हमारा स्वास्थ्य क्षेत्र

Sandeep Yash
File photo: Doctors and healthcare professionals fighting against coronavirus

File photo: Doctors and healthcare professionals

नमस्कार, कहावत है तंदुरुस्ती हज़ार नियामत।  तो आज पुरसाहाल लेते हैं देश की सेहत का।  यानी भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र का।  कैसा रहा अब तक सफर। इसके मानक क्या हैं, क्या हो चुका है और क्या कुछ करना बाकी है। छोटे बड़े तमाम सवाल हैं। तो शुरु करते हैं प्राचीन भारत से जहाँ इसकी जड़ें मिलती है।

–  यजुर वेद के 16वें अध्याय में लिखा है कि विश्व को बीमारियों से मुक्त होना चाहिए और प्रत्येक शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होना चाहिए

–  भारत की पारंपरिक चिकित्सा आयुर्वेद पर आधारित है। धन्वन्तरि,चरक और सुश्रुत जैसे चिकित्सकों ने इसमें तमाम अध्याय जोड़े।

– 6 वीं शताब्दी ईसा पूर्व में महात्मा बुद्ध ने तमाम विहार बनाये थे।  इनमें विकलांगों और गरीबों की देखभाल की भी सुविधाएं थीं।

– 273-232 ईसा पूर्व में सम्राट अशोक ने सारे देश में अस्पताल बनवाये थे। इब्न बतूता, निकितिन जैसे यात्रियों ने भी भारत की उत्कृष्ट चिकित्सा प्रणाली का वर्णन  किया है।

– 10 वीं शताब्दी से विदेशियों के आगमन के साथ हकीमों की परंपरा आरम्भ हुई

–  1515 तक पुर्तगालियों ने गोवा में यूरोपीय समुदाय के लिए रॉयल अस्पताल की स्थापना की। 1842 में ये स्कूल ऑफ मेडिसिन एंड सर्जरी बन गया।

– आधुनिक चिकित्सा भारत में लाने का श्रेय पुर्तगालियों को जाता है पर ये फ्रांसीसी और ब्रिटिश थे जिन्होंने 1664 और 1668 में पहले अस्पताल स्थापित किए।

– पहला मेडिकल स्कूल कलकत्ता में शुरू हुआ। 1846 में मद्रास में दूसरे स्कूल की स्थापना हुई।

– ब्रिटिश शासन के समय जिला स्तर और नीचे तमाम औषधालय बने थे।  प्रांतीय स्तर पर अस्पतालों को मेडिकल कॉलेजों से जोड़ कर शिक्षण संस्थानों में बदला गया था।

–  1885 तक ब्रिटिश भारत में 1250 अस्पताल और औषधालय थे। पर इसके बाद स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास की गति धीमी रही।

1943 में सर जोसेफ भोरे के नेतृत्व में स्वास्थ्य सर्वेक्षण और विकास समिति बनी। समिति की रिपोर्ट 1946 में आयी। इसमें ग्रामीण, तालुका और जिला मुख्यालय स्तर पर प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स बनाने, इनमें चिकित्सा के माकूल इंतज़ाम करने और दरिद्र नारायण के लिए मुफ्त स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने की सिफारिश की गयी थी। भोरे समिति रिपोर्ट को भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली (Public Healthcare System) का आधार माना जाता है।

– इस दौर तक चिकित्सा का फोकस मरीज की पीड़ा निवारण और पुनर्वास पर था।  फिर ये पाया गया कि रोग निकट संपर्क से भी फैलते हैं – तो रोकथाम (prevention) का विचार बना। अगले दशकों में इसी पहल ने bacteriology, parasitology और pathology जैसे विषयों को जन्म दिया।

तो आज़ादी के पहले इन ख़ास कदमों ने स्वास्थ्य क्षेत्र को तय  दिशा की तरफ बढ़ाया था ।

