सीताराम येचुरी सीपीएम के महासचिव चुने गए

Vimal Chauhan

Sitaram_Yechuryराज्यसभा सांसद और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता सीताराम येचुरी को रविवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का नया महासचिव चुन लिया गया. विशाखापट्टनम में चल रहे माकपा के राष्ट्रीय सम्मेलन के अंतिम दिन उन्हें महासचिव चुना गया.

येचुरी को प्रकाश करात की जगह तीन साल के लिए पार्टी का महासचिव चुना गया. प्रकाश करात ने सीताराम येचुरी के नाम का एलान किया. येचुरी के नाम का एलान करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी ने सर्वसम्मति से सीताराम येचुरी को नया महासचिव चुना है.

गौरतलब है कि बीते दिनों में पार्टी की लगातार के बाद से ही महासचिव पद पर बदलाव की मांग उठने लगी थी और सीताराम येचुरी ने पूर्व महासचिव प्रकाश करात की नीतियों पर सवाल उठाये थे.

इस पद के लिए केरल के वरिष्ठ सीपीएम नेता एस. रामचंद्रन पिल्लई भी प्रमुख दावेदार थे, लेकिन अंत में पार्टी के प्रतिनिधियों ने सीताराम येचुरी के नाम पर मोहर लगाई.

हांलाकि शनिवार को ही पिल्लई ने पार्टी के प्रमुख पद की दौड़ में होने को बकवास बताते हुए कहा था कि इस पद के लिए पार्टी ही इस पद के लिए सही व्यक्ति को चुनेगी.

सीपीएम में महासचिव के चुनाव के लिए 749 पार्टी डेलीगेट्स का गुप्त मतदान होता है जिसमें से करीब साढ़े तीन सौ डेलीगेट्स अकेले केरल के ही हैं. लेकिन इस चुनाव में केरल के ही वरिष्ठ सीपीएम नेता एस. रामचंद्रन पिल्लई का महासचिव ना चुने जाने से साफ है कि येचुरी केरल के डेलीगेट्स में सेंध लगाने में कामयाब रहे.

पार्टी के महासचिव चुने जाने के बाद येचुरी ने कहा कि हमें पार्टी संगठन को मज़बूत करना होगा ताकि देश और पार्टी के सामने की चुनौतियों का सामना कर सकें. ऐसा इसलिए ज़रूरी है क्योंकि पूँजीवाद में संकट गहरा गया है और समाजवाद के संघर्ष को मज़बूत किए बिना लोगों के लिए कोई निजात नहीं है.

मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए येचुरी ने कहा कि पिछले एक साल में मोदी सरकार के आने के बाद से भारतीय इतिहास को दोबारा लिखने के प्रयास हो रहे हैं, सांप्रदायिकता फैल रही है और लोकतांत्रिक परंपराएँ कमज़ोर हो रही हैं. इसी का सामना करना हमारे लिए चुनौती है.

येचुरी ने पार्टी का यह प्रमुख पद उस समय संभाला है जबकि पार्टी के सामने अनेक चुनौतियां सर उठाये खड़ी हैं. एकतरफ बंगाल में पार्टी अपने खोये जनाधार वापस पाने की कोशिश करेगी जहां वह 30 सालों तक सत्ता में थी तो दूसरी तरफ केरल सहित अन्य राज्यों में पार्टी को मजबूत कर दोबारा सत्ता में लाना भी येचुरी के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा.