गेंदबाज़ ही दिलाएंगे फ़ाइनल में जगह

Vidhanshu Kumar

Dhoni_dunkanविश्व कप में सेमीफाइनल के मुकाबले मंगलवार से शुरू होगें और टूर्नामेंट में अब तक की चार सबसे मज़बूत टीमों ने ही अंतिम चार में जगह बनाई है. पहले सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका का मुकाबला न्यूज़ीलैंड से होगा जबकि दूसरे मैच में भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें आमने-सामने होंगी.

इस विश्व कप में अब तक सबसे ज़्यादा रन बने हैं, सबसे ज्य़ादा चौके और छक्के लगे हैं. प्रति विकेट रन का औसत भी पिछली प्रतियोगिताओं से कहीं ज्यादा है लेकिन नॉक आउट स्टेज में अब जीत गेंदबाज़ ही दिलाएंगे.

दरअसल जब से वनडे मैचों के नियमों में बदलाव किए गए हैं, क्रिकेट और भी अधिक बल्लेबाज़ों की तरफ़ झुक गया है. ख़ासकर अंतिम ओवरों में सर्कल के बाहर सिर्फ़ चार फील्डर रखने के प्रावधान से जहां बल्लेबाज़ों को खुलकर हवा में शॉट्स लगाने का मौका मिल रहा है वहीं गेंदबाज़ों को रन रोकने में बेहद मुश्किल हो रही है.

रन रोकने हैं तो विकेट लीजिए

लेकिन रनों की इस बरसात में गेंदबाज़ का रोल कैसे और अहम हो जाता है इसे जानने के लिए ज़रा चारों क्वार्टरफ़ाइनल मैचों के स्कोर पर नज़र डालिए.  इन मैंचों में दक्षिण अफ्रीका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की टीमों को जीत मिली थी.

हारने वाली टीमों के आखिरी दस ओवरों का रन देखें तो पाऐंगे कि श्रीलंका की पारी सिर्फ़ 34 ओवरों में सिमट गई और आखिरी दस ओवरों में टीम ने 50 से भी कम रन बनाए.

बांग्लादेश 45 ओवरों में आउट हो गई और उन्होंने पारी की आखिरी 10 ओवरों में 54 रन जोड़े.

पाकिस्तान की टीम भी आखिरी दस ओवरों में 50 से कम रन जोड़ पाई जबकि वेस्ट इंडीज़ की टीम सिर्फ 30 ओवरों में ऑल आउट हो गई थी. दरअसल जीतने वाली सभी चार टीमों ने रन तो बनाए ही साथ ही विरोधी टीमों के विकेट लगातार लेकर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया.

दक्षिण अफ्रीका बनाम न्यूज़ीलैंड

इस सेमीफाइनल में जीत किसी भी टीम की हो लेकिन एक बात तय है कि कोई एक टीम पहली बार फाइनल खेलेगी. न्यूज़ीलैंड और दक्षिण अफ्रीका ने अब तक मिलाकर नौ सेमीफाइनल खेले हैं लेकिन जीता एक भी नहीं है.

अक्सर दक्षिण अफ़्रीका की टीम को ‘चोकर्स’ यानी बड़े मौकों पर फिसड्डी रहने वाली टीम माना जाता है. लेकिन किवी टीम का रिकॉर्ड भी कोई बढ़िया नहीं है क्योंकि छह सेमीफाइनल के बावजूद वो एक बार भी फाइनल में नहीं पहुंचे हैं.

पहले सेमीफाइनल में दोनों ही टीम बराबर की नज़र आ रही हैं. न्यूज़ीलैंड ने वैसे तो अपने सातों मैच जीते हैं लेकिन लीग स्तर पर दो मैच हारने वाली अफ्रीकी टीम को कमतर नहीं आंक सकते.

न्यूज़ीलैंड ने जीत के लिए दिखने में आसान लेकिन करके दिखाने में मुश्किल दो फार्मूले अपनाए हैं. शुरुआती ओवरों में कप्तान ब्रैंडन मैक्कलम ने ताबड़तोड़ रन बरसाए हैं और गप्टिल और विलियमसन सरीखे बल्लेबाज़ों ने उनका बेहतरीन साथ दिया है. कोई हैरानी नहीं कि शुरुआती पावरप्ले में किवी टीम ने सबसे अधिक 6.5 की औसत से रन बनाए हैं. फिर गेंदबाजी में बोल्ट, साउथी और मिल्ने ने लगातार विकेट चटकाए हैं.

