AI और रोबोट्स बने संजीवनी

Sandeep Yash
File photo: Coronavirus

File photo: Coronavirus

COVID- 19, 21 वीं सदी में आयी पहली बड़ी महामारी है। महज़ 3 महीनो में इसने 209 देशों को अपनी ज़हरीली गिरफ्त में ले लिया है. वैसे मानव पहले आयी आपदाओं के आधार पर रणनीतियां बनाता आया है, पर अगर नयी महामारी का कोई इलाज ही न हो तो हमारी सारी उम्मीदें डॉक्टर्स और रिसर्च लैब्स पर आ टिकती हैं। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है, पहली जंग तो जिंदगी बचाने की है तो दूसरी, दुनिया भर में इसका मुकम्मल इलाज ढूढ़ने की। इस विषय पर रात- दिन काम हो रहा है। फिलहाल ये रिपोर्ट लिखते वक़्त विभिन्न देशों में 14 लाख ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और 80 हज़ार से ज़्यादा ज़िन्दगी की जंग हार चुके थे, पर इस समस्या का ताज़ा चिंताजनक पहलू ये है कि रोगियों का इलाज करने वाले कुछ डॉक्टर्स और नर्सेज भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। यूरोप में हज़ारों स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हुए हैं, अकेले स्पेन में कुल बीमार पड़े लोगों में 14 % इस वर्ग से हैं, हालात इटली, फ्रांस और ब्रिटैन में भी अच्छे नहीं हैं, भारत में स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक़ संक्रमित हुए स्वास्थ्य कर्मियों की हालिया संख्या 50 से ऊपर हैं।

जान लीजिये की ये डॉक्टर्स और नर्सेज इस महामारी के खिलाफ हमारा सबसे मजबूत हथियार हैं, इनकी सुरक्षा करना आज किसी भी देश की पहली ज़िम्मेदारी बन गयी है। तो ध्यान आज फिर तकनीक की ओर ही जा रहा है और वैज्ञानिकों के मुताबिक़ यही संकटमोचक साबित होगी। तो जनाब कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं इसी विषय पर काम कर रहे हैं कि कैसे एआई और रोबोटिक्स, स्वास्थ्य क्षेत्र में उन खतरनाक कामो में इस्तेमाल किये जाए जो मानव के लिए जोखिम भरे है। और वैसे भी आज कई पश्चिमी देशों में रोबोटों को कीटाणुशोधन के लिए इस्तेमाल किया ही जा रहा है। इसके अलावा ये रोगियों को न सिर्फ दवाएँ और भोजन देते हैं बल्कि इनके लक्षणों पर भी बारीक नज़र रखते हैं। बात इस क्षेत्र में विकास की कुछ सीढ़ियां और चढ़ने की है।

फिलहाल, इस सेक्टर में लगातार चल रहे शोध ये इंगित कर रहे हैं कि कैसे रोबोट्स और AI का इस्तेमाल COVID -19 की महीन परतों को उघारने के लिए किया जा सकता है ताकि ऐसे संक्रमण फ़ैलाने वाले रोगों से जुड़े जोखिमों को कम या ख़त्म किया जा सके। पर सबसे जरूरी बात ये कि आज चल रहे ये प्रयास निसंदेह भविष्य में ऐसी किसी भी महामारी का सामना करने के लिए हमें संगठित और सामूहिक पहल के लिए एक मजबूत मंच ज़रूर देंगे ताकि डॉक्टर और मरीज दोनों सुरक्षित रहे।

इसकी पहल हो चुकी है। इसी बरस जनवरी में चीन के वुहान शहर के एक होटल में quarantine हुए लोगों को भोजन पहुंचने वाला एक रोबोट था। इसका नाम little Peanut था. ये होटल दुनिया के चंद उन पहले होटलों में था जहाँ संक्रमित व्यक्तियों को इस तरह इमदाद पहुचायी गयी. चीन के ही झोंगन अस्पताल में COVID-19 संक्रमण की पहचान के लिए AI संचालित सीटी स्कैन दुभाषिये का उपयोग तब करता है जब रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं होते हैं। स्थानीय वुहान वुचांग अस्पताल ने तो एक ऐसे स्मार्ट फील्ड अस्पताल की स्थापना की है जहाँ ज़्यादातर काम रोबोट करते हैं। चीन जैसे देशों ने AI का उपयोग एक संकट प्रबंधन उपकरण के रूप में सफलतापूर्वक किया है जो इसकी उपयोगिता और सार्थकता का सशक्त प्रमाण है और जो इसमें हुए भारी निवेश को सही ठहरता है।