1. 1904 में आयी प्लेग आयोग की रिपोर्ट
2 . भारत सरकार स्वास्थ्य अधिनियम, 1919
3 . क्वारंटाइन अधिनियम 1825
4. टीकाकरण अधिनियम 1880
5  चिकित्सा अधिनियम 1886
6   महामारी रोग अधिनियम 1897
7  जहर अधिनियम 1919
8  भारतीय रेड क्रॉस अधिनियम 1922
9  डेंजरस ड्रग्स अधिनियम, 1930
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(आज़ाद भारत में हेल्थकेयर सेक्टर)

– तो आज़ादी के वक़्त भारत में

a. 7400 अस्पताल और डिस्पेंसरी थे। इनमें 1,13,000 बेड थे
b.  बेड जनसंख्या अनुपात 0.24 प्रति 1000 था
c.  47,000 डॉक्टर और 7000 नर्सें थी
d.  9 मेडिकल स्कूल और 28 मेडिकल कॉलेज थे

– भारतीय संविधान के तहत स्वास्थ्य विषय राज्यों के पाले में गया, 1950 में योजना आयोग की स्थापना हुई

-1951 से पंच वर्षीय योजनाओं की शुरुआत हुई

स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास के बीज इन्ही योजनाओं में पेवस्त थे। देखते हैं इनसे जुडी कुछ ख़ास बातें

पहली योजना – परिवार नियोजन को सरकारी कार्यक्रम में शामिल किया गया।  ऐसा दुनिया में पहली बार हुआ था ।

दूसरी योजना – (1956) Central Health Education Bureau और Indian Medical Council की स्थापना हुई, अब तक प्लेग, हैजा, मलेरिया और
चेचक जैसी महामारियों पर काफी हद तक अंकुश लग चुका था।

तीसरी योजना – (1962)  Central Family Planning Institute बनाया गया, Applied Nutrition Programme लांच हुआ

चौथी योजना –  लक्ष्य ग्रामीण इलाकों में प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स बनाना रहा, 1966 में Study Group on Hospitals बना, 1969 में Central Births and Deaths Registration Act बना, 1971 में  , Central  Council  of  Indian  Medicine  (Ayurveda,  Unani  and Siddha) बनी, इसी बरस संसद ने Medical Termination of Pregnancy Bill पास किया गया

पांचवी योजना – इसमें परिवार नियोजन के सिद्धांत को परिवार कल्याण में बदला गया था, अप्रैल 1977 में भारत को चेचक मुक्त घोषित किया गया, इसी बरस
ग्रामीण स्वास्थ्य योजना शुरू हुई थी

वार्षिक योजना (1979-1980) – Alma Ata  Declaration (1977) के तहत भारत ने ”Health for All by 2000” के सिद्धांत को माना और लागू किया था

छठीं योजना – इसे जनता सरकार योजना भी कहा जाता है, इस दौर में नेहरूवादी मॉडल को तज दिया गया था, 1983 में देश की पहली स्वास्थ्य नीति National Health Policy लायी गयी थी, 1981 में बेहतर नतीजों के लिए परिवार कल्याण कार्यक्रम को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जोड़ दिया गया था, प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स को आबादी के करीब रखने का फैसला हुआ था

सातवीं योजना – इस दौर में तवज्जो जन भागीदारी बढ़ाने और रोग निवारण पर रही,  1987 में “सुरक्षित मातृत्व” अभियान, राष्ट्रीय मधुमेह नियंत्रण और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम शुरू हुए, इसी बरस मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम भी बना

वार्षिक योजना (1990-1992) – 1991 में Pre-natal Diagnostic Techniques (regulation and prevention of misuse) Act वजूद में आया

आठवीं योजना – इस दौर में फोकस तंदुरुस्ती, जनसँख्या नियंत्रण और मैला ढोने की कुप्रथा पर अंकुश लगाना रहा, 1994 में Transplantation of Human Organs Bill और 1995 में Persons with  Disabilities (Equal Opportunities, Protection of Rights and Full Participation) Act पास होता है

