पत्रकारिता में इतिहास बोध और राजेन्द्र माथुर

Rajesh Badal

भारतीय हिंदी पत्रकारिता इन दिनों संक्रमण काल का सामना कर रही है . अनेक विधाएँ धीरे धीरे दम तोड़ती नज़र आ रही हैं .सामाजिक नज़रिए से उनकी आवश्यकता है

Continue Reading

उलट कर मार करने वाला तीर

Rajesh Badal

मीडिया के संक्रमण काल का एक अजीब सा दौर है. न निगलते बनता है न उगलते. छोड़ते हैं तो ज़िन्दगी की रेस में पिछड़ने का ख़तरा और अंगीकार करो तो दिल, दिमाग

Continue Reading

कहाँ खो रही है हमारी बोलियों की मिठास

Rajesh Badal

एक ज़माना था जब कहा जाता था कि बच्चों का रिश्ता अपने माता पिता से ज़्यादा दादा-दादी या नाना नानी से होता है. लेकिन अब तस्वीर बदल गई है. दादी या

Continue Reading

अस्ताचल की ओर विचार का राजनीतिक सूरज

Rajesh Badal

भारतीय राजनीति में उन्नीस सौ अस्सी का साल विचार परक राजनीति के इंटेंसिव केयर यूनिट में जाने का साल है. छत्तीस बरस हो गए. तब से हर चुनाव में सबसे

Continue Reading

अँधेरे बन्द कमरे में रौशनदान

Rajesh Badal

पच्चीस बरस पहले की भारतीय पत्रकारिता. टाइम्स ऑफ इंडिया समूह की लोकप्रिय साहू अशोक जैन-रमेश जैन की जोड़ी हाशिए पर जा रही थी. नई पीढ़ी को मैनेजमेंट

Continue Reading

सलाम! एसपी

Rajesh Badal

उन दिनों सारे हिन्दुस्तान में खुशी की लहर ने लोगों के दिलों को भिगोना शुरू कर दिया था. आज़ादी की आहट सुनाई देने लगी थी. ये तय हो गया था कि दो चार

Continue Reading

सलाम! एसपी

Rajesh Badal

उन दिनों सारे हिन्दुस्तान में खुशी की लहर ने लोगों के दिलों को भिगोना शुरू कर दिया था. आज़ादी की आहट सुनाई देने लगी थी. ये तय हो गया था कि दो चार

Continue Reading

विलाप निरर्थक, मिलावट पर चिंता कीजिए

Rajesh Badal

इन दिनों राष्ट्रभाषा हिन्दी के बारे में अनेक स्तरों पर जानकार विलाप करते नज़र आते हैं. अगर उनकी बातों को गंभीरता से लिया जाए तो लगता है कि हिन्दी

Continue Reading

कितने लोग इस भगत सिंह को जानते हैं

Rajesh Badal

सोलह-सत्रह बरस के भगत सिंह की भाषा पर आप क्या टिप्पणी करेंगे? इतनी सरल और कमाल के संप्रेषण वाली भाषा भगत सिंह ने बानवे-तिरानवे साल पहले लिखी थी.

Continue Reading

दिल की ज़बान कोई फ़र्क़ नहीं करती

Rajesh Badal

जिस तरह सूरज की किरणों की कोई सरहद नहीं होती, बहते हुए झरने का कोई मज़हब नहीं होता और ठंडी हवाओं की कोई भाषा नहीं होती, वैसे ही साहिर के गीत और

Continue Reading

आत्मा से चिपका हुआ एक मृत्युगीत

Rajesh Badal

नीरज जो आज सोचते हैं, वो दुनियाभर से ग़ुम होती जा रही इंसानियत और उससे होने वाले खतरों पर है. क़रीब-क़रीब 90 साल का हो रहा एक इंसान आज भी कविता के

Continue Reading

कार्टून की दुनिया के महानायक से आख़िरी मुलाक़ात

Rajesh Badal

उस दिन पानी बरस रहा था. मैं अपनी कैमरा टीम के साथ पुणे में था और आरके लक्ष्मण से मिलने जा रहा था. रोमांचित था. बचपन से जिसका नाम सुनता रहा, उससे

Continue Reading