17वें एशियाड का आग़ाज़, भारत से उम्मीदें

Anugrah Mishra

Asian Gamesदक्षिण कोरिया के इंचियोन शहर में 17वें एशियाई खेलों का आगाज़ हो गया. 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक चलने वाले 17वें एशियाड में 45 देश हिस्सा ले रहे हैं. 16 दिनों तक चलने वाले खेलों के इस कुंभ में 36 प्रतिस्पर्धाओं में कुल 439 पदकों के लिए ज़ोर आज़माइश है. जहां एशिया के अलग-अलग हिस्सों से शामिल हो रहे खिलाड़ी अपने हुनर का जौहर दिखाएंगे.

भारतीय हॉकी टीम के कप्तान सरदार सिंह भारतीय दल के ध्वजवाहक होंगे. भारत ने एशियाई खेलों में हिस्सा लेने के लिए 516 खिलाड़ियों समेत 679 सदस्यों का एक बड़ा दल भेजा है जिसमें कोच और सपोर्ट स्टाफ भी शामिल हैं. भारत इस बार 28 प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लेगा जबकि 2010 के गुआंगझू एशियाड में भारत ने 35 स्पर्धाओं में हिस्सा लिया था.

लंदन ओलंपिक में अपना अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए भारत ने छह पदक जीते थे. हाल ही में आयोजित ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रदर्शन संतोषजनक रहा. भारत ने ग्लासगो में 15 स्वर्ण पदक समेत 64 पदक आपनी झोली में डाले थे. ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों से 17वें एशियाड में भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है.

भारत ने 2010 के गुआंगझू खेलों में 14 स्वर्ण, 17 रजत और 34 कांस्य पदकों के साथ कुल 65 पदक जीते थे. जबकि 16वें एशियाड की अंकतालिका में भारत छठे स्थान पर रहा.

भारत को पदक की दौड़ में आगे ले जाने वाले कई दिग्गज खिलाड़ी इस बार एशियाई खेलों में नदारद होंगे. टेनिस स्टार लिएंडर पेस, रोहन बोपन्ना, सोमदेव देवबर्मन भारतीय दल का हिस्सा नहीं हैं. बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा, रेसलर सुशील कुमार, मुक्केबाज विजेंदर सिंह जैसे नामचीन खिलाड़ी इंचियोन एशियाड में हिस्सा नहीं ले रहे हैं. इन स्टार खिलाड़ियों की ग़ैर-मौजूदगी से भारतीय दावेदारी कमज़ोर दिखाई पड़ती है.

भारतीय क्रिकेट टीम लगातार दूसरी बार भी एशियाई खेलों में हिस्सा नहीं ले रही है. 2010 के गुआंगझू एशियाड में क्रिकेट को पहली बार शामिल किया गया था. जिसमें बांग्लादेश की पुरुष क्रिकेट टीम को स्वर्ण पदक हासिल हुआ था जबकि महिला वर्ग का स्वर्ण पदक पाकिस्तानी के खाते में गया था.

शटलर साइना नेहवाल, पी वी संधू और पी कश्यप के सामने बैडमिंटन में पदक के लिए भारत का 28 साल पुराना सूखा ख़त्म करने की चुनौती होगी. भारत ने साल 1986 के सिओल एशियाड में पुरुष युगल मुकाबले में कांस्य पदक हासिल किया था.

निशानेबाजी में भी भारत की उम्मीदें कम नहीं हैं. बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा इस बार पूरी तैयारी में हैं. हाल ही में आयोजित ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में बिंद्रा ने सोने पर निशाना साधा था. ऐसे में अभिनव बिंद्रा से एशियाड में शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है.

निशानेबाजी में जीतू राय देश के लिए पदक की आस लेकर आए हैं. 10 मीटर पिस्टल निशानेबाजी में प्रथम वरीयता प्राप्त जीतू राय ने भी ग्लासगो में 50 मीटर फ्री पिस्टल में सोना जीतकर अपना कौशल दिखाया है.

कुश्ती में स्टार रेसलर सुशील कुमार भले ही एशियाई खेलों में हिस्सा नहीं ले रहे हों लेकिन योगेश्वर दत्त और अमित कुमार से देश को पदकों की उम्मीद ज़रूर है. हाल ही में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित रेसलर अमित कुमार ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल में स्वर्ण पदक जीता था. अमित ने एशियन गेम्स में भी पदक जीतने की उम्मीद जगाई है.

मुक्केबाज़ी में पांच बार की विश्व चैंपियन रहीं एम सी मैरी कॉम भारत की ओर से पदकों की होड़ में सबसे आगे हैं. मैरी ने ग्लासगो खेलों में हिस्सा नहीं लिया था. ऐसे में ओलंपिक पदक विजेता मैरी कॉम इंचियोन में पदक जीतकर भारत का मान ज़रूर बढ़ाना चाहेंगी.

भारतीय हॉकी टीम के लिए 17वां एशियाड किसी परीक्षा से कम नहीं है. भारत ने सिर्फ दो बार 1966 और 1998 के बैंकॉक एशियन खेलों में स्वर्ण पदक जीता है. 2010 के गुआंगझू एशियाड में भारत को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा था. पाकिस्तान, हॉकी में भारत से कहीं आगे बढ़कर एशियाड में आठ बार स्वर्ण पदक पर कब्जा कर चुका है. ऐसे में कप्तान सरदार सिंह की अगुवाई में भारतीय टीम अपना स्वर्णिम इतिहास दोहराना चाहेगी.

बहरहाल, इन तमाम खेलों के साथ टेनिस, तीरंदाज़ी, एथलेटिक्स, साइक्लिंग, जिम्नास्टिक, भारोत्तोलन, कबड्डी, जूडो, टेबल टेनिस, वालीबॉल, नौकायन, हैंडबॉल, ताइक्वांडो, वुशू, जैसे खेलों में भी भारतीय खिलाड़ी अपनी क़िस्मत आज़माएंगे.