ज़मीनी हक़ीकत से दूर है केंद्र सरकार: येचुरी

Amrita Rai

Tarkash-with-Sitaram-Yechury

सीपीएम महासचिव और राज्य सभा सांसद सीताराम येचुरी ने राज्य सभा टीवी से ख़ास बातचीत में कहा कि सरकार जमीनी हकीकत से अंजान है और देश की समस्याओं पर गंभीर नहीं है। संविधान दिवस के मौके पर संसद में चर्चा के दौरान सीताराम येचुरी ने लोकतांत्रिक मूल्यों और दलित-किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी चिंता जताई। राज्य सभा टीवी से सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी की बातचीत के कुछ अंश।

Q- येचुरी साहब संविधान संवाद के जरिए क्या निकला ?

A – तीन दिन तक चली बहस के दौरान राज्य सभा में 50 से ज्यादा सांसदों ने भाग लिया और बाद में एक घंटे का प्रवचन सुनने को मिला और प्रधानमंत्री महोदय ने सब कुछ कहा…एकता, अखण्डता, ममता, समता और हमने ये सब बातें सुनी। उन्होंने कई सारे दुनिया के मशहूर लेखकों को कोट किया। अगर पहले ही हमसे मांग लेते तो हम भी कुछ और दे देते उनको लेकिन अब सवाल ये है कि जो उन्होंने जो जवाब दिया उसका कोई जुड़ाव नहीं है। जो सवाल हम कई सारे सांसदों ने उठाए वहां पर एक डिसकनेक्ट है और दूसरा जो और गंभीर डिसकनेक्ट है कि आज जमीन पर क्या हालात है, वहां पर जो हो रहा है, ये जो असहिष्षुता बढ़ती जा रहा है और ये हम समझते हैं कि ये असहिष्णुता ही नहीं है इसके पीछे एक किस्म का आंतक फैलाने की बात जो हमारे समाज के अंदर चल रही है सांप्रदायिक भावनाओं को लेकर उसके बारे में भी जो सवाल उठे हैं जमीन पर उसका भी कोई जवाब नहीं मिला। इससे हमें एक बहुत ही एक ऐसा सवाल पैदा हो रहा है कि क्या ये सरकार इन सभी सवालों से दूर रहना चाहती है या चिंता नहीं है उनको, या दूसरी ओर से ये जो चल रहा जमीन पर इसको चलने दें, अगर सरकार इसके बारे में ना बोले तो ये अपने आप में एक प्रोत्साहन है।

Q – मैं ये जानना चाहती हूं कि इन चिंताओं को आपने संसद के अंदर तो जता दिया लेकिन ये चिंताएं संसद में बहस के आगे कहां जाएंगी क्योंकि इससे तो जनता को कोई समाधान नहीं मिला है जनता को समाधान देने के लिए आप लोग क्या करेंगे?

A – जनता के बीच में जा रहे हैं उनको लामबंद कर रहे हैं उनके विरोध की भावनाओं को जता रहें हैं आज से लेकर और ये शुरुआत हुई है। संसद के अंदर भी पूरे वामपंथी सांसद जो हैं वहां पर विरोध किए थे। 1 से लेकर 6 दिसंबर तक, जिस दिन बाबरी मस्जिद ध्वस्त हुई थी या किया गया था उस दिन तक ये पूरा सप्ताह पूरे देश भर में 6 वामपंथी पार्टियों की तरफ से जनता के बीच में जाकर जन आक्रोश को लामबंद करके उस आवाज को भी इस सरकार को सुनाने के लिए ये अभियान शुरू हुआ है।

Q – आपको नहीं लगता है कि वाजपेयी सरकार में लेफ्ट की मजबूत आवाज थी। वो विपक्ष के आवाज की एक धुरी हुआ करती थी। आज उसकी हैसियत ऐसी हो गई है कि आप खुद महासचिव होते हुए आप कह रहे हैं कि हमारी आवाज की कोई अहमियत नहीं है।

