मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को सूखे से निपटने के लिए मिले ₹5083 करोड़

RSTV Bureau

ratioकेंद्र सरकार सूखे से निपटने के लिए पीड़ित राज्यों को वित्तीय मदद दे रही है। इस कड़ी में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को कुल 5 हजार 83 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। सूखा राहत पैकेज के तौर पर दी जाने वाली इस राशि में मध्य प्रदेश को 2 हजार 33 करोड़ जबकि महाराष्ट्र को 3 हज़ार 50 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को ये राशि राष्ट्रीय आपदा कोष से दी गई है।

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में मंगलवार को सूखा पीड़ित राज्यों को केंद्रीय सहायता देने संबंधी उच्च स्तरीय बैठक में ये फैसला किया गया। इस बैठक में कृषि और किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह, नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया, वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा और गृह सचिव राजीव महर्षि के अलावा गृह, वित्त और कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। इस बैठक में भीषण सूखे से पीड़ित राज्यों का दौरा करने वाले केंद्रीय दल की रिपोर्ट पर भी गौर किया गया।

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में सूखे से निपटने के लिए विशेष पैकेज मांगा था। राज्य सरकार ने इस सिलसिले में अक्टूबर में केन्द्र सरकार को ज्ञापन सौंपा था जिसमें 4 हजार 8 सौ करोड़ रुपए की मांग की गई थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी सूखे से निपटने के लिए दो हजार करोड़ रुपए की आर्थिक मदद मांगी है। कृषि मंत्री राधामोहन सिंह के मुताबिक यूपी को राहत पैकेज देने पर भी जल्द फैसला किया जाएगा। कृषि मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को 2010-11 से 2013-14 तक कभी भी राष्ट्रीय आपदा कोष से सूखा राहत राशि नहीं मिली। छत्तीसगढ़ ने 2015-16 में 6 हजार करोड़ रुपए की सहायता मांगी थी और उन्हें 1 हजार 672 करोड़ रूपए राष्ट्रीय आपदा कोष से आवंटित किए गए हैं। मध्य प्रदेश ने 2015-16 में 4 हजार 8 सौ करोड़ रुपए मांगे थे और उसे 2 हजार 33 करोड़ रूपए आवंटित किए गए हैं।

इस साल देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश औसतन 14 फीसदी कम रही। जिसके बाद नौ राज्यों के 207 जिले सूखाग्रस्त घोषित किए गए। इन नौ राज्यों में कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओड़िशा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं। इनमें छत्तीसगढ़, कर्नाटक और ओड़िशा को वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। संसद के शीतकालीन सत्र में भी सदस्यों ने देश में सूखे और बाढ़ की स्थिति पर अल्पकालिक चर्चा की थी और इससे निपटने के उपायों पर जोर दिया था।

रबी फसलों की बुवाई की बात करें तो इस साल विभिन्न राज्यों से मिली शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक 23 दिसंबर तक कुल बुवाई क्षेत्र 520.07 लाख हेक्टे्यर रहा है। जबकि इस अवधि के दौरान पिछले साल कुल बुवाई क्षेत्र 540.17 लाख हेक्टेयर था।