हरित संजीवनी

Sandeep Yash

Webp.net-resizeimage (4)

नमस्कार , आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की बधाइयाँ।  भारत ज़माने से क्रांति की भूमि रहा है -तमाम तरह के सामाजिक, आर्थिक परिवर्तन इसके गर्भ से उत्पन्न हो देश – दुनिया को प्रभावित करते रहे हैं। आज इस दौर में सुगबुगाहट है हरित आंदोलन की, हरी अर्थव्यवस्था के विकास की। इसी बरस फ़रबरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम में कहा की ”हम अक्षय ऊर्जा स्त्रोतों के मार्फ़त हरित अर्थव्यवस्था की तरफ बढ़ेंगे”।

11 मई, 2020 को ही सरकार ने अपने संकल्प का परिचय भी दे दिया। देश का पहला (400 MW) 24/7 green power Tender एक कंपनी को अवार्ड किया गया। कॉन्ट्रैक्ट के अंतर्गत कंपनी वायु और सौर ऊर्जा उत्पादन करेगी और New Delhi Municipal Corporation तथा Dadar and Nagar Haveli.को सप्लाई करेगी। इसकी कीमत 2.90 rupees/kWh होगी।

चलिए देखते हैं कि हरित विकास (Green Growth) आज क्यों भारत समेत दुनिया की ज़रुरत बन चुका है।

– हरित विकास की चर्चा 1950 से शुरू होती है जब जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण छरण का असर मानव जीवन पर पड़ने लगा था।

–  23 फरवरी 1979 : पहली World Climate Conference जिनेवा में आयोजित होती है।

– 1992 : रियो अर्थ सम्मेलन आयोजित होता है।  इसमें 108 देश हिस्सा लेते हैं। इसका फोकस हरित विकास को बढ़ावा दे गरीबी मिटाना था।

– 2007 में पहली बार European Investment Bank अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 600 मिलियन यूरो के “Climate Awareness Bond” जुटाता है।

–  IAE के मुताबिक़ 2015 में पहली बार कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से वैश्विक आर्थिक विकास को हुआ नुक्सान रिकॉर्ड होता है।

–  2015 में UN, Sustainable Development Goals (SDG) का प्रस्ताव पास कर 17 लक्ष्य रखता है। इन्हें पूरा करने की डेडलाइन 2030 है।

–  स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन के मुताबिक़ भारत की अर्थव्यवस्था को जलवायु परिवर्तन ने 31% तक संकुचित किया है।

–  भारत में पर्यावरण को मुख्यधारा में लाने का काम National Action Plan on Climate Change (NAPCC) के हिस्से में आता है।

– NAPCC के 8 मिशन हैं –  Solar energy, energy efficiency, sustainable habitat, sustainable agriculture, Green India, water, Himalayan ecosystem, Strategic Knowledge for Climate Change .

–   NAPCC के नए प्रस्तावित मिशन हैं – wind energy, health, waste-to-energy, coastal areas

– TERI की रिपोर्ट -Green Growth and Sustainable Development in India के मुताबिक़ भारत का लक्ष्य

1, .आर्थिक विकास के लिए पर्यावरण हितैषी मार्ग अपनाना है
2 . सन 2005 को आधार मान कर 2030 तक उत्सर्जन (emission) को 30 -35 फ़ीसदी घटाना है
3 . 2030 तक कुल उत्पादित ऊर्जा का 40 % अक्षय स्त्रोतों (non fossil fuel) से पैदा करना है
4 . 2030 तक अतिरिक्त कार्बन सिंक के लिए वन आवरण बढ़ाना है।
5 . जलवायु परिवर्तन से खतरे में आये कृषि, जल संसाधन, हिमालयी और तटीय क्षेत्र, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन के विकास के लिए निवेश जुटाना
6 . मिशन से जुडी योजनाओं के लिए विकसित देशों से आवश्यक धन, संसाधन जुटाना
7 . उन्नत तकनीक सृजन और क्षमता निर्माण करना, भविष्य की तकनीक के लिए अनुंसधान में निवेश बढ़ाना