नवी योजना – इस योजना के दौरान भारत आज़ादी की 50 वीं सालगिरह मना रहा था, एक बड़ा लक्ष्य हर नागरिक को पीने लायक साफ़ पानी मुहैय्या कराना, रुग्णता और मृत्यु दर घटाना था, 2002 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति आयी – इसका मक़सद आबादी में अच्छे स्वास्थ्य के मानक स्थापित करना था।  इसी नीति में पहली बार पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल डिग्री देने से पहले ग्रामीण इलाकों में दो बरस की अनिवार्य सेवा की बात कही गयी थी;  रोग नियंत्रण कार्यक्रमों में गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका पर बल दिया गया था और टेली मेडिसिन मॉडल को प्रोत्साहित करने पर बात हुई थी

दसवीं योजना –   फोकस रहा मौजूदा स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली, गुणवत्ता और दवाओं की आपूर्ति में सुधार तथा दवा के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना, इस योजना में दो ख़ास प्रस्ताव रहे – ग्रामीण इलाकों में चल रहे अस्पतालों को आयकर से मुक्त रखना, 2003 में लांच हुई Universal Health Insurance scheme के प्रीमियम को कम कर गरीबी की रेखा से नीचे रह रहे लोगों की जद  में लाना

ग्यारहवीं योजना – इस दौर में फोकस समावेशी विकास, सर्वसुलभ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित कर दूरदराज़ क्षेत्रों और समुदायों में पसरी असमानताओं को कम करना था

बारहवीं योजना – इसका लक्ष्य सारे देश में Universal Health Coverage (UHC) से जुड़े तंत्र का विकास करना था, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी कैशलेस पहल में सुधार करना और दवाएं, टीके तथा प्रौद्योगिकी क़तार में खड़े आखिरी व्यक्ति तक पहुँचाना था, स्वास्थ्य क्षेत्र का व्यय जीडीपी के 2.5% तक बढ़ाना था, 2022 तक इसे 3 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य है

देखते हैं इन योजनाओं के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास पर कितना खर्च हुआ

Annual / 5 Year Plans  Investment on Public Health
First Plan (1951-1961) 65.30 cr
Second Plan (1956-1961) 146 cr
Third Plan (1961-1966) 251 cr
Annual Plan (1966-1969) 211 cr
Fourth Plan (1969-1974) 613.5 cr
Fifth Plan (1974-1979) 1252.6 cr
Annual Plan (1979-1980) 342 cr
Sixth Plan (1980-1985) 3412.2 cr
Seventh Plan (1985-1990) 6809 cr
Annual Plan (1990-1992) 3644.5 cr
Eighth Plan (1992-1997) 14082.2 cr
Ninth Plan (1997-2002) 20402 cr
Tenth Plan (2002-2007) 37878 cr
Eleventh Plan (2007-2012) 136147 cr
Twelth Plan (2012-2017) 4.04 trillion rupees
   

देखते हैं कुछ तय मानकों का कितना विकास हुआ

Health Indicators 1951 1981 2009 2020
Birth Rate 40.8 33.9 21.7 18.2
Infant Mortality Rate 146 110 50.8 29.84
Death Rate (UN data, does not include Covid deaths) 25 12.5 7.6 7.3
Life Expectancy 36.7 54 64.6 69.73
Sex Ratio 946 934 943 924
Reduction of Total Fertility Rate 5.906 4.799 2.716 2.2

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-1947 के बाद बनी समितियां -इनमें मुदालियर समिति, चड्ढा समिति, मुख़र्जी समिति, जैन समिति, करतार सिंह समित और श्रीवास्तव समिति प्रमुख है

– हालांकि स्वास्थ्य विषय राज्यों की जिम्मेदारी है पर उच्च शिक्षा, अनुसंधान और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए केंद्र ज़िम्मेदार है।

