संसद की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित

RSTV Bureau

Master-Shot---Aug-12संसद का शीतकालीन सत्र अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया है. शीतकालीन सत्र में लोक सभा में 13 और राज्य सभा में 9 विधेयक पारित हुए. 26 नवंबर से शुरू हुए शीतकालीन सत्र के आरंभ में डा. बी आर अम्बेडकर की 125वीं जयंती के अवसर पर भारतीय संविधान के प्रति प्रतिबद्धता जताने के लिए राज्य सभा में तीन दिन और लोक सभा में दो दिन तक चर्चा हुई. इसके बाद दोनों सदनों ने भारतीय संविधान के आदर्शों और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया. शीतकालीन सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर दोनों सदनों की कार्यवाही में अनेक बार अवरोध हुआ.

राज्य सभा के शीतकालीन सत्र के दौरान 55 घंटे अवरोध में बर्बाद हो गए. शीतकालीन सत्र में कुल 112 घंटे काम होना था. सभापति मोहम्मद हामिद अंसारी ने अवरोध पर गहरी चिंता जताई और सदस्यों से अनुशासन में रहने की अपील की.

शीतकालीन सत्र के दौरान राज्य सभा में पारित हुए नौ विधेयकों में तीन विधेयकों को सदन ने बुधवार को मंजूरी दी. बुधवार को इनमें सबसे पहले वाणिज्यिक न्यायालय, उच्च न्यायालय वाणिज्यिक प्रभाग और वाणिज्यिक अपील प्रभाग विधेयक 2015 पारित किया गया. इस विधेयक को 16 दिसंबर को लोक सभा से मंजूरी मिल चुकी है. विधेयक में एक करोड़ रुपए से ज्यादा धनराशि वाले वाणिज्यिक विवादों के निपटारे के लिए चुनिंदा उच्च न्यायालयों में वाणिज्यिक पीठों और जिलों में वाणिज्यिक अदालतों की स्थापना का प्रावधान किया गया है. इन वाणिज्यिक अदालतों का दर्जा जिला अदालतों के बराबर का होगा. साथ ही सभी उच्च न्यायालयों मे वाणिज्यिक अपील पीठ भी स्थापित किए जाएंगे. इसका मकसद कंपनियों के मुकदमों का जल्द निपटारा करना है, जिससे कारोबार और निवेश बढ़ेगा.

इसके बाद माध्यस्थम और सुलह संशोधन विधेयक 2015 को मंजूरी दी गई. इस विधेयक को 17 दिसंबर को लोक सभा से मंजूरी मिल चुकी है. इसके जरिए माध्यस्थम यानी आर्बिट्रेशन और सुलह कानून 1996 में संशोधन किया जाना है. कानून बनने के बाद ये विधेयक 23 अक्टूबर को जारी अध्यादेश की जगह लेगा. मध्यस्थता के मामलों को तेजी से निपटाने और देश में व्यापार करने के माहौल को आसान बनाने के मकसद से ये विधेयक लाया गया.

सदन ने परमाणु ऊर्जा (संशोधन) विधेयक, 2015 को भी पारित कर दिया. इसका मकसद परमाणु बिजली परियोजनाओं की स्थापना में आने वाली समस्याएं दूर कर इसमें होने वाली देरी कम करना है. ये विधेयक भी लोक सभा से पारित हो चुका है. इसके अलावा सदन में पेमेंट ऑफ बोनस संशोधन विधेयक पर चर्चा के बाद इसे लोक सभा को लौटा दिया गया. लोक सभा अध्यक्ष की ओर से चीनी उपकर संशोधन विधेयक को वित्त विधेयक मानने पर भी राज्य सभा में विपक्षी सदस्यों ने आपत्ति उठाई. भारतीय वन संशोधन विधेयक, 2012 को सरकार ने वापस ले लिया. वहीं राजेंद्र केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय विधेयक सदन में पेश किया गया.