हमारे बुज़ुर्ग, हमारा अभिमान

Sandeep Yash
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आज ‘अंतराष्ट्रीय वरिष्‍ठ नागरिक दिवस’ की 30 वीं वर्षगाँठ है। यह दिवस हमारे समाज में वरिष्ठ नागरिकों के महत्व को इंगित करता है जो अक्सर दुर्व्यव्हार,  अन्याय और उपेक्षा का शिकार होते है। इस दिवस को शुरू करने का निर्णय संयुक्त राष्ट्र ने 14 दिसम्बर,1990 को लिया था जिसे पहली बार 1 अक्टुबर, 1991 को मनाया गया। तबसे ये हर बरस आज के दिन मनाया जाता है ताकि सनद रहे कि जीवन की शाम में आ पहुंचे अपने बुज़ुर्गों को सम्मान, स्नेह और ख़ुशी देना हमारा बुनियादी फ़र्ज़ है।

आज दुनिया कोविड महामारी से जूझ रही है। हमारे बुज़ुर्गों पर इसका प्रकोप और जोखिम ज़्यादा है। इस वर्ग की ख़ास ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए भारत सहित तमाम देशों में नीति और हस्तक्षेपों को डिज़ाइन किया जा रहा है। और औपचारिक तौर पर इस बरस की थीम “Year of the Nurse and Midwife”.है। इस थीम का उद्देश्य बुज़ुर्गों के स्वास्थ्य देखभाल में लगी महिला नर्स और मिडवाइफ की भूमिका को उजागर करना है।

UN ने 2020-2030 के दशक को Decade of Healthy Ageing भी माना है।  इसके तहत विशेषज्ञों, सिविल सोसाइटी, सरकार और स्वास्थ्य क्षेत्र को एकजुट कर वैश्विक रणनीति, कार्य योजना और इनसे जुडी चुनौतियों पर काम होगा।

ये क्यों ज़रूरी है – आज दुनिया में 60 वर्ष से ज़्यादा उम्र के लगभग 70 करोड़ लोग हैं। अनुमानों के मुताबिक़ 2050 तक यह आंकड़ा बढ़कर 2 अरब हो सकता है। इससे जो समस्याएं उत्पन्न होंगी उन्हें दूर करने की योजनाएं कई बरस पहले शुरू हो चुकी हैं – वियना प्लान ऑफ एक्शन ऑन एजिंग, 1982, संयुक्त राष्ट्र वरिष्ठ नागरिक सिद्धांत, 1991 और मैड्रिड इंटरनेशनल प्लान ऑफ एक्शन, 2002 इनमें एहम हैं।

वृद्धावस्था से जुड़े कुछ तथ्य

2050 तक दुनिया में हर छठे व्यक्ति की उम्र 65 बरस से अधिक होगी
पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या सबसे तेज़ी से बढ़ रही है
दुनिया भर में पब्लिक ट्रांसफर, प्राइवेट ट्रांसफर और संपत्ति एवं श्रम से होती आय – वरिष्ठ नागरिकों के प्रमुख आर्थिक स्त्रोत हैं
अगर नीतियों अनुकूल हों तो जनसंख्या में बुज़ुर्गों की बढ़ती संख्या से कोई हानि नहीं होती
2050 तक वरिष्ठ नागरिकों की संख्या – कोरिया गणराज्य, सिंगापुर, ताइवान, चीन और मालदीव में सर्वाधिक होगी
पुरुषों की तुलना में महिलाएं दीर्घायु होती हैं
आज इतिहास में पहली बार इंसान की औसत आयु साठ बरस से ज़्यादा आंकी जा रही है
वृद्धावस्था में अधिकांश व्यक्तियों में गैर-संचारी रोग होने की संभावना रहती है
2050 तक 80% वृद्ध, निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रह रहे होंगे
वृद्धों में – ह्रदय रोग, ऑस्टियोपोरोसिस, डायबिटीज के साथ आँख और सुनने की समस्या आम हैं
2030 तक बुज़ुर्गों की संख्या, 0-9 वर्ष की आयु के बच्चों से ज़्यादा होगी
बुज़ुर्गों की आबादी बढ़ने की दर विकसित देशों में सबसे ज़्यादा है
जापान का वृद्ध समाज सबसे बड़ा है। इसके बाद जर्मनी, इटली और फिनलैंड का नंबर आता है।
(स्त्रोत -United Nations Department of Economic and Social Affairs)

