रंगमंच पर फ़िल्म ‘डैडी’ का री-क्रिएशन

Adil Raza Khan

daddy_theatreसेल्यूलॉयड के परदे पर तकरीबन 25 बरस पहले सिनेप्रेमियों के दिलों में ख़ास जगह बनाने वाली बहुचर्चित फ़िल्म डैडी की कहानी ने एक नई शक्ल में दोबारा दस्तक दी. राजधानी दिल्ली में दिग्गज फिल्मकार महेश भट्ट की  फ़िल्म डैडी के नाट्य मंचन के ज़रिए एक बाप-बेटी की कहानी फिर से दोहराई गई लेकिन इस बार बड़े या छोटे परदे के बजाय सीधे रंगमंच उन ज़िंदा किरदारों का गवाह बना. दिल्ली के श्रीराम सेंटर ऑडीटोरियम में 4 और 5 अगस्त को फ़िल्म डैडी का नाट्य मंचन किया गया.

नाटकों को बड़े परदे पर उतारने के चलन के बरअक्स फिल्मों को रंगमंच पर फिर से जीवित करना अपने आप में एक अनूठी पहल है. फिल्म अर्थ के नाट्य मंचन को मिली सफलता ने सिनेमा को थियेटर स्टेज पर जगह देने की कहानी गढ़ी. इसी कड़ी में ‘डैडी’ की कहानी भी रंगमंच के सितारों की ज़बानी दोहराई गई.

‘डैडी’ पूजा नाम की एक ऐसी लड़की की कहानी है जो बचपन से लेकर जवान होने तक बाप के साये से दूर है. पिता के ज़िंदा रहते हुए भी एक अनाथ की मानिंद अपनी ज़िंदगी जीती है तो सिर्फ इसलिए कि उसके नाना के बकौल पूजा के पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं. डैडी की कहानी इस तरह आगे बढ़ती है कि जवानी की दहलीज़ पर क़दम रख चुकी पूजा को अनजान फोन कॉल्स आने शुरू होते हैं जिसका संवाद महज़ ‘आई लव यू’ तक आकर सिमट जाता है. इसकी ख़बर जब पूजा के नाना कान्ताप्रसाद को लगती है तो उनके इशारे पर फोन करने वाले शख्स के साथ मारपीट की राह अपनाई जाती है ताकि वो पूजा की ज़िंदगी से दूर हो जाए, जो कि उसका पिता है.

कहानी उस वक्त एक नया मोड़ लेती है जब पूजा के साथ बदसलूकी की घटना सामने आती है और पूजा को बचाने उसका बाप सामने आ जाता है. मैले-कुचैले लिबास में खड़ा एक शरीर, जो शराब के नशे में धुत है लेकिन उसे अपनी बेटी से प्यार है. पूजा को पहली बार उसके पिता के ज़िंदा और इस हालत में होने का पता चलता है. यहीं से शुरु होती है बाप-बेटी के रिश्ते की एक भावनात्मक दास्तान.

महेश भट्ट निर्देशित फिल्म डैडी में पिता का किरदार अनुपम खेर जबकि पुत्री की भूमिका महेश भट्ट की बड़ी बेटी पूजा भट्ट ने निभाई थी. इसी फिल्म के साथ पूजा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी. अनुपम खेर को ‘डैडी’ के लिए साल 1990 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार सहित कई अवार्ड से नवाज़ा जा चुका है.

फिल्मी कहानियों को रंगमंच पर उतारने के बारे में मशहूर फिल्मकार महेश भट्ट कहते हैं कि, “संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्मों को थियेटर जैसे माध्यमों के ज़रिए नई पीढ़ी तक पहुंचाना ज़रूरी है और इस दिशा में ये एक अच्छी कोशिश है”.

जाने माने थियेटर एक्टर-डायरेक्टर और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के ग्रेजुएट दानिश इक़बाल के निर्देशन में डैडी का नाट्य मंचन किया गया. इस नाटक में मुख्य किरदारों में पिता का रोल रंगकर्मी इमरान ज़ाहिद ने अदा किया जबकि बेटी के रोल में नवोदित रंगमंच कलाकार तान्या पुरोहित ने अपने उम्दा प्रदर्शन से नाट्य प्रेमियों की तालियां बटोरीं.

डैडी के किरदार को स्टेज पर अभिव्यक्त कर इमरान ज़ाहिद बेहद उत्साहित हैं. इमरान के मुताबिक इस तरह के किरदार को करना सपना साकार होने जैसा है. इमरान की भूमिका की तारीफ़ महेश भट्ट ने ख़ुद अपनी ज़बानी करते हुए कहा कि इमरान गुणवत्तापूर्ण कार्य करने में सक्षम हैं. ग़ौरतलब है कि इससे पहले इमरान ने महेश भट्ट निर्देशित फिल्म ‘अर्थ’ के नाट्य मंचन में भी मुख्य भूमिका अदा की थी.

वहीं बेटी का किरदार अदा कर तान्या पुरोहित भी नाटक की सफलता से खासी उत्साहित हैं. तान्या ने बताया कि “ये रोल मेरे लिए काफी चैलेंजिंग था, मुझे उस किरदार को निभाना था जो करीब 25 साल पहले दिग्गज अदाकारा पूजा भट्ट के फिल्मी करियर की एक मिसाल है. उसपर से दर्शक दीर्घा में जब पूजा भट्ट ख़ुद बैठी हों तो स्टेज पर परफॉर्म करने वाले कलाकार का नर्वस होना लाज़िमी है लेकिन परफॉर्मेंस के बाद पूजा भट्ट जैसी कलाकार की ज़बान से निकली तारीफें, नए कलाकारों में आत्मविश्वास पैदा करती हैं”.

तान्या आगे बताती हैं कि “अपने ज़माने की कामयाब फिल्मों की कहानियां, रंगमंच पर उतारना एक चुनौतीपूर्ण काम है. खासकर नाज़ुक रिश्तों पर बनी संवेदनशील कहानियां का नाट्य मंचन और भी मुश्किल है जहां न तो कोई री-टेक होता है न ही फिल्मों जैसा कोई म्यूज़िक और दूसरा तकनीकी पहलु मौजूद होता है. इस सबके बावजूद अच्छे निर्देशन और साथी कलाकार के सहयोग से चीज़ें सहज हो जाती हैं”.

डैडी के इस नए अवतार पर अपनी राय देते हुए पूजा भट्ट कहती हैं कि इस कहानी ने बहुतों के दिलों को छुआ है. डैडी की कहानी आज भी प्रासंगिक है. मुझे उम्मीद है कि इस नए रूप में कहानी कामयाबी की नई इबारत लिखेगी.

डैडी प्ले की सफलता पर निर्देशक दानिश इकबाल कहते हैं कि ऐसे समय में जब लोग रंगमंच से फिल्मी दुनिया में अपना कदम जमा रहे हैं, ऐसे में महेश भट्ट जैसे लोगों का थियेटर को तवज्जो देना रंगमंच के लिए एक सुखद अनुभव है. ग़ौरतलब है कि महेश भट्ट ने नाटक के कलाकारों के साथ अपने निर्देशन कौशल अनुभवों को साझा किया जिससे कलाकारों का अभिनय और निखरकर सामने आ पाया.

इस साल ‘डैडी’ का नाट्य मंचन भारत के कई अलग-अलग शहरों में किया जाना है.