खौलती आंखों वाला ‘तात्या’ सदा के लिए सो गया

Anugrah Mishra

sadashiv_amraopurkar2हिन्दी और मराठी फिल्मों के जाने माने अभिनेता सदाशिव राव अमरापुरकर का सोमवार सुबह मुंबई में निधन हो गया, वे 64 साल के थे. सदाशिव पिछले कुछ समय से फेफड़ों के संक्रमण से जूझ रहे. जिसके बाद उन्हें मुबंई के कोकिला बेन अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने सोमवार को अंतिम सांस ली.

अस्सी और नब्बे के दशक में बॉलीवुड की कई फिल्मों में खलनायक का किरदार निभाने वाले सदाशिव ने अपने अभिनय से किरदारों को जीवंत बना दिया. हिन्दी फिल्मों के अलावा सदाशिव ने कई मराठी फिल्मों में काम किया और लगातार थियेटर से जुड़े रहे.

साल 1991 में आई फिल्म सड़क में ‘महारानी’ के किरदार के लिए उन्हें बेस्ट खलनायक का फिल्मफेयर अवार्ड मिला. इसके साथ ही टीवी इतिहास के प्रसिद्ध धारावाहिक भारत एक खोज में निभाए महात्मा फुले के किरदार को खूब सराहना मिली. सदाशिव राव ने धारावहिक ‘राज स्वराज’ में लोकमान्य तिलक के किरदार को भी बखूबी निभाया.

सदाशिव ने आंखें, हम साथ-साथ हैं, मोहरा, इश्क, आंटी नं-1 और गुप्त समेत तीन सौ से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया. साल 1984 में उन्हें अपनी पहली फिल्म ‘अर्धसत्य’ के लिए बेस्ट सह-अभिनेता का फिल्म फेयर अवार्ड भी मिल चुका है.

करियर के आखिरी पड़ाव में सदाशिव मराठी सिनेमा की ओर मुड़ गए. साल 2012 में रिलीज हुई ‘बाम्बे टॉकीज’ उनकी आखिरी हिन्दी फिल्म थी. सिनेमा के मौजूदा दौर में अभिनेता की ओर से ही खलनायक का किरदार निभाने की होड़ मच गई है. ऐसे में सदाशिव राव का निभाया हर एक किरदार और कैमरे से बोलती उनकी आंखें बार-बार दर्शकों के दिलों में झांकेगी.

उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर के जरिए सदाशिव राव को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की. प्रधानमंत्री ने लिखा कि वो बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, मैं उनके परिवार के प्रति अपने गहरी संवेदना प्रकट करता हूं.

महानायक अमिताभ बच्चन ने उनके निधन पर शोक जताते हुए ट्विटर पर लिखा कि उनके जाने से एक खालीपन है, वह एक प्रतिभाशाली व्यक्तित्व थे.

अभिनेता अनुपम खेर ने सदाशिव को याद करते हुए ट्विटर पर लिखा कि वो अपने अभिनय के जरिए हमेशा कुछ नया पेश करते थे, हमनें एक बेहतरीन कलाकार और ईमानदार इंसान खो दिया.

निर्देशक महेश भट्ट ने भी ट्विटर पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि मेरी सुपरहिट फिल्म सड़क में उनका अभिनय शानदार था. वो एक मंझे हुए कलाकार थे.

1950 में महाराष्ट्र के नासिक में सदाशिव राव का जन्म हुआ. उनका असली नाम गणेश कुमार नरवोडे था लेकिन 1974 में उन्होंने अपना नाम बदलकर सदाशिव रख लिया. परिवार में तात्या के नाम से पहचाने जाने वाले सदाशिव की परवरिश अहमदनगर में हुई थी.

सदाशिव राव ने फिल्मों में अपनी पहचान, अलग किस्म की अदाकारी से बनाई. उनके संवाद बोलने का अंदाज और चेहरे पर आने वाले भाव दर्शकों के मन में हमेशा जीवंत रहेंगे.