– हमारे संविधान के आर्टिकल 48-A, Article 51-A भी पर्यावरण संरक्षण और नागरिक भागीदारी पर केंद्रित हैं।

–  13वे वित्त आयोग: ”हरित विकास एक ऐसी आर्थिक और सामाजिक बुनावट है जो सतत,समावेशी और पर्यावरण हितैषी है।

–   भारत में हरित विकास संकेतक – वायु और जल प्रदूषण, वन, जैव विविधता, जल, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण है

–  अगर अक्षय ऊर्जा की बात करें तो 2022 तक भारत का लक्ष्य 175 GW क्षमता पैदा करना है जिसमें

100 गीगावॉट सौर ऊर्जा से
60 गीगावॉट पवन ऊर्जा से
0 गीगावॉट लघु जल विद्युत से
5 गीगावॉट बायोमास-आधारित बिजली परियोजनाओं से

–  2015 -16 में Green Energy Corridors प्लान बनता है।  इसका उद्देश्य उत्पादित हरित ऊर्जा को पारंपरिक बिजली स्टेशनों के ग्रिड के साथ सिंक्रोनाइज़ करना था ।  इसे तमिलनाडु, राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश लागू किया जा रहा है। कुल परियोजना की लागत 10141 करोड़ रुपये है। इसका फंडिंग मेकेनिज्म – भारत सरकार (40%), राज्य (20 %) और केएफडब्ल्यू, जर्मनी (40%) हैं। ये लेख लिखते वक़्त तक योजना लगभग 60 % पूरी हो चुकी है।

-2018 (अप्रैल-दिसंबर) के बीच भारत की हरित ऊर्जा उत्पादन में 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई जिसमे सौर ऊर्जा अव्वल रही।

– 2018 तक निवेश के नज़रिये से wind and solar energy sector, परंपरागत ईधन स्त्रोतों से औसतन 12% अधिक सालाना रिटर्न देने लगे थे। इसी बरस गैर-पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र में 7.4 अरब डॉलर का निवेश आया था। और IRENA के मुताबिक़ 7,19,000 रोज़गार पैदा हुए थे।

– मई, 2019 तक देश में 80 गीगावाट हरित ऊर्जा उत्पादन की क्षमता बन चुकी थी

– पर नवंबर, 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेरिस में UN Climate Conference.के दौरान International Solar Alliance (ISA) की घोषणा को Game Changer माना जा रहा है।  देखते हैं इसकी बुनावट

– विज़न -One World, One Sun, One Grid

–  ISA की शुरुआत दुनिया के 76 देशों की सरकारों के बीच संधि से हुई।  इसका मक़सद सौर ऊर्जा के लाभों का दोहन, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और
उसका वैश्विक बाजार तैयार करना है। ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करनी है। जलवायु परिवर्तन पर लगाम लगाना है

–  इस पहल को The Paris Declaration के नाम से भी जाना जाता है

– 2030 तक सौर ऊर्जा उत्पादन, भंडारण और प्रौद्योगिकियां के लिए 1000 अरब डॉलर का बजट रखा गया है

– ISA की भूमिका -accelerator, enabler, incubator, facilitator की है

– ISA में प्रमुख तौर पर वो राष्ट्र हैं जो Tropic of Cancer और Tropic of Capricorn के बीच स्थित हैं। वजह – इस धुरी में सौर ऊर्जा प्रचुर मात्रा में होती है।

– 2020 तक इसके सदस्यों की संख्या 86 है। और कोई भी देश इसका सदस्य हो सकता है।

– पिछले 5 बरसों में ISA Expert Mission तमाम सदस्य देशो में काम शुरू कर चुका है, कई वैश्विक वित्त सस्थाओं के साथ समझौते हो चुके हैं

– ISA का सचिवालय गुड़गांव, भारत में हैं। इसका नेतृत्व महानिदेशक द्वारा किया जाता है

– ISA का फोकस – कृषि क्षेत्र, आसान वित्त, छतों की संख्या बढ़ाना, मिनी ग्रिड बनाना, Solar E-Mobility & Storage बनाना और सोलर पार्क पर है