भारत में भी बंगलुरु की एक कंपनी ने एस्ट्रा नाम का एक रोबोट विकसित किया है जो स्वचालित है। ये रोबोट Quarantine rooms और अस्पतालों को कीटाणुरहित कर सकता है, भोजन बाँट सकता है और कोरोना वायरस का वजूद उन जगहों पर जाकर मिटा सकता है जहां इंसान को खतरा हो सकता है। इसका निर्माण जल्द शुरू होगा। ऐसे प्रयास भारत के कई शहरों में हो रहे हैं, कोच्ची की एक कंपनी ने कर्मी -बोट नाम का एक रोबोट बनाया है, ये रोबोट मास्क, टिश्यू पेपर और सैनिटाइटर बाँट सकते हैं, डोर हैंडल को साफ़ कर सकते है और ऐसे वीडियो चला सकते हैं जो COVID-19 महामारी पर जागरूकता पैदा करने में मदद करते हैं।

स्पेन में, जहाँ हालत बेहद गंभीर रहे, वहां इस संक्रमण की पहचान के लिए स्थानीय सरकार ने रोबोट्स की मदद लेने की योजना बनायीं जिससे टेस्टिंग के काम में तेज़ी आ सके और अनावश्यक तौर पर किसी को जोखिम न उठाना पड़े। .

अमरीका इस महामारी की मजबूत गिरफ्त में आने वाले चंद देशों में हैं। हज़ारों लोग अब तक यहाँ दम तोड़ चुके हैं। क्या आपको पता है कि जब अमेरिका ने पहले संक्रमित मरीज की पहचान की थी तब एवरेट रीजनल मेडिकल सेंटर, वाशिंगटन के विशेषज्ञों ने उसके साथ संवाद करने के लिए एक रोबोट का इस्तेमाल किया था। विडंबना तो ये है है कि इस देश के हेल्थ सेक्टर को दुनिया के चुंनिदा श्रेष्ठ सेक्टर्स में गिना जाता है। हारवर्ड बिज़नेस रिव्यु में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ अभी पिछले ही महीने बोस्टन शहर में एक हॉटलाइन खोली गयी – मक़सद था नागरिकों के साथ COVID-19 पर संवाद करना, संक्रमितों की पहचान करना और उन्हें ज़रूरी मदद पहुँचाना। जल्द ही ये लाइन जाम हो गयी और बड़ी तादाद में लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा, काम अधूरा ही रहा।

फिलहाल आगे ऐसा न हो इसके लिए स्थानीय अधिकारीयों और शोधकर्ताओं ने AI का सहारा लिया और सिएटल प्रोविडेंस सेंट जोसेफ स्वास्थ्य प्रणाली से मदद मांगी गयी। ये संस्था मार्च की शुरुआत से ही देश के प्रथम कोविद -19 रोगियों में से कुछ के संपर्क में थी। फिर Microsoft के सहयोग से प्रोविडेंस ने एक ऑनलाइन स्क्रीनिंग और ट्राइएज टूल बनाया, ये सॉफ्टवेयर तेजी से उन लोगों के बीच अंतर कर सकता था जो कोविद -19 से गंभीर रूप से पीड़ित थे.और जिन्हे तत्काल चिकित्सा की ज़रुरत थी तो पहले ही सप्ताह में प्रोविडेंस के इस टूल ने 40 हज़ार से अधिक रोगियों की पहचान की। इस टूल को जनता का अभूतपूर्व समर्थन मिला। आज अमरीका सहित देश-दुनिया के कई अस्पताल इन आज़मायी जा चुकी तकनीकों की मदद से इस महामारी को हराने में जुटे हैं.

विशेषज्ञों के मुताबिक़, हालांकि AI एप्लिकेशन ने वर्तमान में तेज़ी से प्रगति की है पर इस महामारी द्वारा पेश की गयी चुनौतियों ने इस सेक्टर को अभूतपूर्व महत्त्व दे दिया है। आज इसका उपयोग न सिर्फ COVID-19 की diagnosis बल्कि contact tracing और टीका विकास यानी vaccine development के लिए भी किया जा रहा है। और उस तरह, इस महामारी पर काबू पाने में AI बड़ी भूमिका अदा कर रही है, इसके बुरे प्रभावों को रोकने में मदद कर रही है, बहुमूल्य जीवन बचा रही है । निस्संदेह, ये तकनीकी आज और भविष्य में भारत और दुनिया भर के स्वास्थ्यकर्मियों और हेल्थकेयर सेक्टर की सच्ची मददगार और शुभचिंतक होने वाली है।