दिल्ली में चली ‘आप’ की झाड़ू, कमल हुआ साफ

RSTV Bureau

kejriwalदिल्ली विधानसभा की 70 सीटों के नतीजे आ गए हैं. नतीजों में आम आदमी पार्टी को 67 सीटों पर जीत मिली है, वहीं भाजपा दहाई का आंकड़ां भी पार नहीं कर पाई है. कांग्रेस पार्टी दिल्ली में अपना खाता भी नही खोल सकी.

नई दिल्ली सीट से ‘आप’ संयोजक अरविंद केजरीवाल चुनाव जीत गए हैं. केजरीवाल ने भाजपा की नुपूर शर्मा को 31 हजार 583 वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त दी.

कृष्णा नगर सीट से भाजपा नेता किरण बेदी दो हजार दो सौ सत्तर वोटों से चुनाव हार गईं. बेदी ने दिल्ली में हार पर कहा कि ये मेरी नहीं बल्कि भाजपा की हार है.

कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार अजय माकन 51 हज़ार से ज्यादा वोटों से चुनाव हार गए माकन अपनी सीट से आम आदमी पार्टी और भाजपा के बाद तीसरे स्थान पर रहे. माकन ने पार्टी और अपनी हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है.

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की ऐतिहासित जीत पर प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, जेडीयू प्रमुख शरद यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजसेवी अन्ना हजारे समेत कई लोगों ने पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के बधाई दी.

पांच साल केजरीवाल

दिल्ली की जनता ने शायद आम आदमी पार्टी के इस नारे को अपने दिलों में उतार लिया, पार्टी को मिला बंपर जनादेश इसी बात की गवाही देता है. इस बार दिल्ली में ‘आप’ ने अपने विरोधियों के गढ़ में भी सेंध मार दी.

कृष्णा नगर, जनकपुरी, लक्ष्मीनगर, सीलमपुर, गांधी नगर, मुस्तफाबाद वो इलाके हैं जहां लगातार भाजपा और कांग्रेस को जीत मिलती रही है, लेकिन इस बार पार्टी ने इन इलाकों में भी जीत हासिल की है.

2013 में पार्टी को 28 सीटें मिली थी और कांग्रेस के समर्थन से केजरीवाल ने दिल्ली में 49 दिनों की सरकार चलाई थी.

तीन सीटों पर सिमटी भाजपा 

2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में 32 सीटें जीतने वाली भाजपा तीन सीटों पर सिमट गई. रोहिणी से विजेंद्र गुप्ता, मुस्तफाबाद से जगदीश प्रधान और विश्वास नगर से ओम प्रकाश शर्मा ही दिल्ली में कमल खिला पाने में सफल रहे.

पार्टी के नेता जगदीश मुखी, नुपूर शर्मा, साहब सिंह चौहान, एम एस धीर, रजनी अब्बी समेत कई दिग्गजों को हार झेलनी पड़ी. वहीं ‘आप’ से भाजपा में गए विनोद कुमार बिन्नी भी पड़पड़गंज से चुनाव हार गए.

नहीं खुला खाता

2013 के दिल्ली चुनाव से पहले दिल्ली में 15 साल कांग्रेस का शासन रहा. शीला दीक्षित लगातार तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी, पिछले चुनाव में केजरीवाल ने शीला दीक्षित को हराया था और कांग्रेस को आठ सीटों पर जीत मिली थी.

इस बार पार्टी दिल्ली में खाता भी नहीं खोल सकी. पार्टी के पूर्व सांसद महाबल मिश्रा, पूर्व मंत्री राजकुमार चौहान, हसन अहमद समेत कई बड़े नेता भी राज्य में पार्टी का खाता नहीं खोल पाए.