– भारत में स्वास्थ्य सेवाएं सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में बँटी है। अधिकांश निजी क्षेत्र स्वास्थ्य इकाईयां शहरी इलाकों में है। तो ग्रामीण इलाकों तक पहुंचने के
लिए 2005 में National Rural Health Mission किया गया। शुरुआत देश के 18 सबसे पिछड़े राज्यों में की गयी। बच्चों और महिलाओं तक किफायती
स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में इसे मील का पत्थर माना जाता है। सन 2005 -2013  के बीच केंद्र सरकार इस योजना पर 17 अरब डॉलर खर्च कर चुकी थीं।

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तो एक नज़र
– मार्च, 2014 को भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित किया गया।  पिछले कुछ दशकों में हमने गिनी कृमि रोग और टेटनस को भी खत्म किया है
– MDG के तहत हम Maternal Mortality Ratio (MMR) 130 /100000 तक लाने में सफल रहे हैं। लक्ष्य 139 का था।
– WHO वर्तमान में सरकार जीडीपी का कुल 1.13 % हेल्थ सेक्टर पर खर्च करती है जिसको बढ़ाने के प्रयास हो रहे है
–  अभी इलाज और देखभाल का 62 % खर्च मरीज को खुद उठाने पड़ते हैं।  2030  तक इसे 45 % से भी कम करने का लक्ष्य है
– भारत में 98% से अधिक स्वास्थ्य इकाईयों में दस व्यक्तियों या उससे कम लोग काम करते हैं
–  प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) देश की 40 % ज़रूरतमंद आबादी को 1350 विषम रोग के खिलाफ सुरक्षा देती है
–  राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) राज्य सरकारों को वित्तीय मदद दे ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य क्षेत्रों को उर्जित कर रहा है
–  भारत में एक लाख से भी ASHA कार्यकर्तायें ज़मीन पर काम कर इस क्षेत्र की बुनियाद मजबूत कर रही हैं
–  अब तवज्जो इस क्षेत्र में आधुनिक तकनीक लाने पर है। इसी मार्च में टेलीमेडिसिन को कानूनी मान्यता दे दी।  ये पहल कामयाब साबित हो रही है
– 2025 तक सरकार, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को जीडीपी का 2.5 प्रतिशत तक बनाने पर काम कर रही है
–  2022 तक भारत का हेल्थकेयर बाज़ार 372 अरब डॉलर होने का अनुमान है
– दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य कल्याण योजना आयुष्मान भारत 23 सितम्बर, 2018 को लांच हुई
– भारत में सर्जरी की कीमत अमरीका की 1 /10 है
– हमारा मेडिकल टूरिज्म बाज़ार 18% की रफ़्तार से बढ़ रहा है
–  2020-21 के केंद्रीय बजट में पोषण संबंधी कार्यक्रमों के लिए 35,600 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
–  2020-21 के केंद्रीय बजट में PMJAY के लिए 69000 करोड़ रू आवंटित किये गए हैं
– देश में टीकाकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार ने मिशन इंद्रधनुष की शुरुआत की है
-जुलाई 2019 तक प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के तहत 12 करोड़ से ज़्यादा परिवारों को लाभ मिल चुका है, इस योजना में 16,085 अस्पताल शामिल हैं ( 8,059 निजी अस्पताल और 7,980 सार्वजनिक अस्पताल) । उपचार योजना में 19 आयुष पैकेज शामिल हैं
– 2013 में 381 मेडिकल कॉलेज थे जो 2019 में बढ़ कर 529  हो चुके हैं
–  आज देश में 19 हज़ार से ज़्यादा प्राइमरी हेल्थ सेंटर हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत 40 हज़ार और सेंटर बनाने की योजना है
– 2018 के आकड़ों के मुताबिक़ देश में 10. 41 लाख रजिस्टर्ड डॉक्टर थे

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किसी ने सच ही कहा है कि भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने की पहली शर्त एक स्वस्थ श्रमबल है।  और ये एक सतत कर्म है जिसके लिए सरकार के भगीरथ प्रयास जारी हैं। इस विषय का कोई अंत नहीं, तमाम परतें हैं इसमें क्यूंकि देश की सेहत हमारी -आपकी तंदुरुस्ती से सीधे जुडी है। तो आज बस इतना ही।