A – नहीं ये इस वजह से नहीं कि हम कमजोर पड़ गए। आप देखिए एक प्रस्ताव जो हम लाए थे पहले सत्र में या 2014 के चुनाव के बाद में कभी नहीं होता कि राष्ट्रपति जी का जो भाषण होता है उसके ऊपर एमेंडमेंट ले आया जाए ये कभी होता नहीं है लेकिन वो एमेंडमेंट मूव किया हमने विपक्ष ने समर्थन किया और वो एमेंडमेंट पारित हुआ। राज्य सभा के अंदर और वो पहला धक्का सरकार को लगा। आवाज सुनती नहीं है सरकार तो हम अवाज सुनाना जानते हैं लेकिन सवाल ये है कि सरकार गैर-जिम्मेदार है और जो हो रहा है देश में उस पर अभी तक चिंता प्रकट नहीं की है।

Q – सदन में आने वाले दिनों में एक महत्वपूर्ण बिल आने जा रहा है जीएसटी। गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स बिल पर आपका क्या रुख है? 

A – हमारा रुख अपना है और ये पहली बार नही है मतलब जीएसटी बिल के बारे में हमने पहले दिन से ही कहा था हमारी इसके ऊपर एक बहुत बड़ी आपत्ति है। इस वजह से हम कहेंगे कि उस समस्या का हल नहीं करेंगे तो विरोध होगा ही। सेलेक्ट कमेटी मे हमने हमारा नोट ऑफ डिसेंट दिया और आपत्ति क्या है।

Q – जीएसटी में आप लोग चाहते क्या हैं। इसे पास कराने में आप लोगों का सहयोग होगा या शर्तें होगी या शर्तों के साथ आप पास कराएंगे?

A – हमारा शर्त ये होगा कि ये बताइए इस अधिकार राज्यों का आप वंचित कर रहे हो। इसके मुकाबले में इसका विकल्प क्या है बताइए केंद्र सरकार। केंद्र सरकार कहती है कि आपको जो घाटा होगा इसको हम एक साल में पूरा करेगें।

Q – अब आने वाले दिनों में केरल में, पश्चिम बंगाल में, असम चुनाव होने जा रहे हैं?

A – अब केरल के अंदर जो सेमीफाइनल हुए उसमें वामपंथी की इतनी भारी जीत हुई, उससे कई लोग आश्चर्य में हैं। हम भी इतना अनुमान नही किए थे कि इतनी तादाद में जीतेगें लेकिन वो जीत हुई। तो ये साफ है कि लोग किस तरफ सोच रहे हैं। बिहार में हमारा प्राथमिक नारा क्या था, भाजपा और सांप्रदायिकता को हराओ वो हुआ कई सारे जगहों पर वहां पर वामपंथियों की ताकत भी एक से तीन बढ़ी।

Q – क्या आपको नहीं लगता है कि जो हमारा राजनीतिक ढांचा है, जिसमें चुनाव जीतना एक महत्वपूर्ण एलिमेंट है बिना चुनाव जीते आप जो इस तरह के बड़े बदलाव की बात कर रहे हैं, जो हमारे समाज में और देश में जरूरी हैं?

A- लेकिन इस व्यवस्था को आप याद करेगें एक बुनियादी बात है कई सारे रिफॉर्म लाने की जरूरत है चुनावी व्यवस्था में लेकिन एक चीज याद रखिए। आज बताइए केंद्र सरकार आज तक 65 साल से रिपब्लिक जो मना रहे हो आजतक कोई केंद्र सरकार है जो 50 प्रतिशत से ज्यादा जो लोग वोट डाले हैं उनके 50 फीसदी से ज्यादा वोट लेकर सरकार बनाई अब यही सरकार लो आप। 31 परसेंट, ये डेमोक्रेसी है क्या, रुल ऑफ द मेजोरटी। बंगाल में वाम एकता और मजबूत हुई है और एकता के साथ लड़ेगे और हम चाहते हैं कि ज्यादा हिंसा के साथ न हो जनतंत्र को बरकरार रखने के लिए हम लड़कर वामपंथी वापस जरूर एक ऐसी पोजीशन में आएंगे कि जैसे पहले था बिना उनकी राय लिए हुए देश की राजनीति और सरकार नही चल पाएगी, वो समय वापस आ रहा है।