Dance choreographer Saroj Khan passes away

Irfan
File photo: Bollywood Choreographer Saroj Khan

File photo: Bollywood Choreographer Saroj Khan

हिंदी फिल्मों की प्रसिद्ध नृत्य निर्देशिका सरोज खान का शुक्रवार सुबह मुंबई में निधन हो गया। वे 71 वर्ष की थीं। पिछले महीने सांस की शिकायत होने पर उन्हें मुंबई के गुरु नानक अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां हृदय गति रुकने से उनकी मृत्यु हुई। अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित सरोज खान हिंदी फिल्मों की पहली प्रमुख नृत्य निर्देशिका थीं।

22 नवंबर 1948 को मुंबई में जन्मी सरोज खान का मूल नाम निर्मला नागपाल था और बहुत छोटी सी उम्र में उन्होंने फिल्मों में छोटे-मोटे रोल करना शुरू कर दिए थे। फिल्म नज़राना में उन्हें उस दौर की प्रख्यात अभिनेत्री श्यामा के बचपन का रोल निभाते हुए देखा जा सकता है।

फिल्मों में बतौर जूनियर आर्टिस्ट डांस करते हुए सरोज खान की मुलाक़ात उस दौर के चर्चित डांस कोरियोग्राफर बी सोहनलाल से हुई जिन्होंने दक्षिण भारत की फिल्मों में नृत्य निर्देशन करते हुए शोहरत के झंडे गाड़ रखे थे और अब हिंदी फिल्मों में भी सक्रिय थे।

सरोज खान ने बी सोहनलाल से डांस सीखते और उन्हें असिस्ट करते हुए 13 साल की उम्र में उनसे शादी कर ली थी तब बी सोहनलाल की उम्र 43 साल थी और वो 5 बच्चों के पिता थे।

स्वतंत्र रूप से डांस कोरियोग्राफी करते हुए सरोज खान के आरम्भिक 10-12  साल अपनी पहचान तलाशते हुए गुज़रे जो आखिरकार 1987 में उन्हें मिस्टर इण्डिया के गाने हवा हवाई के साथ मिली। उसके बाद सरोज खान ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
सरोज खान ने अपने नृत्य निर्देशन को लचीला और ग्राह्य रखा। उनके सिखाने और बताने में वह आकर्षण था जिससे नर्तक आसानी से मूवमेंट्स को पकड़ लेते थे और शब्दों के भाव अपनी भंगिमाओं में पिरो लेने में कामयाब हो जाते थे। सरोज खान ने क्लासिकल और ट्रेडिशनल डांस फॉर्म्स से वो सभी तत्त्व लिए जो उनके कोरियोग्राफ किये जानेवाले गाने या डांस में वैल्यू कर सकते थे।
शूटिंग के दौरान सरोज खान की फ्लोर पर उपस्थिति पूरी यूनिट के लिए उत्साह और उमंग से भरी रहती और वो अथक रूप से मनचाहा भाव पाने तक मेहनत करतीं जिसका साथ पूरी टीम देती। यह सरोज खान की ज़िंदादिली ही थी जिसने कई अभिनताओं और अभिनेत्रियों के मन से नृत्य की हिचक दूर की और कई बार कमज़ोर और अप्रासंगिक लगने वाले मूवमेंट्स को भी गाने के पिक्चराइज़ेशन को समृद्ध करने वाला बनाया।
यह सरोज खान की कल्पना शीलता ही थी जिसने अलग-अलग हीरो हीरोइनों में छुपे डांस टैलेंट्स को समझा और उन्हें बखूबी उभारा। श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित के डांस इस बात का प्रमाण हैं।
लगभग 4 दशकों में फैले अपने सक्रिय कोरियोग्राफी के करियर में सरोज खान ने करीब 2000 डांस डायरेक्ट किये और असाधारण सफलता हासिल की।
सरोज खान को अपने उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों सहित अनेक सम्मानों से नवाज़ा गया।
हाल के वर्षों में वे टेलीविज़न के रियल्टी शोज़ में अक्सर दिखाई देती थीं जहां डांस से जुड़े टैलेंट हंट्स में युवा प्रतिभागियों को जी खोल कर सराहती और उनका मनोबल बढ़ाती थीं।
हिंदी फिल्मों में मनोरंजन और लास्य की दुनिया सरोज खान के बिना थोड़ी सूनी ज़रूर हो गयी है लेकिन उनकी लगन, मेहनत, उनके काम करने का ढंग और ताज़गी से भरी उनकी नृत्य रचनाएं सदा याद की जाएंगी।
इरफ़ान, राज्य सभा टीवी