इसके उलट सितारों से सजी दक्षिण अफ्रीका की टीम कप्तान डी विलियर्स पर कुछ ज्यादा निर्भर दिखती है. हालांकि उनके पास आमला, डू प्लेसी और डूमिनी जैसे बल्लेबाज़ हैं लेकिन बड़े मैचों में डीविलियर्स की बड़ी पारी के बिना ये टीम लड़खड़ा भी सकती है. इस मैच में स्पिनर इमरान ताहिर का रोल भी अहम हो जाएगा. क्वार्टर फाइनल में ताहिर के चार विकेटों ने श्रीलंका जैसी टीम को भी परेशान किया था. वैसे न्यूजीलैंड की टीम के पास भी विटोरी हैं जो करियर के इस पड़ाव पर भी बेहद सधी और किफ़ायती गेंदबाज़ी कर रहे है.

दोनों ही टीम सोच रही होगी की अगर एक बल्लेबाज़ को सस्ते में आउट कर दिया जाए तो आधा मैच उनकी गिरफ़्त में आ जाएगा. दक्षिण अफ्रीका के लिए वो बल्लेबाज़ मैक्कलम है तो न्यूज़ीलैंड का निशाना कप्तान डीविलियर्स पर होगा.

भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया

भारतीय टीम विश्व कप की शुरूआत के महीने पहले से ऑस्ट्रेलिया में है लेकिन टूर्नामेंट से पहले भारत को एक भी जीत नहीं मिली. लेकिन जैसे ही विश्व कप शुरु हुआ ‘मेन इन ब्लू’ पर जीत का रंग चढ़ गया और सातों मैच में भारतीय टीम विजयी रही.

भारतीय जीत की कुंजी गेंदबाज़ों के हाथों में रही है. टीम ने सभी सात मैचों में विपक्षी टीम को ऑल आउट किया है. टीम के तेज गेंदबाज़ों ने जीत का परचम लहराया है. मोहम्मद शमी 17 विकेट के साथ टूर्नामेंट में तीसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं. वहीं उमेश यादव और मोहित शर्मा ने भी उनका बढ़िया साथ दिया है.

पूर्व पाकिस्तानी कप्तान और कमेंटेटर रमीज़ राजा का मानना है कि जिस तरह क्वार्टर फाइनल में वहाब रियाज़ ने तेज़ बाउंसरों के साथ  ऑस्ट्रेलियाई टॉप ऑर्डर की कमर तोड़ दी थी उसी तरह की गेंदबाजी भारत को भी जीत दिला सकती है. लेकिन मेरा मानना है कि तेज़ गेंदबाज़ों के अलावा भारत को अश्विन और जडेजा की फिरकी गेंदबाज़ी की भी ज़रूरत पड़ेगी और शायद यही दोनों टीमों के बीच का अंतर साबित हो सकते हैं.

वहीं ऑस्ट्रेलियाई टीम को इस बात से बल मिलता है कि उन्होंने हालिया सीरीज़ में भारत को धूल चटाई थी लेकिन ज़रूरत से ज्यादा आत्मविश्वास उन पर भारी भी पड़ सकता है.

मिचेल स्टार्क की बाएं हाथ की तेज गेंजबाज़ी इस विश्व कप का खास आकर्षण रही है और भारत के खिलाफ जॉनसन और स्टार्क की जोड़ी खतरनाक साबित हो सकती है. ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाज़ी बहुत हद तक डेविड वॉर्नर और स्मिथ पर निर्भर नज़र आती है और यहीं पर भारत के पास मौका भी है.

भारत ने सातों मैचों में एक ही टीम खिलाया है लेकिन खास बात ये है कि सभी खिलाड़ियों ने योगदान दिया है. शिखर धवन, रोहित शर्मा और सुरेश रैना ने इस टूर्नामेंट में शतक लगाया है लेकिन विराट कोहली पहले मैच के शतक के बाद पचास नहीं कर पाए हैं. कोहली बड़े खिलाड़ी हैं औऱ बड़े मैचों में बड़ा स्कोर करते हैं. अगर गुरूवार को भी ऐसा ही हुआ तो मान लीजिए कि फाइनल भारतीय टीम ही खेलेगी.