंत्योदय

एकात्म मानववाद
1965, मुंबई में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने पहली बार इस दर्शन पर चर्चा की थी। इसका लक्ष्य व्यक्ति एवं समाज की ज़रूरतों को संतुलित करते हुए सभी को गरिमापूर्ण जीवन देना है। मसलन, कुछ वक़्त पहले आये एक सर्वे में खुलासा हुआ कि विश्व के 52% विकास संसाधनों पर मात्र 1% जनसंख्या का कब्ज़ा है। वहीँ तमाम ऐसे देश हैं जो हर बरस अकाल और अभाव का सामना करते हैं। जिनके नागरिक भुखमरी से असमय मरते हैं। ऐसे हालात में एकात्म मानव दर्शन की प्रासंगकिता देश -दुनिया में बढ़ जाती है

– ‘एकात्म मानववाद’ का लक्ष्य एक ऐसा ‘स्वदेशी सामाजिक-आर्थिक मॉडल’ बनाना है जिसके विकास के केंद्र में मानव हो

– पश्चिमी ‘पूंजीवादी व्यक्तिवाद’ एवं ‘मार्क्सवादी समाजवाद’ का विरोधी होते हुए भी पंडित जी आधुनिक तकनीक एवं पश्चिमी विज्ञान के समर्थक थे

– एकात्म मानववाद न केवल राजनीतिक बल्कि आर्थिक एवं सामाजिक लोकतंत्र एवं स्वतंत्रता का भी पक्षधर है

– यह दर्शन भारत की प्राचीन संस्कृति एवं चिंतन को आम आदमी से जोड़ता है

– एकात्म मानव दर्शन, सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों ही दृष्टि से एक सर्वकालिक जीवन दर्शन है

पण्डित जी कहते थे कि देश के विकास के लिए हमें विदेशी बल्कि ‘भारत तकनीक’ का विकास करना होगा।  आज ये विचार ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों में
बखूबी देखा जा सकता है

जानकार कहते हैं कि उपभोगवाद ने आज ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं जहाँ समाज बिखर रहा है, परिवार टूट रहे हैं, वृद्धावस्था आश्रम बन रहे हैं। पंडित जी ने इसकी आशंका छह दशक पहले ही व्यक्त कर दी थी। इनका कहना था कि हमें अपनी संस्कृति में ही समस्याओं के हल खोजने होंगे। .

1965 के विजयवाड़ा अधिवेशन में तत्कालीन जनसंघ ने एकात्म मानववाद को अपने मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में स्वीकार किया था। आज भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में चल रही NDA सरकार में ये विकास का एकमात्र व्यावहारिक विकल्प का रूप ले चुका है।

”भारत छोड़ो’ आंदोलन की 75 वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के ही मंत्र ‘संकल्प से सिद्धि’ को नीति का रूप दे दिया।  और 2022 तक मजबूत, समृृद्ध एवं समावेशी-अर्थात ‘सबका साथ, सबका विकास’- भारत के निर्माण का संकल्प ले लिया है।

इसी जनवरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी-चंदौली की सीमा पर स्थित पड़ाव में पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्थल संग्रहालय का लोकार्पण किया और पंडित जी की 63 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया।

23 सितम्बर, 2018 को लांच हुई आयुष्मान भारत बीमा योजना आज 25 सितंबर को पंडित जी जन्मदिन पर सारे देश भर में लागु की गयी। इसका मक़सद  सबसे गरीब तबके तक निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचना है। दुनिया में अपने तरह की सबसे बड़ी इस योजना का कार्यक्षेत्र रोज बढ़ रहा है।

चलते चलते –
हर खेत को पानी और हर हाथ को काम देने के प्रबल समर्थक पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार हर दौर में प्रासंगिक हैं। इन्हीं में देश की समस्याओं का समाधान भी निहित है।