सबकी नज़र महाराष्ट्र-हरियाणा के नतीजों पर

Adil Raza Khan

youth_votersमहाराष्ट्र और हरियाणा राज्य में हुए विधान सभा चुनाव के नतीजे रविवार को आएंगे. आज सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होगी. दोपहर तक जीत-हार की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है. मतगणना के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा के चाक चौबंद इंतज़ाम किए हैं. महाराष्ट्र में कुल 288 मतगणना केंद्र और हरियाणा में कुल 90 मतगणना केंद्र बनाए गए हैं.

महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए 4,119 और हरियाणा की 90 सीटों के लिए 1,351 उम्मीदवारों की क़िस्मत वोटिंग मशीन में बंद है.  बुधवार को हुए मतदान में महाराष्ट्र और हरियाणा में वोटिंग का प्रतिशत क्रमशः 64 और 73 फीसदी रहा. एग्ज़िट पोल के आंकड़े दोनों राज्यों में बीजेपी को बहुमत मिलता हुआ बता रहे हैं.

महाराष्ट्र में इस बार मुक़ाबला बहुत ही दिलचस्प रहा जहां पुराने दोस्त प्रतिद्वंद्वी के तौर पर आमने-सामने दिखे. महाराष्ट्र में पंचकोणीय चुनावी रण में सत्ताधारी कांग्रेस के सामने लंबे समय तक राज्य में उनकी सहयोगी पार्टी रही एनसीपी है. वहीं बीजेपी और शिवसेना ने 25 साल पुराने गठबंधन को दरकिनार कर अलग-अलग चुनाव लड़ा. इसके अलावा एमएनएस ने भी स्वतंत्र रूप से चुनाव में हिस्सा लिया. कुल मिलाकर सबकी अपनी-अपनी दावेदारी के अलावा पुरानी दोस्ती से टक्कर लेना भी एक दूसरे के लिए चुनौती रही.

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2009 के नतीजों पर ग़ौर करें तो कांग्रेस 82 सीट लेकर तालिका में सबसे ऊपर थी जबकि एनसीपी के 62 विधायक चुनकर आए थे. जिसके चलते इन दोनों दलों के गठबंधन की सरकार 5 साल तक सत्ता पर काबिज़ रही. वहीं बीजेपी और शिवसेना गठबंधन ने 90 सीटें हासिल की थीं. जिसमें बीजेपी ने 46 और शिवसेना ने 44 सीटों पर सफलता पाई थी. इसके अलावा रिपब्लिकन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट ने 14, एमएनएस ने 13, समाजवादी पार्टी ने 3 और अन्य ने 24 सीटों पर जीत दर्ज की थी.

हरियाणा में मुख्य मुक़ाबला सत्ताधारी कांग्रेस, आईएनएलडी और बीजेपी के बीच है. इसके अलावा पिछले चुनाव में तीसरे नंबर पर रही हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) मुक़ाबले को एक नया रंग देती है. 2009 के चुनाव में कांग्रेस ने 90 में से 40 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनाई थी. वहीं आईएनएलडी मुक़ाबले में दूसरे नंबर पर रही थी और 31 सीटें जीत पाई थी. तब हजकां को 6, बीजेपी को 4, बीएसपी को 1, अकाली दल को 1 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 7 सीटों पर सफलता मिली थी.

दोनों राज्यों में कांग्रेस के सामने सत्ता को बचाना एक अहम चुनौती है. कांग्रेस कामयाबी हासिल कर आम चुनावों में मिली करारी हार की टीस को कम करना चाहती है. वहीं बीजेपी के सामने आम चुनाव की सफलता को दोहराने का दबाव है. ख़ासकर ऐसे वक्त में जब हालिया उपचुनावों में बीजेपी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा हो. इसके अलावा इन चुनावों को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के लिए भी अग्निपरीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है. अमित शाह के बीजेपी अध्यक्ष चुने जाने के बाद राज्य विधानसभा का ये पहला चुनाव है.

हरियाणा में मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के सामने अपनी साख को बचाने की चुनौती है. वहीं आईएलएलडी की तरफ से नए चेहरे के तौर पर दुष्यंत चौटाला अपनी काबिलियत साबित करने की होड़ में हैं. दूसरी ओर महाराष्ट्र में पृथ्वीराज चौहान, शरद पवार, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने अलग-अलग अपनी ताक़त की ज़ोर आज़माईश की है. वहीं बीजेपी देवेंद्र फड़नवीस को आगे कर बाज़ी अपने नाम करना चाहती है. अब सबकी निगाहें रविवार को आने वाले चुनावी नतीजों पर हैं.