भारत में बुज़ुर्गों की स्थिति
वर्ष 1999 में वृद्ध सदस्‍यों के लिए राष्‍ट्रीय नीति तैयार की गयी थी जिसका मक़सद समाज, परिवार में वृद्ध सदस्‍यों की देखभाल को सुनिश्चित करना था।

National Policy on Senior Citizen (2011) देश में 60+ आयु वर्ग के व्यक्ति को बुजुर्ग के रूप में परिभाषित करती है

सेन्सस 2011 के मुताबिक़ देश में बुज़ुर्गों की संख्या लगभग 10 करोड़ थी

1951 में बुज़ुर्गों की संख्या, कुल जनसँख्या का 5.5% थी जो 2011 में बढ़ कर 8.6% हो गयी। 2050 तक इसके 19% तक होने का अनुमान है

हमारे देश में 71% बुजुर्ग आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में और 29% आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है

ग्रामीण क्षेत्रों में 66% बुजुर्ग पुरुष और 28% बुजुर्ग महिलाएँ काम करते हैं जबकि शहरी क्षेत्रों में 46% बुजुर्ग पुरुष और लगभग 11% बुजुर्ग महिलाएँ काम करते हैं

(सेन्सस 2011) देश भर में बुज़ुर्गों की आबादी सबसे ज़्यादा केरल में हैं।  इसके बाद गोवा और तमिलनाडु का नंबर आता है

दिसंबर, 2019 में लोकसभा ने ”माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण एवं कल्यण संशोधन विधेयक’ पास किया था।  इसमें वरिष्ठ नागरिकों के लिए गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने और उनके साथ दुर्व्यवहार करने पर छह माह तक कारावास या 10 हजार रुपये जुर्माना या दोनों सजा का प्रावधान है.

इससे पहले 2007 में ”माता-पिता एवं वरिष्‍ठ नागरिक भरण-पोषण” विधेयक संसद में पारित हुआ था।  इसके तहत माता-पिता के भरण-पोषण, वृद्धाश्रमों की स्‍थापना, चिकित्‍सा सुविधा की व्‍यवस्‍था और वरिष्‍ठ नागरिकों के जीवन और सं‍पत्ति की सुरक्षा का प्रावधान किया गया था।

CrPC की धारा 125 के तहत, बुज़ुर्ग माता-पिता अपने बच्चों से रखरखाव का दावा कर सकते हैं

अनुच्छेद 41 और 46 के तहत बुजुर्ग व्यक्तियों के लिए संवैधानिक प्रावधान किये गए हैं

हिंदू विवाह और दत्तक अधिनियम, 1956 की धारा 20 में वृद्ध माता-पिता के प्रति दायित्व निभाना अनिवार्य हैं

मुख्य योजनाएं – प्रधानमंत्री वय वंदना योजना, वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना (VPBY), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना, राष्ट्रीय वयोश्री योजना

चलते चलते
पर सोचिये जिस संस्कृति में वृद्धों को आदर्श स्थान प्राप्त है। जहाँ माना जाता है कि ”अच्छी मति जो चाहों, बूढ़े पूछन जाओ”‘ और जहाँ श्रवण कुमार ने अपने वृद्ध माता-पिता को कंधे पर बिठाकर तीर्थाटन कराया था, उसी देश में लोग अपना बुनियादी फ़र्ज़ निभाएं, इसके लिए कानून बनाने की ज़रुरत क्यों आन पड़ी।

याद करिये अपने नाना -नानी और दादा -दादी की गोद जहाँ हमें दुलार और संस्कार दोनों मिले और ये कि एक दिन हम भी उसी अवस्था को प्राप्त होंगे।  सोचियेगा।