-जून  2020 : ISA ने 8 नयी योजनाओं का ऐलान किया जिसमे 20 गीगावॉट के सोलर पार्क विकसित करना और सोलर होम सिस्टम द्वारा 4. 7 करोड़ घरों
तक ऊर्जा पहुँचाना है।

– भारत के नेतृत्व में शुरू हुई ये पहल महज़ 5 बरस में रोज़ नयी इबारत गढ़ रही है। 8 सितम्बर, 2020 को हो रही World Solar Technology Summit इसके विकास में अगला बड़ा कदम है।

————–

एक नज़र

— विशेषज्ञों के मुताबिक़ देश के आर्थिक विकास का हरित ऊर्जा उत्पादन से सीधा संबंध है। इससे बेरोजगारी और ऊर्जा आयात घटेंगे, राजकोषीय घाटा (fiscal deficit) कम होगा और अगले 25 वर्षों में जीडीपी में खासा इजाफा होगा। आकड़ों का विश्लेषण बताता है कि 2042 तक भारत Wind और Solar.सेक्टर में करीब 45 लाख नौकरियां जोड़ सकता है।

–  अपनी बेजोड़ पहुंच और असर के चलते  ISA आज भारत की विदेश नीति का एहम  हिस्सा बन चुका है

– विशेषज्ञ ISA को भविष्य में OPEC के मजबूत विकल्प के रूप में भी देख रहे हैं

–  उत्पादन की बात करें तो भारत दुनिया में wind energy में चौथा और solar energy में पांचवे स्थान रखता है।

–   वर्तमान में भारत की कुल ऊर्जा उत्पादन क्षमता 357,875 मेगावाट (MW) है।  इसमें हरित ऊर्जा का योगदान करीब 80,000 MW है

–  भारत में Rooftop सौर ऊर्जा उत्पादन लगभग 2.1 गीगावॉट के बराबर है।

–  अगली योजना विराट क्षमता वाली स्टोरेज बैटरीज बनाने की है।

–  देश में हरित ऊर्जा सेक्टर आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है

–  Solar Cell Manufacturing उन्नत तकनीक और बड़ा निवेश मांगता है।  सरकार का लक्ष्य इसे व्यावहारिक और सर्व सुलभ बनाना है

– PMUY स्कीम के तहत 8 करोड़ घरों में LPG पंहुचा कर वायु प्रदूषण कम करने की सरकारी पहल कामयाब रही है

– विशेषज्ञों के मुताबिक़ एक मजबूत अक्षय ऊर्जा नीति- भारत के 2024-25 तक 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को आसान बना सकती है

– हरित ऊर्जा के स्रोत मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में पाए जाते हैं।  तो इन क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाली बिजली की उचित हिस्सेदारी स्थानीय विकास का आधार बन सकती है।

– हरित ऊर्जा के लक्ष्यों के लिए “Clean Energy Fund” बनाया गया है जो कोयला उत्पादन पर सेस लगा कर हासिल किया जाता है।

– इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IRFC) ने हाल ही में Dedicated Freight Corridor project की फंडिंग के लिए एक ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क बनाया।  ये नज़ीर बन सकती है देश के बाकी ग्रीन प्रोजेक्ट्स के लिए।

– घोर जलवायु परिवर्तन से भारत के कृषि क्षेत्र को प्रति वर्ष 62,000 करोड़ रु का नुक्सान होता है (Economic Survey, 2017)   इसका हल सिर्फ हरित विकास में निहित है।

– और आखिर में – IEA के मुताबिक़ अगर भारत ने हरित कदम न उठाये तो 2030 तक वो दुनिया का दूसरा बड़ा कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जक देश बन जायेगा।

——

तो चलते चलते – जान लीजिये ये नौबत हमारे यानी इंसान चलते ही आयी है। अपनी अगली नस्ल लिए अगर एक सेहतमंद समाज, देश और दुनिया छोड़ना चाहते हों तो पर्यावरण संरक्षण, मिटटी, पहाड, साफ़ पानी और हवा यानी हरित सोच के हामी बने। योगदान दें। अच्छा लगेगा।

Sandeep Yash